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चुनाव क्षेत्र

  • दीप नारायण सिंह: क्‍या इस बार लगा पाएंगे हैट्रिक
    दो बार से एमएलए चुने जा रहे समाजवादी पार्टी के दीप नारायण सिंह एक बार फिर गरौठा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं. उनके सामने सीट बचाने की चुनौती है. दीप नारायण सिंह यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी से विधायक हैं. 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश की गरौठा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता था. इन्‍हें 700030 वोट मिले थे.
  • अब्‍दुल्‍ला आजम: पहली बार चुनावी मैदान में उतरे ये क्‍या हासिल कर पाएंगे जीत?
    समाजवादी पार्टी के वरिष्‍ठ नेता आज़म खान के बेटे अब्दुल्ला आज़म ख़ान इस बार के विधानसभा चुनाव से अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत कर रहे हैं. अब्‍दुल्‍ला रामपुर के 5 निवार्चन क्षेत्रों में से एक स्‍वार सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. अब्दुल्ला रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी के सीईओ भी हैं.
  • चेतन चौहान: क्रिकेट से लेकर राजनीति तक...
    पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह के करीबी माने जाने वाले पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान करीब 12 साल बाद चेतन चौहान फिर से राजनीति में किस्‍मत आजमाने जा रहे हैं. बीजेपी ने उन्‍हें अमरोहा जिले की नौगांव सादात सीट से टिकट दिया है.
  • जितिन प्रसाद: यूपी चुनाव के वीआईपी उम्मीदवारों में से एक
    जितिन प्रसाद के पिता जितेन्द्र प्रसाद भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी (1991)  और पी.वी.नरसिम्हा राव (1994) के राजनितिक सलाहकार रह चुके हैं. इतना ही नहीं वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं, ऐसे में जितिन प्रसाद का राजनीति में आना लाजमी था. जितिन को कांग्रेस ने शाहजहांपुर की तिलहर सीट से टिकट दिया है.
  • हरीश रावत: उत्तराखंड के सियासी गलियारे के दमदार नेता
    कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता हरीश रावत उत्तराखंड के 8वें और वर्तमान मुख्यमंत्री हैं. इस बार के विधानसभा चुनाव में वह दो सीटों - किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. हरीश रावत का जन्म 27 अप्रैल,1947 को उत्‍तराखंड के अलमोड़ा जिले के मोहनारी में हुआ था. इनके पिता का नाम राजेंद्र सिंह रावत और माता का नाम देवकी देवी है.  
  • अजय भट्ट: क्‍या इस बार मिलेगा इन्‍हें जनता का साथ
    अजय भट्ट उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विपक्ष के नेता हैं. वह उत्तराखंड के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री भी रह चुके हैं. अजय भट्ट रानीखेत से चौथी बार विधान सभा चुनाव लड़ रहे हैं.
  • यूपी चुनाव 2017 : 10 महत्वपूर्ण सीटें जहां पर लड़ाई है दिलचस्प
    उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान देने के लिए उत्साहित मतदाता लाइनों में लगे हैं. चुनाव आयोग पहले चरण में यूपी विधानसभा की 403 सीटों में से 73 सीटों पर मतदान करा रहा है. इनमें बीएसपी और बीजेपी ने सभी 73 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. आरएलडी ने 57 सीटों पर प्रत्याशियों को टिकट दिया है और समाजवादी पार्टी ने 51 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं. कांग्रेस इस बार समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है और इसके खाते में 24 सीटें आई हैं. पहले चरण में 2,60,17,075 वोटर हैं. कुल 839 प्रत्याशी हैं जिनमें 77 महिलाएं हैं. 15 जिलों में वोटिंग हो रही है. 2012 विधानसभा के हिसाब से यहां पर 24-24 सीटें बीएसपी और सपा ने जीती थीं, 9 आरएलडी, 11 बीजेपी और पांच कांग्रेस के खाते में गईं थी. वहीं 2014 लोकसभा चुनाव के हिसाब से अनुमान लगाया जाए तो 68 सीटों पर बीजेपी के समर्थकों की अच्छी तादाद है और 5 सीटों पर सपा के खासे समर्थक हैं.
