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चुनावी ब्लॉग

  • बिहार चुनाव में बढ़ता जा रहा बगावत के बिगुल का शोर
    बिहार में भी इस बार पार्टियों की सबसे बड़ी चिंता अपने बागियों को काबू में रखना है। चाहे महागठबंधन हो या फिर एनडीए, हर जगह बागी ताल ठोककर खड़े हैं।
  • बाबा की कलम से : बिहार चुनाव में भाई-भतीजावाद, दामादों का दम कम
    बिहार चुनाव में दामादों की पूछ कम होने से रिश्तों पर असर होता दिख रहा है। वैसे तो बिहार और बंगाल में दामादों की खातिरदारी खूब होती है, मगर चुनाव तो चुनाव है, यहां सब जायज होता है।
  • सुशांत सिन्हा का ब्लॉग : बिहार विधानसभा चुनाव का 'दलित फैक्टर'
    बिहार में चुनावी आंच पर मुद्दों की हांडी तो चढ़ा दी गई है लेकिन अभी यही नहीं तय हो पाया है कि पकेगा क्या और हांडी में क्या कितना डलेगा... मतलब बीजेपी और उसके सहयोगी दल न तो सीएम पद के उम्मीदवार का नाम तय कर पाए हैं और न ही यह कि कौन कितनी सीट पर लड़ेगा।
  • राजीव पाठक : जंगलराज के बावजूद लालू यादव क्यों अब भी हैं पिछड़ों के मसीहा
    सबसे पहले तो मैं ये बताना चाहता हूं कि ये ब्लॉग लिखने की वजह यह है कि मैं एक नॉन-रेसिडेंट बिहारी हूं। विदेश में नहीं, बल्कि गुजरात के अहमदाबाद में रहता हूं। हर थोड़े वक्त पर बिहार जाता रहता हूं, इसलिए शायद बिहार की बदलती तस्वीर को ज्यादा अच्छी तरह से महसूस कर पाता हूं।
  • सुशांत सिन्‍हा का ब्‍लॉग : गड़बड़ा गया है बिहार चुनाव का DNA
    किसी चुनाव का DNA क्या होता होगा? ये सवाल यूं ही तो मन में नहीं आया। दरअसल आजकल बिहार चुनाव में इतना DNA-DNA हो रहा है कि ये सवाल भी बिन बुलाए मेहमान की तरह टपक पड़ा।
  • मैं बिहार हूं, मेरे लिए किसकी झोली में क्‍या?
    मैं बिहार हूं......हूं तो हूं.... मैं जो था वही हूं जो हूं वही रहूंगा। बिहार क्या है, कौन है बिहार? दरअसल ये सवाल ही क्यों है कि किसका है बिहार। ऐलान ही तो हुआ है कि पांच चरणों में मुझे लेकर चुनाव होंगे।
  • आखिर मुलायम सिंह यादव को इतना गुस्सा क्यों आता है...
    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव इन दिनों नाराज चल रहे हैं। हर राजनीतिक व्यक्ति इन दिनों इसी सवाल का जवाब खोज रहा हैं कि 'नेताजी' को गुस्सा क्यों आता है।
  • बदला, बदला और बदला... बस यही होगा बिहार में चुनावी मुद्दा
    बिहार विधानसभा चुनावों की अधिसूचना अब किसी भी दिन चुनाव आयोग की घोषणा के साथ जारी हो सकती है। इस देश में हर राजनीतिक दल, हर राजनेता, हर राजनीतिक कार्यकर्ता को बस बिहार के चुनाव के परिणाम का इंतजार है।
  • निधि का नोट : बिहार में चुनावी जंग से पहले ही महागठबंधन में दरार
    बिहार चुनाव से पहले महागठबन्धन में दरार पड़ गई है। आज समाजवादी पार्टी ने खुद को इस महागठबंधन से अलग कर लिया। सपा के 'थिंक टैंक' कहे जाने वाले वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि ' हम एक सम्मानजनक तरीके से अपने बलबूते चुनाव लड़ेंगे।'
  • सेलुलर जेल की यातना सह रहे हैं बिहारी मज़दूर
    मैंने अंडमान की सेलुलर जेल भी देखी है। दिल्ली के कापसहेड़ा और गुड़गांव के उन गांवों को भी देखा है, जहां बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से आए मज़दूर रहते हैं। आपको हैरानी होगी।
  • आंकड़ों की बाज़ीगरी, क्या बिहार का वोटर ये समझ रहा है?
