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IND V/S SL: 'इस वजह' से रविचंद्रन अश्विन ने जड़ा क्रिकेट इतिहास का 'सबसे तेज तिहरा शतक' !

कुछ साल पहले तक अश्विन को सिर्फ वनडे का गेंदबाज कहा जाता था. लेकिन चंद सालों के भीतर ही हरभजन सिंह ने टेस्ट क्रिकेट से हरभजन जैसे दिग्गज को बाहर का रास्ता दिखा दिया. अब इस ऑफ स्पिनर ने रच दिया है 'सबसे बड़ा इतिहास'. इस ऐतिहासिक कारनामे के जरिए अश्विन ने डेनिस लिली और मुथैया मुरलीधरन के बड़े रिकॉर्ड पर पानी फेर दिया.

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IND V/S SL: 'इस वजह' से रविचंद्रन अश्विन ने जड़ा क्रिकेट इतिहास का 'सबसे तेज तिहरा शतक' !

रविचंद्रन अश्विन (भारतीय ऑफ स्पिनर)

खास बातें

  1. रविचंद्रन के टेस्ट में सबसे तेज 300 विकेट
  2. अश्विन ने किया सिर्फ 54 टेस्ट मैचों कारनामा
  3. डेनिस लिली भी पीछे, मुरलीधरन भी पीछे!
नई दिल्ली: पिछले दिनों अपनी लय पाने के लिए काउंटी क्रिकेट का रुख करने वाले भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन क्रिकेट इतिहास में सबसे तेज तिहरा शतक जड़ दिया. चौंकिए मत! क्रिकेट में शतक बल्ले से ही नहीं, गेंद से भी जड़ा जाता है. श्रीलंका के खिलाफ नागपुर में दूसरे टेस्ट मैच में फिर से 'विकेटों के ट्रैक' पर लौटने वाले रविचंद्रन अश्विन ने नागपुर टेस्ट के चौथे  दिन वह बड़ा कारनामा कर दिखाया, जिसे महान अनिल कुंबले से लेकर भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महानतम ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह भी नहीं कर सके. लेकिन इस कारनामे के बाद आर. अश्विन डेनिस लिली और मुथैया मुरलीधरन जैसे गेंदबाजों से भी आगे निकल गए. बता दें कि नागपुर टेस्ट से पहले अश्विन के खाते में 292 विकेट जमा थे. ईडन गार्डन में पिच के तेज गेंदबाजों को मदद देने के चलते उनके हिस्से में पूरे मैच में सिर्फ आठ ही ओवर आए, लेकिन इसमें भी अश्विन को एक भी विकेट नसीब नहीं हुआ. जब नागपुर में उन्हें मौका मिला, तो अश्विन ने इस दोनों हाथों से भुनाते हुए पहली पारी में चार और दूसरी पारी में भी इतने ही विकेट चटकाते हुए कुल आठ विकेट चटकाकर टेस्ट में सबसे तेज तीन सौ विकेट लेने का कारनामा कर दिया. इसी के साथ अश्विन ने वह इतिहास रच दिया, जिसे मिटा पाना अगली भारतीय पीढ़ी ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी गेंदबाज के लिए बहुत और बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगा.

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बता दें कि अश्विन से पहले टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेजी से तीन सौ विकेट लेने का कारनामा ऑस्ट्रेलिया के डेनिस लिली (56 टेस्ट) ने किया था. वहीं, स्पिनरों की बात करें, तो अश्विन ने श्रीलंका के महान ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन को भी पटखनी दे डाली, जिन्होंने इस आंकड़े को छूने के लिए 58 टेस्ट लिए थे.  वैसे अगर अश्विन इस कारनामे को अंजाम दिया है, तो उसके पीछे है एक 'बहुत ही खास  वजह'. इस वजह को लेकर उनसे सवाल भी किए जाते रहे हैं. साथ ही, उन पर उंगली भी उठती रही है. लेकिन दिन की समाप्ति पर आपका कारनामा ही मायने रखता है और अश्विन भी कोई अपवाद नहीं हैं. फिर से अश्विन के इस बड़े कारनामे के पीछे की खास वजह पर लौटते हैं और यह खास वजह रही उनका भारतीय धरती पर किया गया प्रदर्शन.

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बता दें कि अश्विन ने अभी तक खेले अपने 54 टेस्ट मैचों में से 34 भारत और सिर्फ 20 टेस्ट मैच विदेशी जमीं पर खेले हैं. इन  20 विदेशी जमीं पर खेले गए 20 टेस्ट में से श्रीलंका में खेले गए 6 और बांग्लादेश की धरती पर खेला गया 1 टेस्ट मैच भी शामिल है. अश्विन ने भारत में खेले 34 टेस्ट मैचों में जहां 215 विकेट चटकाए, तो वहीं वह विदेश में खेले 20 टेस्ट मैचों में वह महज 84 विकेट ही चटका सके. घर में अश्विन ने जहां पारी में पांच विकेट 20 बार चटकाए, तो विदेश में वह छह बार ही ऐसा कर सके. इसके अलावा भारत में उन्होंने मैच में दस विकेट 6 बार लिए, तो विदेशी धरती पर वह ऐसा एक ही बार कर सके.

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अश्विन के ये आंकड़े साफ तौर पर बताने और समझाने के लिए काफी हैं कि अगर उन्होंने बॉलिंग में टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज तिहरा शतक जड़ा है, तो इसके पीछे पूरा श्रेय भारत की धरती या देशी पिचों पर किया गए प्रदर्शन को जाता है.


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