  • उत्तर प्रदेश चुनाव 2017:  जानें विधानसभा क्षेत्र देवबंद को
    देवबंद सीट सहारनपुर जिले में आती है. पिछले चुनावों में सपा के राजेंद्र सिंह राणा ने बसपा के मनोज चौधरी को 3050 मतों से हराकर यह सीट कब्जाई थी, लेकिन 2015 में उनकी मौत के बाद हुए चुनाव में यह सीट कांग्रेस के माविया अली की झोली में आ गई. राणा से पहले मनोज चौधरी यहां के विधायक थे. 14वीं विधान सभा यानी 2002 में राजेंद्र सिंह राणा हाथी पर सवार होकर चुनाव जीते थे.
  • उत्तर प्रदेश चुनाव 2017:  जानें विधानसभा क्षेत्र हापुड़ को
    आरक्षित सीट हापुड़ विधान सभा कुछ समय तक भाजपा का सुरक्षित और आसान गढ़ रहा है. लेकिन अब भाजपा की यहां पकड़ कमजोर हो रही है. इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबला है. काफी समय पहले यह सीट कांग्रेस के गजराज सिंह के लिए पक्की थी. वे तीन बार लगातार विधायक बने. राम मंदिर लहर में यह सीट कांग्रेस से छूटकर भाजपा के हाथ में आ गई. उसके बाद दो बार बसपा के धर्मपाल यहां से विधायक बने. 2012 में फिर से गजराज सिंह की वापसी हुई.
  • उत्तर प्रदेश चुनाव 2017:  जानें विधानसभा क्षेत्र सरधना को
    सरधना सीट मेरठ जिले में आती है, लेकिन लोकसभा मुजफ्फरनगर लगती है. यहां भाजपा के चर्चित संगीत सोम विधायक हैं. संगीत सोम मुजफ्फनगर दंगों के दौरान चर्चा में आए. यहां करीब 3 लाख वोटर हैं. सपा यहां मुकाबले में तीसरे या चौथे स्थान पर रही है. कांग्रेस का कोई आधार नहीं है. मुख्य मुकाबला भाजपा, बसपा और लोकदल में रहता है.
  • उत्तर प्रदेश चुनाव 2017: जानें विधानसभा क्षेत्र मथुरा को
    भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा में मुकाबला प्रदीप बनाम राजनीति दल ही रहता है. प्रदीप की यहां बहुत अच्छी पकड़ है. वे लगातार तीन बार से विधायक हैं. प्रदीप कांग्रेस की ओर से ताल ठोक रहे हैं. भाजपा ने श्रीकांत शर्मा, बसपा ने योगेश द्विवेदी और लोकदल ने डॉ. अशोक अग्रवाल को मैदान में उतारा है.
  • उत्तर प्रदेश चुनाव 2017:  जानें विधानसभा क्षेत्र सिकंदराबाद को
    सिंकदराबाद विधान सभा सीट बुलंदशहर जिले में आती है. दिल्ली के नजदीक होने के कारण इस पर दिल्ली की राजनीति की छाप भी पड़ती है. वर्तमान में यहां भाजपा की विमला सोलंकी विधायक हैं. उनसे पहले यह सीट बसपा के कब्जे में थी. हालांकि यह सीट भी मुस्लिम बाहुल्य सीट है.
  • उत्तर प्रदेश चुनाव 2017:  जानें विधानसभा क्षेत्र किठौर को
    बिठौर मुस्लिम बाहुल्य इलाका है और सपा के शाहिद मंजूर लगातार तीन बार से विधायक हैं. शाहिद कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं. यहां भाजपा कभी भी चुनावी रणनीति के केंद्र में नहीं रही. यहां की राजनीति केवल दो घरानों के बीच ही सिमटी हुई है. इसलिए राजनीतिक पार्टी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं रहीं. शाहिद से पहले हलील परिवार हावी रहा है. मुकाबला सपा और बसपा के बीच ही रहा है. इस बार सपा को कांग्रेस का साथ मिलने से मुकाबला एकतरफा बताया जा रहा है.
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