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एसीपी के दिल्ली पुलिस मुख्यालय से कूदकर खुदकुशी करने के मामले में नया मोड़, पैन ड्राइव से खुला राज

पहले यह मामला एक सामान्य सुसाइड का लग रहा था लेकिन अब एक पैन ड्राइव के सामने आने पर मामले में नया मोड़ आ गया

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एसीपी के दिल्ली पुलिस मुख्यालय से कूदकर खुदकुशी करने के मामले में नया मोड़, पैन ड्राइव से खुला राज

एसीपी प्रेम बल्लभ (फाइल फोटो).

नई दिल्ली:

दिल्ली पुलिस मुख्यालय में दिल्ली पुलिस कमिश्नर से लेकर तमाम अफसरों के दफ्तर हैं. इसी पुलिस मुख्यालय  की 10 वीं मंज़िल से 28 नवंबर की सुबह एसीपी प्रेम बल्लभ ने कूदकर आत्महत्या कर ली थी. घटना की जानकारी लगते ही पूरे पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मच गया था. पहले यह मामला एक सामान्य सुसाइड का था लेकिन अब मामले में नया मोड़ आ गया है.

एसीपी के भाई हरीश शर्मा को एसीपी की एक पेन ड्राइव मिली है, जिसने ACP की खुदकुशी में दिल्ली पुलिस महकमे को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है.

सन 1986 में बतौर हेड कांस्टेबल  दिल्ली पुलिस में भर्ती प्रेम बल्लभ को साल 2016 में राष्ट्रपति अवार्ड से नवाजा गया था. हरीश शर्मा के मुताबिक प्रेम बल्लभ ने अपनी खुदकुशी के ठीक एक दिन पहले कम्प्यूटर पर लिखे अपने नोट में जो कुछ लिखा उसने महकमे के ही दो इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर और एक एएसआई को कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है.

दिल्ली पुलिस के ACP ने पुलिस मुख्यालय की इमारत से कूदकर की खुदकुशी


प्रेम बल्लभ ने नोट में लिखा था, "ASI OP और SI विनोद और AC-1 (Inder pal)ने मुझे कई बार कई मौकों पर मिस गाइड किया है क्योंकि मेरा स्वभाव यकीन करने का है. जैसे ही मुझे इस बारे में पता चला. इसने मुझे stress/strain/ और डिप्रेशन में धकेल दिया. इसकी वजह से मेरा हाइपर डिप्रेशन बढ़ गया. जैसे तैसे करके मैंने इसे संभाला, इससे मैं लड़ा. अब मैं अपने डिप्रेशन को कंट्रोल करने में पूरी तरीके से असफल रहा हूं. जिसकी वजह से मेरे ऑफिशियल परफॉर्मेंस पर भी इसका असर पड़ रहा है क्योंकि मैंने नींद की दवाइयां लेनी शुरू कर दी. यह डिप्रेशन मुझे C&T ब्रांच में काम करने वाले लोगों की वजह से हुआ, जिसमें से एक इंस्पेक्टर रामलाल भी है. जो बहुत ही कनिंग है और मेरे मुकाबले उनका रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है. पिछले तीन चार सालों में कई बार उनका ट्रांसफर किया जा चुका है. मैं पहले उन्हें अपना दोस्त समझता था क्योंकि हम एक साथ काम करते थे. मैंने कई बार उनकी मदद की है उनके शादी के मुद्दे पर भी मैंने उनकी मदद की. मैं अपने परिवार से माफी चाहता हूं. मैं उनसे उम्मीद करता हूं कि वह अपनी भावनाओं पर काबू रखेंगे. मैं डिपार्टमेंट के साथ लड़ाई नहीं कर सकता, जिस डिपार्टमेंट के साथ मैंने पूरी इमानदारी और दिल से पिछले 31 साल से काम किया है. till ACP/2nd BN DAP. जब मैं 2nd Bn में और पीएचक्यू में था तो मैंने वीआरएस लेने की कोशिश भी की. लेकिन मैं ऐसा करने में सफल नहीं हो सका क्योंकि मेरे कुछ चाहने वालों ने मुझे सलाह दी और मैंने अपने वीआरएस लेने के फैसले को वापस ले लिया. मैंने पीएचक्यू में कई सारे कदम उठाए वीआरएस लेने की कोशिश की लेकिन सीनियर अधिकारियों ने मुझे ऐसा ना करने की सलाह दी. अगर मैं वीआरएस ले चुका होता तो मैं इस तरीके का काम नहीं करता लेकिन अब क्या किया जा सकता है. जीपीएस, ग्रेजुएटी, पेंशन एक्स्ट्रा दिलाने में मेरे परिवार की मदद करें. मेरी मां, मेरा भाई, मेरी बहन और मेरे बेटी पूरी तरीके से बेगुनाह हैं. इन सभी ने मुझे समझाने की कोशिश की, बहुत बार इन्होंने मुझे समझाया. लेकिन मैं डिप्रेशन से बाहर नहीं आ सका. मैं अपने परिवार को मेरे डिप्रेशन के कारणों के बारे में भी नहीं बता सकता अगर हम जिंदगी को खुशी से नहीं जी सकते तो फिर उदासी में जिंदगी किस काम की.  डिप्रेशन और उदास रहना कई बार बुरे नतीजे लाता है. इससे ज्यादा मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता. मुझे लगता है ज्यादा भरोसा करने का स्वभाव और काम के प्रति ज्यादा डिवोशन की वजह से मैं इस स्टेट की तरफ चला गया. मैं ज्यादा सोचने लगा और डिप्रेशन का शिकार हो गया. मेरे नौकरी के समय में मैंने कभी भी काम चोरी नहीं की कभी भी मुझे किसी भी तरीके की कोई मेडिकल शिकायत नहीं हुई. सिर्फ जो कि पिछले 28 दिनों से है. मुझे पता है कि अब हर एक गलती के लिए मेरे जिम्मेदार मेरी ब्रांच में मुझे जिम्मेदार ठहराया जाएगा. लेकिन आप से निवेदन है कि मेरे परिवार को परेशान ना करें क्योंकि वह पहले से ही परेशान हैं तिनका तिनका करके घर को जोड़ा था मगर सब बिखर गया"

हरीश के मुताबिक खुदकुशी से पहले एसीपी प्रेम बल्लभ ने 58 रिवॉर्ड पर हस्ताक्षर किए थे. इस रिवार्ड में 44 मामले लापता या अपहृत लोगों को ढूंढ़ने वाले पुलिसकर्मियों के लिए थे. इसके अलावा 14 रिवार्ड उन पुलिसकर्मियों के लिए था जिन्होंने मेहनत करके अज्ञात शवों की पहचान की थी.

VIDEO : एसीबी कार्यालय में हंगामा

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फिलहाल इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है लेकिन अब उन चारों पुलिसकर्मियों को एक बार भी पूछताछ के लिए नही बुलाया गया है. पीड़ित परिवार के मुताबिक उन चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो.



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