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बोली लगाने वाले चाहते हैं ई-नीलामी, पर बीसीसीआई नहीं अपनाना चाह रही नई प्रोसेस

बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों को लगता है कि इससे राजस्व में कमी आ सकती है. बीसीसीआई पारपंरिक मुहर बंद निविदा प्रक्रिया को ही बरकरार रखना चाहता है जिससे बोर्ड को फायदा होता है.

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बोली लगाने वाले चाहते हैं ई-नीलामी, पर बीसीसीआई नहीं अपनाना चाह रही नई प्रोसेस

बीसीसीआई को डर है कि ई-नीलामी में मुंहरबंद प्रक्रिया से जुड़ी गोपनीयता समाप्त हो जाएगी...

खास बातें

  1. BCCI अधिकारियों की राय में इससे राजस्व कम हो सकता है
  2. वह मुहरबंद निविदा प्रक्रिया को ही जारी रखने के पक्ष में है
  3. माह के अंत में हो सकती है अधिकार हासिल करने वाले की घोषणा
नई दिल्ली:

आईपीएल के आगामी मीडिया अधिकारों (टीवी, मोबाइल और इंटरनेट) को लेकर संभावित बोली लगाने वाली कंपिनयां ई-नीलामी के पक्ष में हो सकती हैं लेकिन बीसीसीआई ऐसा नहीं चाहता क्योंकि उसके शीर्ष अधिकारियों को लगता है कि इससे राजस्व में कमी आ सकती है. बीसीसीआई पारपंरिक मुहर बंद निविदा प्रक्रिया को ही बरकरार रखना चाहता है जिससे बोर्ड को फायदा होता है.

विभिन्न मीडिया अधिकारों के लिये ई-नीलामी की पुरजोर मांग की जा रही है. आईपीएल मीडिया अधिकार दस्तावेज को खरीदने की अंतिम तिथि 24 अगस्त है और अधिकार हासिल करने वाले की घोषणा 28 अगस्त को की जा सकती है.

बीसीसीआई को डर है कि ई-नीलामी में मुंहरबंद प्रक्रिया से जुड़ी गोपनीयता समाप्त हो जाएगी. ई-नीलामी में बोली राशि का खुलासा होने से बोली लगाने वाला एक अनुमान लगा लेगा कि अधिकार हासिल करने के लिये कितनी राशि सही रहेगी. इससे मोटी बोली लगने की संभावना भी समाप्त हो जाएगी. उच्चतम न्यायालय ने अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिये बीसीसीआई को पहले ही दो सप्ताह का समय दिया है.


पढ़ें : IPL के मीडिया अधिकारों की ऑनलाइन नीलामी पर सुप्रीम कोर्ट का बीसीसीआई को नोटिस

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बीसीसीआई के एक अधिकारी ने इस पर अपनी आशंका व्यक्त की. अधिकारी ने कहा, "माना कि आईपीएल टीवी अधिकारों के लिये दस संभावित बोलीकर्ता हैं. बीसीसीआई को नीलामी के लिये आधार मूल्य तय करना होगा जैसा कि खिलाड़ियों की नीलामी के मामले में होता है. अब अनुमान लगा लीजिए कि टीवी अधिकारों का आधार मूल्य 100 रूपये है." उन्होंने कहा, "सभी दस संभावित बोलीकर्ताओं को 'लॉग इन' और 'पासवर्ड' उपलब्ध कराये जाएंगे. बोली के प्रत्येक दौर में एक विशेष समयकाल होगा जिसमें कंपनियां बोली लगाएंगी. प्रत्येक दौर के बाद बोली राशि का खुलासा करना होगा." अधिकारी ने कहा, "इसका मतलब है कि बोलीकर्ता को अन्य बोलियों के बारे में भी पता चल जाएगा जिससे संभावना है कि वह अपनी अधिकतम बोली लगाने से बचे."

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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