Coronavirus के खिलाफ दिन-रात जुटे हेल्थ वर्कर, सैलरी से ज्यादा का चालान कैसे भरें?

Coronavirus: दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने कई डॉक्टरों ओर नर्सों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया

Coronavirus के खिलाफ दिन-रात जुटे हेल्थ वर्कर, सैलरी से ज्यादा का चालान कैसे भरें?

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

दिल्ली में कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ जंग लड़ रहे ज्यादातर डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो गई है. इस समस्या का नाम है- ट्रैफिक पुलिस का चालान. लॉकडाउन के दौरान कई डॉक्टरों ओर नर्सों पर सैकड़ों नहीं, हजारों नहीं, बहुतों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है. 

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की भेजी गई एक तस्वीर में कार जेब्रा क्रासिंग के पीछे खड़ी है लेकिन डॉक्टर अभिजीत का चालान हो चुका है. ऐसे ही डॉक्टर आनंद भी हैं जिनके हाथों में दर्जनभर चालानों की लिस्ट और करीब पैंतीस हजार रुपये का जुर्माना थमा दिया गया है. ये वो डॉक्टर हैं जो दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में कोविड 19 के संक्रमित मरीजों के इलाज में दिन-रात जुटे हैं. 

ट्रैफिक पुलिस के चालान की गाज एक अस्पताल की नर्सिंग आफीसर कविता पर भी गिरी है. लॉकडाउन में बीते डेढ़ महीने के दौरान इनका 60 बार चालान हुआ है जिसकी कुल रकम करीब सवा लाख रुपये है. तनख्वाह से ज्यादा जुर्माने की रकम कहां से लाएं, अब इसी को लेकर वे तनाव में हैं. कविता ने कहा कि एक महीने का एक लाख रुपये का जुर्माना आया है. मैं हेल्थ वर्कर हूं. मैं कैसे जुर्माना भरूंगी. 

दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग रूटों पर करीब 134 कैमरे लगाए हैं जिसके चलते ओवर स्पीडिंग, रेड लाइट जंप और जेब्रा क्रासिंग के मामले में ऑटोमेटिक चालान हो जाते हैं. दिल्ली पुलिस ने अब तक करीब साढ़े सात लाख चालान किया हैं. इसमें अकेले पांच लाख से ज्यादा ओवर स्पीडिंग के चालान हैं.

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हालांकि पुलिस फिलहाल जुर्माने में छूट देने के मूड में कतई नहीं है. पुलिस कहती है कि जुर्माने की रकम अगर कोई नहीं भरना चाहता है तो वह कोर्ट जाकर माफ करा सकता है. लेकिन लॉकडाउन पीरियड में आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों में इन चालानों को लेकर गुस्सा है.

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लॉकडाउन पीरियड में खाली सड़कों पर जो भी गाड़ियां दौड़ रही हैं वे आवश्यक कामों के चलते ही निकली हैं. ये बात भी सही है कि ट्रैफिक नियमों का पालन कराना भी जरूरी है लेकिन जिस तरह से धड़ल्ले से लॉकडाउन पीरियड में चालान काटे जा रहे हैं उससे लोगों को लग रहा है कि पुलिस की पहली  प्राथमिकता चालान काटना है न कि ट्रैफिक नियमों का पालन करवाना.