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मुंबई : संजय गांधी नेशनल पार्क में बने आश्रम का अवैध निर्माण तोड़ने की तैयारी, तनाव

करीब 60 साल पुराने सदानंद बाबा आश्रम के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया, लोगों का प्रवेश बंद किया गया

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मुंबई : संजय गांधी नेशनल पार्क में बने आश्रम का अवैध निर्माण तोड़ने की तैयारी, तनाव

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त तक आश्रम हटाने का आदेश दिया
  2. वन्य जीवों को नुकसान की शिकायत पर हो रही कार्रवाई
  3. सदानंद आश्रम की ओर से खुद तोड़ा जा रहा निर्माण
मुंबई:

मुंबई के समीप वसई पूर्व में संजय गांधी नेशनल पार्क में बने 'बालयोगी श्री सदानंद महाराज आश्रम' के अवैध निर्माण को तोड़ने को लेकर तनाव है. आश्रम के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और बाहर के किसी भी व्यक्ति को आज आश्रम की तरफ जाने नहीं दिया जा रहा है. हालांकि आश्रम का दावा है कि सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करते हुए वह खुद ही वहां बने अवैध निर्माणों को तोड़ रहा है. तकरीबन 50 से 60 साल पुराने सदानंद बाबा आश्रम के खिलाफ पर्यावारण कार्यकर्ता  देबी गोयनका ने सन 2004 में वाइल्ड लाइफ को नुकसान बताते हुए शिकायत की थी.

यह मामला CEC में गया. CEC ने 2009 में आश्रम के अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश दिया, लेकिन आश्रम तोड़ा नहीं जा सका. मामला सुप्रीम कोर्ट में गया. सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त तक आश्रम हटाने का आदेश दिया है. मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक्स पार्टी था क्योंकि उनका काउंसिल उस समय अदालत में मौजूद नहीं था. मंदिर की तरफ से रिव्यू याचिका दायर की जा रही है.


इस बीच इलाके में किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. हालांकि आश्रम के सचिव गुरुनाथ भोईर ने एनडीटीवी को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करते हुए आश्रम खुद ही कई निर्माणों को तोड़ने में लगा है. भोईर के मुताबिक आश्रम की तरफ से वन विभाग को पत्र और तोड़े जाने की तस्वीर भी भेजी गई है.

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इस बीच पता चला है कि भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपी मिलिंद एकबोटे ने भी एक दिन पहले आश्रम का दौरा किया और आश्रम तोड़े जाने के विरोध में इकठ्ठा होने की अपील की है. हालांकि आश्रम की तरफ से खुद ही निर्माण तोड़े जाने की शुरुआत कर शांति बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.

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बालयोगी श्री सदानंद महाराज के बारे में कहा जाता है कि वे 55 से 60 साल पहले बचपन में ही अपने माता-पिता को लेकर जंगल में तपस्या करने आए थे. बाद में माता-पिता की वहीं मौत हो गई. दोनों की समाधि बनाई गई है. बाबा आश्रम में ध्यान, भजन और पूजन के साथ समाजसेवा भी करते हैं. आसपास के इलाके में रहने वाले हजारों निवासी बाबा के अनुयायी हैं. कई नेता भी बाबा के आश्रम में जाते रहते हैं.

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