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यूथ फॉर इक्विलिटी ने जातिवाद मिटाने के लिए किया शांतिपूर्ण सत्याग्रह

दिल्ली सहित 153 शहरों में लगभग 525 से अधिक स्थानों पर देशव्यापी शांतिपूर्ण सत्याग्रह का आयोजन किया गया

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यूथ फॉर इक्विलिटी ने जातिवाद मिटाने के लिए किया शांतिपूर्ण सत्याग्रह

यूथ फॉर इक्विलिटी ने इंडिया गेट पर सत्याग्रह किया.

नई दिल्ली:

संविधान निर्माता बीआर अम्बेडकर की 128वीं जयंती पर यूथ फॉर इक्विलिटी के बैनर तले जातिगत नीतियों के ख़िलाफ़ देश में जाति हटाने के लिए शांतिपूर्ण मार्च हुआ. डॉक्टर. अम्बेडकर को श्रद्धांजलि देने तथा देश से जाति के समूल विनाश के लिए संसद के दोनों सदनों से नया कानून बनाने के लिए आज देशव्यापी शांतिपूर्ण सत्याग्रह की शुरुआत की. दिल्ली सहित 153 शहरों में लगभग  525 से अधिक जगह पर देशव्यापी शांतिपूर्ण सत्याग्रह का आयोजन किया गया.

दिल्ली के इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति के पास  जमा हुए सैकड़ो लोगो ने नारा लगाया वाईऍफ़ई ने ठाना है जय जातिवाद को हटाना है, जातिवाद मुर्दाबाद , वंदेमातरम के नारों के साथ हाथों में मोमबत्ती के साथ बैनर लिए जमा हुए. उसके बाद ये काफिला  अमर जवान ज्योति  के चक्कर लगाकर एक जनसभा में तब्दील हो गया जहां लोगों ने जातिवाद को ख़त्म करने के लिए शपथ ली.

इस मौके पर यूथ फॉर एक्वॉलिटी  के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर कौशलकांत मिश्रा ने कहा कि 26 नवंबर 1949  को डॉ भीमराव अम्बेडकर ने कहा था - जाति एंटी नेशनल है क्योंकि वह सामाजिक जीवन में बंटवारा लाती हैं.  जाति एंटी नेशनल इसलिए भी है क्योंकि ये जाति के बीच ईर्ष्या और घृणा पैदा करती है. इतनी हजार जातियों में विभाजित लोग एक राष्ट्र कैसे हो सकते हैं.  और सभी देशवासियों को इस सामाजिक आंदोलन का हिस्सा बनाने के लिए आव्हान किया है.


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उन्होंने कहा कि पूरे देश में अपने तरह का पहला गैर राजनीतिक सत्याग्रह की शुरुआत की गयी है, जिसका उद्देश्य 2020 तक संसद से जातियों के समूल विनाश के लिए एक कानून पास करना है. मिशन 2020 में देश की बहुत सारी गैर राजनीतिक संस्थाएँ शामिल हैं जो अलग-अलग शहर में YFE के  मिशन 2020 को सफल बनाने के लिए एक साथ आए हैं. उन्होंने आगे कहा की सोशल मीडिया पर बहुत सारे लोगों ने मुझ से पूछा कि आप खुद तो मिश्रा क्यों नहीं हटाते और आप जाति हटाने की बात करते हैं.  उसके जवाब में कौशल मिश्रा ने कहा कि, मेरे या मेरे परिवार या फिर पूरी दिल्ली के सरनेम हटाने से यदि ये हो सकता तो शायद ये मैं और मेरी दिल्ली कर चुकी होती. पर सैकड़ों सालों से जाति ख़त्म करने में सक्रिय संगठनों की सक्रियता के बाद भी जाति ख़त्म नहीं हो सकी है क्योंकि ये सभी कोशिशें सामाजिक तौर पर की हुई लेकिन कोई क़ानून आज तक नहीं बना. बिना कानून के जाति ख़तम नहीं हो सकती.

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साथ ही उन्होंने घोषणा की कि वे अपने हर सरकारी कागज़ात से मिश्रा हटाने के लिए जल्द ही एक प्रार्थना पत्र देने जा रहे हैं जिसका मकसद जाति से ऊपर उठकर समाज के लिए और समाज के साथ जीना मरना होगा. अंत में जाति के कारण हो रही समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन भारत के राष्ट्रपति को पत्र प्रस्तुत किया गया.



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