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चुनाव क्षेत्र

  • महाराष्ट्र उपचुनाव : नियमों को ताक पर रख निजी कार से ईवीएम मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम भेजा, जांच के आदेश
    महाराष्ट्र के पालघर लोकसभा उपचुनाव में सोमवार रात को मतदान समाप्त होने के बाद महाराष्ट्र में एक चुनाव अधिकारी ने प्रोटोकाल तोड़कर गोपनीय वीवीपैट (वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) ईवीएम मशीनों को अपनी निजी कार से मंगलवार सुबह स्ट्रॉन्गरूम पहुंचाया.मामला सामने आने के बाद आदेश दे दिए गए हैं.
  • कर्नाटक की वो 5 विभूतियां, जिनके इर्द-गिर्द घूमता नजर आया चुनाव
    इस बार कर्नाटक का चुनाव तमाम मुद्दों के साथ-साथ राज्य की 'अस्मिता' के इर्द-गिर्द भी घूमता नजर आया. खासकर भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान राज्य की अस्मिता और संस्कृति का मुद्दा जोर-शोर से उठाया और इस बहाने विपक्षियों पर वार भी किया.
  • कर्नाटक चुनाव परिणाम 2018: BJP ऐसे बना सकती है सरकार, ये हैं 10 आधार
    कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों में से 222 सीटों पर हुए चुनाव में BJP को 104, कांग्रेस को 78, JDS गठबंधन को 38 और अन्य को दो सीटें मिली हैं. कोई भी दल सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 112 सीटों के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है. इसके साथ ही जोड़-तोड़ की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं. कांग्रेस जहां JDS को समर्थन देकर सरकार बनाने का दावा कर रही है, वहीं सर्वाधिक सीटें हासिल करने वाली BJP भी ताल ठोक रही है. BJP का दावा है कि हर हाल में सरकार उसी की बनेगी. इसकी कई वजहें भी हैं. आइए, हम आपको बताते हैं कि BJP किन स्थितियों में कर्नाटक में सरकार बना सकती है...
  • कर्नाटक चुनाव रिजल्ट 2018: मतगणना स्थल भारी पुलिस बल तैनात, थोड़ी देर में शुरू होगी गणना 
    Karnataka Election Result 2018: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए मतों की गिनती बस थोड़ी देर में शुरू होगी. मतगणना स्थल पर सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है. भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किये गए हैं. जो हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं. गौरतलब है कि राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा की 222 सीटों पर 12 मई को मतदान हुआ था.
  • कर्नाटक चुनाव 2018: मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, भाजपा अधिकतम 60-70 सीटें जीत पाएगी
    कर्नाटक में मतदान के बीच कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भाजपा अधिकतम 60-70 सीटों से ज्यादा नहीं जीत पाएगी. 150 तो भूल जाइये. वे सिर्फ सरकार बनाने का सपना देख रहे हैं. मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान कर्नाटक में भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के उस बयान के बाद आया जिसमें उन्होंने 150 से ज्यादा सीटें हासिल करने का दावा किया था.
  • कर्नाटक का वो चुनाव जिसमें एक 'नारे' ने बदल दी थी इंदिरा गांधी की किस्मत
    कर्नाटक का समर अपने सबाब पर है. राज्य में 12 मई को होने वाले चुनाव के लिए सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. पीएम मोदी भी रण में उतर चुके हैं. हों भी क्यों न...कर्नाटक को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों का अहम पड़ाव जो माना जा रहा है. कर्नाटक ऐसा राज्य है जिसके रण में तमाम सूरमा अपने भाग्य आजमा चुके हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक किस्से के बारे में बता रहे हैं जिसमें सिर्फ एक 'नारे' ने पूरी चुनावी तस्वीर बदल थी.
  • यदि गोरखपुर में जीते तो बनेगा बड़ा गठबंधन : सपा उम्मीदवार प्रवीण निषाद
    गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी द्वारा समर्थित उम्मीदवार प्रवीण निषाद ने कहा है कि यदि इस चुनाव में जीतते हैं तो समाजवादी पार्टी का इसकी चिर प्रतिद्वंद्वी मायावती के साथ चुनाव के लिए एक "बड़ा गठबंधन" बन सकता है.
