...और फिर Mayank Agarwal ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, सहवाग को आदर्श मानकर गढ़ी बल्लेबाजी

...और फिर Mayank Agarwal ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, सहवाग को आदर्श मानकर गढ़ी बल्लेबाजी

दूसरे दिन के खेल के बाद हर तरफ मयंक अग्रवाल के चर्चे हैं

खास बातें

  • मयंक जड़ चुके हैं 12 पारियों में 3 शतक
  • तीन शतकों में 2 दोहरे शतक हैं शामिल
  • करियर के आठवें टेस्ट में रन पहुंचे 800 के पार
नई दिल्ली:

इंदौर के होल्कर स्टेडियम (Holker Stadium) में बांग्लादेश के खिलाफ जारी पहले टेस्ट (Bangladesh vs India) के दूसरे दिन के खेल की समाप्ति के बाद हर तरफ मयंक अग्रवाल (Mayank Agarwal) के ही धमाल की चर्चा है. प्रेस बॉक्स से लेकर सड़क और सड़क से लेकर सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्मों पर मंयक अग्रवाल (Mayank Agarwal) का नाम ही तैर रहा है. और उनके कारनामे की क्रिकेटप्रेमी जमकर सराहना कर रहे हैं. मयंक अग्रवाल (Mayank Agarwal) के यह करियर का सिर्फ आठवां टेस्ट और 12वीं ही पारी है, लेकिन वह दो दोहरे सहित तीन शतक जड़कर वर्ल्ड क्रिकेट समीक्षकों की नजरों में में आ गए हैं 

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बता दें कि  बेंगलुरु में बिशप कॉटन ब्वॉयज स्कूल के लिए अंडर-13 वर्ग में बल्लेबाजी के दौरान से ही मयंक अग्रवाल ने वीरेंद्र सहवाग को आदर्श मानकर अपनी बल्लेबाजी के अंदाज को गढ़ा.  वह पहली बार राज्य क्रिकेट में तब चर्चा में आए, जब मयंक ने साल 2008-09 में अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी के पांच मैचों में 54 के औसत से 432 रन बनाए. साल 2009 में ही उन्होंने होबार्ड में अंडर-19 ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में 160 रन की मैच जिताऊ पारी खेली थी. 

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साल 2010 में हुए अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, लेकिन इसमें मयंक का प्रदशर्न शानदार रहा. और उन्होंने भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए. इसके बाद उन्हें भारत ए टीम में जगह मिली, तो उनके प्रदर्शन में नियमितता का अभाव रहा. यही कारण रहा कि मयंक को कर्नाटक  के लिए रणजी ट्रॉफी में खेलने का मौका 2013-14 में मिला, जबकि टी20 में राज्य के लिए उन्होंने अपना पहला मैच 2010-11में खेला था, तो लिस्ट ए (अंतरराष्ट्रीय या राज्य का 50 ओवर का मैच) करियर आगाज 2011-12 के सत्र में किया था. 

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साल 2014-15 के सत्र में मयंक कर्नाटक के लिए पारी की शुरुआत करने की होड़ में थे, लेकिन पूरे सत्र उन्हें बेंच पर ही बैठना पडा. भारत ए टीम में मयंक के साथ काम करने वाले राहुल द्रविड़ के अनुसार यह उनके लिए चेतावनी थी. इसके बाद ऑफ सीजन में मयंक ने अपना वजन कम किया और अपनी फिटनेस पर जमकर मेहनत की. इसके अगले सेशन में उन्होंने अपना पहला प्रथण श्रेणी शतक बनाया. इस सीजन में मयंक ने 5 मैचों में 52.12 के औसत व 1 शतक से 417 रन बनाए. लेकिन अगले सत्र में उनकी बल्लेबाजी की हवा निकल गई. मयंक 7 मैचों में 23.66 के औसत से सिर्फ 284 रन बनाए, लेकिन इसके बाद अगले दो सेशन में मयंक ने ऐसा धमाल मचाया कि पीछे मुड़कर नहीं देखा. 

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साल 2017-18 सत्र में मयंक 8 मैचों में 105.45 के औसत से 1160 रन बनाकर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. इसमें उनका स्कोर नाबाद 304 भी शामिल था. यहां से उनके प्रदर्शन में भारत ए के लिए वनडे और दीर्घकालिक मैचों में गजब की ऐसी निरंतरता आई, जो अभी तक जारी है. 

 
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