Aus vs Ind 1st T20I: यह "कनकशन नियम" बना ऑस्ट्रेलिया की हार की वजह, नियम के बारे में विस्तार से जान लीजिए

Aus vs Ind 1st T20I: आईसीसी के नियम 1.2.71 के अनुसार अगर मैच के दौरान खिलाड़ी की गर्दन या सिर में चोट लगती है और इसके कारण खिलाड़ी को मस्तिष्काघात होता है या ऐसा होने का शक होता है, तो नियम के तहत खास परिस्थिति में कनकशन सब्स्टीट्यूट की इजाजत दी जा सकती है. और इसी नियम का फायदा भारत को पहले टी20 में मिला.

Aus vs Ind 1st T20I: यह

Aus vs Ind 1st ODI: युजवेंद्र चहल कनकशन नियम से मैन ऑफ द मैच बनने वाले पहले खिलाड़ी बने

खास बातें

  • नियम को लेकर हो रही जोर-शोर से चर्चा
  • मोइसेस हेनरिक्स ने उठाए "समानता" पर सवाल
  • क्या भारत ने उठाया नियम का फायदा ?
नई दिल्ली:

शुक्रवार को मेजबान ऑस्ट्रेलिया को तीन मैचों की सीरीज के पहले टी20 मुकाबले में भारत के हाथों 11 रन से हार का सामना करना पड़ा. इस मैच में वह हुआ, जिसकी मेजबान टीम ने शायद कल्पना भी नहीं की होगी. वैसे सोचा इस बारे में भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) ने भी नहीं होगा. भारतीय बल्लेबाजी खत्म होने के बाद दूसरी पाली में ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग के दौरान "कनकशन नियम" ने मैच में इंट्री ली. और यही नियम ऑस्ट्रेलिया की हार की वजह बन गया. चलिए हम आपको इस नियम के बारे में विस्तार से बताते हैं. आईसीसी के नियम 1.2.71 के अनुसार अगर मैच के दौरान खिलाड़ी की गर्दन या सिर में चोट लगती है और इसके कारण खिलाड़ी को मस्तिष्काघात होता है या ऐसा होने का शक होता है, तो निम्न परिस्थितियों में इस खिलाड़ी के सब्स्टीट्यूट की इजाजत दी जा सकती है:  चलिए इस नियम की कुछ प्रमुख उपशर्तों के बारे में जान लीजिए: 

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1. नियम 1.2.7.1.1 के अनुसार बल्लेबाज को को चोट खेलने  के दौरान लगनी चाहिए, तो 1.2.7.1.2 उपनियम के से अनुसार कनकशन या संदिग्ध कनकशन की  टीम के चिकित्सक को औपचारिक रूप से जांच करनी चाहिए. इसके बाद 1.2.7.1.3 के अनुसार टीम का मैनेजर या चिकित्सकर वैकल्पिक खिलाड़ी की मांग आईसीसी मैच रेफरी से इन उपशर्तों के हिसाब से करेगा:-

1.2.7.1.3.1 उस खिलाड़ी की पहचान करना, जिसे कनकशन या संदिग्ध कनकशन हुआ है. 

1.2.7.1.3.2 उस घटना की पहचान करना जिसके तहत खिलाड़ी को कनकशन या संदिग्ध कनकशन हुआ. यह भी नोट किया जाएगा कि किस समय यह घटना हुई


1.2.7.1.3.3 इसकी पुष्टि और जांच के बाद टीम डॉक्टर यह मानता है या शक करता है कि इस घटना विशेष के परिणाम के कारण खिलाड़ी को कनकशन हुआ

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1.2.7.1.3.4  वैकल्पिक खिलाड़ी की पहचान करना, जो चोटिल खिलाड़ी के 'समान' होगा

नियम 1.2.7.2 के अनुसार अगर विकल्प की अनुमति हासिल करनी है, तो  घटना के तुरंत बाद जल्द से जल्द कनकशन विकल्प के लिए आवेदन करना होगा. 

1.2.7.3 अगर "समानता" वाले खिलाड़ी को शेष मैच के लिए टीम में शामिल करने से इस टीम को अधिक फायदा नहीं पहुंचता है, तो मैच रेफरी को कनकशन विकल्प को मंजूरी दे देनी चाहिए

1.2.7.4. नियम के अनुसार मैच रेफरी को "समान खिलाड़ी" का आंकलन करते समय 'समानता' का ध्यान रखना चाहिए. रेफरी को वैकल्पिक खिलाड़ी को चुनते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि चोटिल खिलाड़ी की बाकी बचे मैच में क्या संभावित भूमिक होती. साथ ही, इस बारे में भी ध्यान रखना होगा कि वैकल्पिक खिलाड़ी सामान्य रूप से क्या भूमिका अदा करेगा.

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1.2.7.5 उपशर्त के अनुसार अगर मैच रेफरी यह पाता है कि  कनकशन का वैकल्पिक खिलाड़ी टीम को जरूरत से ज्यादा फायदा पहुंचा सकता है, तो वह उसकी भूमिका को सीमित कर सकता है. उदाहरण के तौर पर पर अगर चोटिल बल्लेबाज की जगह कोई ऑलराउंडर लिया गया है, तो उसके गेंदबाजी करने पर रोक लगा सकता है. यह पूरी तरह से मैच रेफरी के विवेक पर निर्भर करता है. 

1.2.7.7 कनकशन के विकल्प के फैसले पर मैच रेफरी का फैसला अंतिम होगा. और इस फैसले के खिलाफ कोई भी टीम अपील नहीं कर सकती.

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कुल मिलाकर कनकशन नियम खासा बड़ा है. और हमने इस नियम से जुड़ी कुछ अहम बातें आपके सामने रख दी हैं. वहीं, युजवेंद्र चहल के विकल्प के बारे में अब ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर हेनरिक्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में में कहा कि चहल चोटिल जडेजा के 'समान' नहीं थे. उन्होंने कहा कि जडेजा ऑलराउंडर थे, जबकि चहल विशेषज्ञ बॉलर. बहरहाल, अब अंतिम सच यही है कि चहल कनकशन नियम से मैन ऑफ द मैच बनने वाले पहले खिलाड़ी बन गए. 
 

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