  • अररिया उपचुनाव : बीजेपी-आरजेडी के बीच मुकाबला, नीतीश का गठबंधन धर्म दांव पर
    बीजेपी के सामने बिहार की अररिया लोकसभा सीट पर एक बार फिर कब्जा करने की चुनौती है. दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सामने इस सीट को बचाए रखने की चुनौती है. यहां मुकाबला रोचक है. यहां उप-चुनाव आरजेडी के सांसद मोहम्मद तसलीमुद्दीन की मौत होने के कारण हो रहा है. यहां 11 मार्च को मतदान होगा जबकि 14 मार्च को मतगणना होगी.
  • गोरखपुर उपचुनाव : योगी की सीट पर पहले जैसा 'योग' नहीं, चौंका भी सकते हैं परिणाम
    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का उपचुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस पारंपरिक सीट पर इस बार चुनावी गणित पहले की तरह बीजेपी के पक्ष में नहीं है. एक तरफ जहां सपा और बसपा मिलकर बीजेपी के खिलाफ ताल ठोक रही हैं वहीं जातिगत वोटों का हिसाब-किताब भी बीजेपी के पक्ष में नहीं है.
  • फूलपुर उपचुनाव :  2014 में सपा-बसपा के कुल वोटों से ज्यादा मत मिले थे बीजेपी को, अब कड़ा संघर्ष
    पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लोकसभा चुनाव क्षेत्र रहे फूलपुर के उपचुनाव पर पूरे देश की नजरें टिकीं हैं. केशव प्रसाद मौर्य के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई इस सीट के उपचुनाव में 11 मार्च को वोट डाले जाएंगे.
  • दीप नारायण सिंह: क्‍या इस बार लगा पाएंगे हैट्रिक
    दो बार से एमएलए चुने जा रहे समाजवादी पार्टी के दीप नारायण सिंह एक बार फिर गरौठा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं. उनके सामने सीट बचाने की चुनौती है. दीप नारायण सिंह यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी से विधायक हैं. 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश की गरौठा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता था. इन्‍हें 700030 वोट मिले थे.
  • अब्‍दुल्‍ला आजम: पहली बार चुनावी मैदान में उतरे ये क्‍या हासिल कर पाएंगे जीत?
    समाजवादी पार्टी के वरिष्‍ठ नेता आज़म खान के बेटे अब्दुल्ला आज़म ख़ान इस बार के विधानसभा चुनाव से अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत कर रहे हैं. अब्‍दुल्‍ला रामपुर के 5 निवार्चन क्षेत्रों में से एक स्‍वार सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. अब्दुल्ला रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी के सीईओ भी हैं.
  • चेतन चौहान: क्रिकेट से लेकर राजनीति तक...
    पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह के करीबी माने जाने वाले पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान करीब 12 साल बाद चेतन चौहान फिर से राजनीति में किस्‍मत आजमाने जा रहे हैं. बीजेपी ने उन्‍हें अमरोहा जिले की नौगांव सादात सीट से टिकट दिया है.
  • जितिन प्रसाद: यूपी चुनाव के वीआईपी उम्मीदवारों में से एक
    जितिन प्रसाद के पिता जितेन्द्र प्रसाद भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी (1991)  और पी.वी.नरसिम्हा राव (1994) के राजनितिक सलाहकार रह चुके हैं. इतना ही नहीं वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं, ऐसे में जितिन प्रसाद का राजनीति में आना लाजमी था. जितिन को कांग्रेस ने शाहजहांपुर की तिलहर सीट से टिकट दिया है.
  • हरीश रावत: उत्तराखंड के सियासी गलियारे के दमदार नेता
    कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता हरीश रावत उत्तराखंड के 8वें और वर्तमान मुख्यमंत्री हैं. इस बार के विधानसभा चुनाव में वह दो सीटों - किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. हरीश रावत का जन्म 27 अप्रैल,1947 को उत्‍तराखंड के अलमोड़ा जिले के मोहनारी में हुआ था. इनके पिता का नाम राजेंद्र सिंह रावत और माता का नाम देवकी देवी है.  