    मैं एक राष्ट्रीय रैली आयोग का प्रस्ताव करना चाहता हूं। विधि द्वारा स्थापित न होने के बाद भी मैं राष्ट्रीय रैली आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने पर रैलियों में आने वाले लोगों की गिनती का कोई न कोई विश्वसनीय पैमाना ज़रूर बनाऊंगा।
  • निधि का नोट : बिहार में एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान
    बिहार चुनाव में अब गणित एनडीए खेमे का कैसा रहेगा, नज़र इस पर रहेगी। एनडीए के सीट बंटवारे पर पहली बैठक हुई भाजपा अध्यक्ष अध्यक्ष अमित शाह के घर पर, लेकिन किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी यह तय नहीं हो सका।
  • बिहार की पोस्टर पॉलिटिक्स : मिहिर गौतम
    बिहार का पैकेज पॉलिटिक्स बेशक सुर्खियों में हो, लेकिन पटना पहुंचते ही अहसास हो जाता है कि वोट के लिए पोस्टर पॉलिटिक्स की भी अहमियत है। प्लेटफॉर्म से बाहर आते वक्त आपको चारों तरफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नज़र आते हैं।
  • मोदी के जवाब में नीतीश का पैकेज, युवा वोटर पर लगाया दांव
    सत्तर पचहत्तर दिनों से पूर्व सैनिक जंतर मंतर पर अपनी मांग को लेकर धरने पर हैं। यह धरना उन सभी वर्गों के लिए नज़ीर बनना चाहिए जिनसे चुनाव के वक्त नेता वादे करते हैं और सरकार बनने के बाद भूल जाते हैं। उनकी एकजुटता का नतीजा इतना तो निकला है कि सरकार युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही है।
  • चुनाव से पहले अपने आप से हारता बिहार : रवीश कुमार
    बिहार अपने आप से हारता जा रहा है। चुनाव में दो में से कोई एक गठबंधन तो जीत जाएगा लेकिन इस चुनाव में बिहार की हार तय होने जा रही है। इतना उद्देश्यहीन और हल्का चुनाव कभी नहीं देखा। हर तरफ़ अनैतिक गठबंधन हैं।
  • निधि का नोट : बिहार के चुनावी समर में छवियों का घमासान
    बिहार चुनाव अब छवियों का घमासान बनता जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से गले मिलते दिखाई दिए। दिल्ली में दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जम कर निशाना साधा और फिर खबर आई कि अरविंद केजरीवाल 27 तारीख को बिहार जाकर साझा कार्यक्रम करेंगे।
  • बिहार के विकास पर सियासत, मोदी का नीतीश पर निशाना
    विशेष दर्जा और विशेष पैकेज में क्या अंतर है इसे राजनीतिक विद्वान बांचते रहेंगे लेकिन जिन्हें मंच लूटना था वो लूट ले गए। जनता को एक फाइनल फीगर मिल गया है। चौक चौराहे पर लोग सेक्टर के आधार पर हिसाब नहीं लगाएंगे।
  • बाबा की कलम सेः डीएनए विरुद्ध डीएनए, नीतीश बनाम मोदी
    डीएनए यानि डीआॅक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड, इसकी खोज वाॅटसन और क्रिक ने 1953 में की थी। तब उन्होने ने सोचा भी नहीं होगा कि 62 साल बाद उसी डीएनए पर बिहार में राजनैतिक बहस होगी। उस प्रदेश के लोग इस पर बहस कर रहे हैं, जहां से कहा जाता है कि सबसे अधिक अफसर चुने जाते हैं।
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