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दिल्ली में यमुना के डूब क्षेत्र में पानी संरक्षित करने की योजना, अरविंद केजरीवाल ने की घोषणा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यमुना डूब क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए पायलट परियोजना का ऐलान किया

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दिल्ली में यमुना के डूब क्षेत्र में पानी संरक्षित करने की योजना, अरविंद केजरीवाल ने की घोषणा

दिल्ली में सीएम अरविंद केजरीवाल ने यमुना के डूब क्षेत्र में पानी के संरक्षण की परियोजना की घोषणा की है.

खास बातें

  1. पल्ला और वजीराबाद क्षेत्र में एक बड़ा जलाशय बनाने की घोषणा
  2. डूब क्षेत्र में छोटे-छोटे तालाब बनाए जाएंगे
  3. तालाबों में संचित पानी से भूजलस्तर बढ़ेगा
नई दिल्ली:

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को यमुना के डूब क्षेत्र में जल के संरक्षण के लिए एक पायलट परियोजना तथा पल्ला और वजीराबाद क्षेत्र में एक बड़ा जलाशय बनाने की घोषणा की.

केजरीवाल ने कहा कि डूब क्षेत्र में छोटे-छोटे तालाब बनाए जाएंगे जो यमुना के अधिक जलस्तर के जल का संचय करेंगे. उन्होंने कहा, यह जल नीचे जाएगा और भूजल का संभरण करेगा. दिल्ली के मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. केजरीवाल ने कहा कि सरकार तालाब बनाने के लिए किसानों से जमीन किराए पर लेगी.

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए पांच सदस्यों वाली एक टीम गठित की गई है और उसकी रिपोर्ट सोमवार तक जमा करने को कहा गया है.

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश मे पानी की कमी है, लड़ाइयां हो रही है. दिल्ली में भी ग्राउंड वाटर नीचे हो गया है. हमने यमुना के पानी को इकट्ठा करने का बड़ा प्लान बनाया है. केबिनेट में प्रस्ताव पास हो गया है. आने वाली बारिश में यमुना के फ्लड प्लेन में पानी बचाया जाएगा. अभी वक़्त कम बचा है, लेकिन काम ठोस रूप में शुरू होगा. सलाहकार और आईआईटी की रिपोर्ट से साफ है कि यमुना के जरिए काफी पानी बचाया जा सकता है.


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उन्होंने कहा कि पल्ला से वजीराबाद तक किनारों पर पानी का संचयन होगा. छोटे-छोटे तालाब बनाए जाएंगे. ओवरफ्लो वाला पानी इनमें जाएगा, तब वह पानी जमीन के नीचे जाएगा. दिल्ली की जमीन का पानी स्तर यमुना से शहर की ओर आता है. इससे पानी जो इकठ्ठा होगा, वह शहर के नीचे जाएगा.

केजरीवाल ने कहा कि केंद्रीय जल मंत्री गजेंद्र शेखावत ने सकारात्मक बात कही, जल्द अप्रूवल आ जाएगी. ये जमीन किसानों की है, जिसे किराये पर लेंगे, इसके लिए कमेटी बनाई गई है. उन्होंने कहा कि जिन इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग है, वहां सफाई सुनिश्चित हो. पल्ला से वजीराबाद तक 30 किलोमीटर है और चौड़ाई तीन किलोमीटर है. साल में एक महीने पानी ज्यादा होता है, जिसे बचाया जाएगा. इस बार ट्रायल करेंगे कि कितना पानी बचा सकेंगे.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि पानी को बचाया जाए, हम भी वही कर रहे हैं. हमें सिर्फ तालाब खोदना होगा, जिसमें खर्च कम होगा. इसमें ज्यादा इन्वेस्टमेंट नहीं होगा. 250 झीलों के पुनर्जीवन का काम जारी है, काफी पैसा भी रिलीज कर दिया है.

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