  • अजय भट्ट: क्‍या इस बार मिलेगा इन्‍हें जनता का साथ
    अजय भट्ट उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विपक्ष के नेता हैं. वह उत्तराखंड के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री भी रह चुके हैं. अजय भट्ट रानीखेत से चौथी बार विधान सभा चुनाव लड़ रहे हैं.
  • यूपी चुनाव 2017 : 10 महत्वपूर्ण सीटें जहां पर लड़ाई है दिलचस्प
    उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान देने के लिए उत्साहित मतदाता लाइनों में लगे हैं. चुनाव आयोग पहले चरण में यूपी विधानसभा की 403 सीटों में से 73 सीटों पर मतदान करा रहा है. इनमें बीएसपी और बीजेपी ने सभी 73 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. आरएलडी ने 57 सीटों पर प्रत्याशियों को टिकट दिया है और समाजवादी पार्टी ने 51 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं. कांग्रेस इस बार समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है और इसके खाते में 24 सीटें आई हैं. पहले चरण में 2,60,17,075 वोटर हैं. कुल 839 प्रत्याशी हैं जिनमें 77 महिलाएं हैं. 15 जिलों में वोटिंग हो रही है. 2012 विधानसभा के हिसाब से यहां पर 24-24 सीटें बीएसपी और सपा ने जीती थीं, 9 आरएलडी, 11 बीजेपी और पांच कांग्रेस के खाते में गईं थी. वहीं 2014 लोकसभा चुनाव के हिसाब से अनुमान लगाया जाए तो 68 सीटों पर बीजेपी के समर्थकों की अच्छी तादाद है और 5 सीटों पर सपा के खासे समर्थक हैं.
  • उत्तर प्रदेश चुनाव 2017:  जानें विधानसभा क्षेत्र देवबंद को
    देवबंद सीट सहारनपुर जिले में आती है. पिछले चुनावों में सपा के राजेंद्र सिंह राणा ने बसपा के मनोज चौधरी को 3050 मतों से हराकर यह सीट कब्जाई थी, लेकिन 2015 में उनकी मौत के बाद हुए चुनाव में यह सीट कांग्रेस के माविया अली की झोली में आ गई. राणा से पहले मनोज चौधरी यहां के विधायक थे. 14वीं विधान सभा यानी 2002 में राजेंद्र सिंह राणा हाथी पर सवार होकर चुनाव जीते थे.
  • उत्तर प्रदेश चुनाव 2017:  जानें विधानसभा क्षेत्र हापुड़ को
    आरक्षित सीट हापुड़ विधान सभा कुछ समय तक भाजपा का सुरक्षित और आसान गढ़ रहा है. लेकिन अब भाजपा की यहां पकड़ कमजोर हो रही है. इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबला है. काफी समय पहले यह सीट कांग्रेस के गजराज सिंह के लिए पक्की थी. वे तीन बार लगातार विधायक बने. राम मंदिर लहर में यह सीट कांग्रेस से छूटकर भाजपा के हाथ में आ गई. उसके बाद दो बार बसपा के धर्मपाल यहां से विधायक बने. 2012 में फिर से गजराज सिंह की वापसी हुई.
  • उत्तर प्रदेश चुनाव 2017:  जानें विधानसभा क्षेत्र सरधना को
    सरधना सीट मेरठ जिले में आती है, लेकिन लोकसभा मुजफ्फरनगर लगती है. यहां भाजपा के चर्चित संगीत सोम विधायक हैं. संगीत सोम मुजफ्फनगर दंगों के दौरान चर्चा में आए. यहां करीब 3 लाख वोटर हैं. सपा यहां मुकाबले में तीसरे या चौथे स्थान पर रही है. कांग्रेस का कोई आधार नहीं है. मुख्य मुकाबला भाजपा, बसपा और लोकदल में रहता है.
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