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दिल्ली के सरकारी स्कूलों के गेस्ट टीचर भले ही स्थायी नहीं हो रहे लेकिन उनके लिए आई खुशखबर

डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा- स्कूल दिल्ली सरकार बनाए, शिक्षकों की नियुक्ति केंद्र करे! यह कैसी पॉलिसी?

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दिल्ली के सरकारी स्कूलों के गेस्ट टीचर भले ही स्थायी नहीं हो रहे लेकिन उनके लिए आई खुशखबर

मनीष सिसोदिया ने दिल्ली की स्कूलों में शिक्षकों की समस्या को लेकर मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं.

खास बातें

  1. 28 फरवरी को 22 हजार गेस्ट टीचरों की सेवाएं समाप्त हो गईं
  2. एक अप्रैल से नया सेशन शुरू होगा लेकिन दिल्ली में टीचर नहीं हैं
  3. दिल्ली के सभी गेस्ट टीचर 60 साल की उम्र तक सेवा में रहेंगे
नांदेड़:

दिल्ली के डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने कहा है कि दिल्ली में गेस्ट टीचर (Guest Teacher) की 64 हज़ार पोस्ट हैं. इनमें से 58 हज़ार पोस्टों पर काम कर रहे हैं. 22 हज़ार गेस्ट टीचर हैं. हर साल भर्ती प्रक्रिया को खत्म करके उन्हें कंटीन्यू किया जा रहा है. उन्हें कम तनख्वाह मिलती थी. अब 35 हज़ार मिल रही है.

उन्होंने कहा कि सीटों के इशू को LG से डिस्कस किया था. बाद में सेवा का मसला आने के बाद टीचरों को रखने, हटाने में हमारा दखल नहीं था. अजीब स्थिति है स्कूल हम बनाएंगे लेकिन टीचर कितने होंगे केंद्र तय करेगा. दो साल से इन्हें स्थायी करने की मांग कर रहे हैं.

सिसोदिया ने कहा कि 22 हज़ार टीचर नौकरी से चले गए. अगर उन्हें बाहर निकाल देंगे तो कैसे स्कूल चलाएंगे. परीक्षा चल रही है, कैसे बोर्ड एग्जाम होंगे. एक अप्रैल से नए सेशन के लिए टीचर नहीं हैं. शिक्षा विभाग का भट्टा बिठाने की कोशश कर रही है बीजेपी की केंद्र सरकार. उन्होंने कहा कि कैबिनेट की पॉलिसी है कि सरकार के साथ जितने भी गेस्ट टीचर काम कर रहे हैं सभी रेगुलर टीचर की उम्र तक काम करते रहेंगे, जो कि 60 साल है. उससे पहले हटाया नहीं जाएगा. इसको लेकर LG के पास जा रहा हूं.

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मनीष सिसोदिया ने कहा कि 22 हजार गेस्ट टीचरों को उनकी काबलियत के आधार पर नियुक्त किया जाता है. दिल्ली सरकार का टीचरों को रखना, हटाना सर्विसेस का मामला है. बीजेपी की दादागिरी है कि चुनी हुई सरकार गेस्ट टीचर को पक्का नहीं कर सकती है. ये काम केंद्र कर सकता है. दिल्ली विधानसभा में गेस्ट टीचरों को पक्का करने का बिल पास किया लेकिन केंद्र नहीं माना. गेस्ट टीचरों के सिर पर तलवार लटक रही है.

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उन्होंने कहा कि 28 फरवरी तक गेस्ट टीचरों की नियुक्ति थी. फिलहाल 22 हजार गेस्ट टीचरों के जॉब जा चुके हैं. एग्जाम सिर पर हैं लेकिन दिल्ली सरकार के पास टीचर नहीं हैं. एक अप्रैल से नया सेशन शुरू होगा लेकिन दिल्ली में टीचर नहीं हैं. बीजेपी की शिक्षा विभाग का भट्टा बिठाने की कोशिश है.

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उन्होंने कहा कि केबिनेट ने आज एक पॉलिसी पास की है. जितने भी गेस्ट और कॉन्ट्रेक्ट टीचर सरकार के साथ काम कर रहे हैं उन पर पॉलिसी लागू होगी. सरकार ने पॉलिसी बनाई है कि टीचर 60 साल की उम्र तक काम करेंगे. उन्हें हटाया नहीं जाएगा. इस पॉलिसी को लेकर मैं एलजी के पास जा रहा हूं.15 लाख बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. लेकिन टीचर नहीं होंगे तो पढ़ाई कैसे चलेगी. शिक्षा दे रहे हैं या मदारी का खेल खेल रहे हैं.



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