ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत : वर्ल्ड कप फ़ाइनल से जुड़ी 10 ख़ास बातें

ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत : वर्ल्ड कप फ़ाइनल से जुड़ी 10 ख़ास बातें

नई दिल्‍ली : ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में खेले गया वर्ल्ड कप समाप्त हो चुका है। ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर वर्ल्ड क्रिकेट में अपनी बादशाहत सिद्ध कर दी है। इस वर्ल्ड कप से जुड़ी दस ख़ास बातों पर एक नज़र-

1. ऑस्ट्रेलिया पांचवीं बार वर्ल्ड चैंपियन बना है। इतनी बार कोई दूसरी टीम वर्ल्ड चैंपियन नहीं बन सकी है। भारत और वेस्टइंडीज़ की टीम दो-दो बार वर्ल्ड चैंपियन बनने में कामयाब रही है। जबकि पाकिस्तान और श्रीलंका ने एक-एक बार वर्ल्ड कप ख़िताब जीता है।

2. ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बीच मेलबर्न में खेला गया फ़ाइनल मुक़ाबला वर्ल्ड कप का 400वां मैच था। अब तक 3646 वनडे मुक़ाबले खेले गए हैं यानी वर्ल्ड कप के मैचों की हिस्सेदारी कुल वनडे मुक़ाबलों में 11 फ़ीसदी के करीब है।

3. वर्ल्ड कप फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड के कप्तान ब्रैंडन मैक्कुलम अपना खाता भी नहीं खोल पाए। किसी वर्ल्ड कप फ़ाइनल में किसी भी कप्तान ने पहली बार शून्य रन बनाया। इससे पहले कप्तान के सबसे कम रन का स्कोर वेस्टइंडीज़ के क्लाइव लायड के नाम था जिन्होंने 1983 के फ़ाइनल में 8 रन बनाए थे।

4. न्यूज़ीलैंड के मार्टिन गुप्टिल ने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 547 रन बनाए। वे न्यूज़ीलैंड के पहले बल्लेबाज़ हैं जिन्होंने किसी एक वर्ल्ड कप में 500 से ज्यादा रन बनाए।

5. ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क और न्यूज़ीलैंड के ट्रेंट बोल्ट ने टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा 22-22 विकेट लिए। ट्रेंट बोल्ट किसी वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले पहले कीवी गेंदबाज़ बने हैं।

6. न्यूज़ीलैंड के फ़ाइनल में हार की सबसे बड़ी वजह उनकी सलामी जोड़ी का नाकाम होना रहा है। मैक्कुलम और गुप्टिल पहले विकेट के लिए महज एक रन जोड़ पाए। फ़ाइनल से पहले इन दोनों ने वर्ल्ड कप की प्रत्येक पारी में 56.5 की औसत से साझेदारी निभाई थी।

7. न्यूज़ीलैंड के चार बल्लेबाज़ फ़ाइनल मुक़ाबले में अपना खाता नहीं खोल पाए। वहीं ग्रुप मैच में भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन कीवी बल्लेबाज़ खाता नहीं खोल पाए थे। वर्ल्ड कप के दौरान किसी दूसरी टीम के खिलाफ न्यूज़ीलैंड का कोई बल्लेबाज़ शून्य पर आउट नहीं हुआ।

8. न्यूज़ीलैंड के ग्रांट इलिएट और ऑस्ट्रेलिया के स्टीवन स्मिथ ने इस वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल दोनों में हाफ़ सेंचुरी जमाने का करिश्मा दिखाया। इससे पहले केवल चार बल्लेबाज़ ये कर पाए थे। 1979 में माइक ब्रेयरली, 1987 में डेविड बून, 1992 में जावेद मियांदाद और 1996 में अरविंद डिसिल्वा।

9. ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर ब्रैड हैडिन ने 37 साल और 157 दिन की उम्र में वर्ल्ड कप फ़ाइनल खेला। 2007 वर्ल्ड कप फ़ाइनल खेलते वक्त ग्लेन मैक्ग्रा के 37 साल 78 दिनों को उन्होंने पीछे छोड़ दिया। हालांकि सबसे ज्यादा उम्र में वर्ल्ड कप फ़ाइनल का रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के रोहन कन्हाई के नाम है जिन्होंने 1975 वर्ल्ड कप का फ़ाइनल 39 साल 177 दिन की उम्र में खेला था।

10. कुमार धर्मसेना 1996 के फ़ाइनल में श्रीलंकाई खिलाड़ी के तौर पर शामिल हुए थे और 19 साल बाद वे मैच अंपायर के तौर पर फ़ाइनल का हिस्सा बने। इस उपलब्धि को हासिल करने वाले वे दुनिया के इकलौते क्रिकेटर हैं।

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