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बर्थडे विशेष : टी 20 वर्ल्ड कप फाइनल का हीरो, फिर भी टीम में नहीं हुई वापसी...

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बर्थडे विशेष : टी 20 वर्ल्ड कप फाइनल का हीरो, फिर भी टीम में नहीं हुई वापसी...

जोगिंदर ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए भारत को टी 20 वर्ल्ड कप जिताया था (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. जोगिंदर ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए टी 20 वर्ल्ड कप जिताया था
  2. आज जोगिंदर सिंह का जन्मदिन है
  3. कोई नहीं समझ पाया अच्छे प्रदर्शन के बाद भी टीम में मौक़ा क्यों नहीं मिला
नई दिल्ली:

'आज भी उम्मीद करता हूं कि मेरे बेटे को भारतीय टीम में मौक़ा मिलेगा और वह देश का नाम रोशन करेगा', यह कहना है जोगिंदर शर्मा के पिता ओम प्रकाश शर्मा का. क्या जोगिंदर शर्मा का नाम आपको याद है. शायद उन लोगों को याद होगा जिन्होंने 2007 में टी 20 वर्ल्ड कप देखा होगा, खासकर फाइनल मैच. इस मैच में जोगिंदर ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए भारत को टी 20 वर्ल्ड कप जिताया था. इस वर्ल्ड कप के बाद जोगिंदर शर्मा का भारतीय टीम में कभी चयन नहीं हुआ. क्रिकेट प्रेमियों को यह भी समझ नहीं आया कि वर्ल्ड कप के हीरो जोगिंदर शर्मा कहां ग़ायब हो गए...

पांच दिन का अंतरराष्ट्रीय टी 20 करियर : उनके पिता ओम प्रकाश शर्मा को भी समझ नहीं आ रहा था कि टी 20  फाइनल में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उन्हें टीम में मौक़ा क्यों नहीं मिला. उनका टी 20 करियर महज 19 सितम्बर 2007 को शुरू हुई था और आखिरी मैच उन्होंने 24 सितम्बर 2007 को खेला थे. जोगिंदर ने अभी तक क्रिकेट से संन्यास नहीं लिया है लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके वापसी लगभग ख़त्म हो चुकी है लेकिन फिर भी उनके पिता को उम्मीद है कि जोगिंदर को टीम में मौक़ा मिलेगा और वह अच्छा खेलते हुए देश का नाम रोशन करेंगे.

प्रथम श्रेणी सत्र में अच्छा प्रदर्शन : जोगिंदर शर्मा की बात इसलिए हो रही है क्योंकि आज उनका जन्मदिन है. जोगिंदर शर्मा का जन्म हरियाणा के रोहतक ज़िले में हुआ था. उनके पिता ओम प्रकाश शर्मा ने काफी मेहनत करके जोगिंदर को एक क्रिकेटर बनाया. पहले उनके पास किराने का दुकान हुआ करती थी. इस दुकान से जितनी भी कमाई होती थी उसी से कुछ पैसा निकालकर वह जोगिंदर के क्रिकेट कोचिंग पर खर्च करते थे. 2002 में जोगिंदर शर्मा हरियाणा के तरफ से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलना शुरू किया. 2003/4 में जोगिंदर शर्मा एक ऑल राउंडर के रूप में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए चयनकर्ताओं की ध्यान आकर्षण किया था. इस सत्र में जोगिंदर ने 24 विकेट लेने में कामयाब हुए थे और करीब 46 के औसत से 280 रन भी बनाए थे.


धोनी और जोगिंदर दोनों का अंतराष्ट्रीय करियर एक दिन में शुरू हुआ  : 2004 में बांग्लादेश दौर के लिए जोगिंदर शर्मा का टीम में चयन हुआ. महेंद्र सिंह धोनी का भी चयन हुआ था. 23 दिसम्बर 2004 को सौरभ गांगुली के कप्तानी में इन दोनों खिलाड़ियों को टीम में मौक़ा मिला. इस मैच में जहां धोनी कोई रन नहीं बना पाए थे वहीं जोगिंदर ने दो गेंदों का सामना करते हुए पांच रन बनाए थे. जोगिंदर ने अच्छी गेंदबाज़ी करते हुए आठ ओवर में 28 रन देकर एक विकेट भी हासिल किये थे. बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे एकदिवसीय मैच में भी जोगिंदर अच्छा बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 22 गेंदों का सामना करते हुए 29 रन बनाए थे. अगर धोनी की बात किया जाए तो धोनी ने इस मैच में सिर्फ 12 रन बनाये थे. बांग्लादेश के खिलाफ तीसरे मैच में उन्हें बल्लेबाजी करने का मौक़ा नहीं मिला था और उन्होंने सिर्फ तीन ओवर गेंदबाज़ी करते हुए 20 रन दिए थे और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था.

तीन साल के बाद टीम में हुई वापसी लेकिन सिर्फ एक मैच खेल पाए  : इस सीरीज के बाद जोगिंदर शर्मा का टीम से ड्रॉप कर दिया गया. तीन साल तक टीम से बाहर रहने के बाद 2007 में उनकी वापसी हुई. वेस्टइंडीज के खिलाफ चार एकदिवसीय मैच के लिए उनका चयन हुआ. पहले मैच में उनको प्लेइंग एलेवेन में जगह नहीं मिली. दूसरे एकदिवसीय मैच में उनको टीम में जगह मिली लेकिन वह कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए. इस मैच में उन्होंने छह गेंदों का सामना करते हुए सिर्फ एक रन बनाया था और चार ओवर गेंदबाज़ी करते हुए 16 रन दिए थे और उन्हें कोई विकेट भी नहीं मिला था. आखिरी दो मैच के लिए उन्हें जगह नहीं मिली थी और उसके बाद आज तक कभी उनकी एकदिवसीय टीम में वापसी नहीं हुई है.

धोनी की कप्तानी में टी 20 वर्ल्ड कप की टीम में हुआ चयन : जिस धोनी के साथ जोगिंदर शर्मा ने अपना पहला मैच खेला, उसकी कप्तानी में उन्हें 2007 टी 20 वर्ल्ड कप के लिए टीम में चुना गया. भारत के पहले तीन मैच के लिए जोगिन्दर शर्मा को आखिरी ग्यारह में मौक़ा नहीं मिला था. 19 सितम्बर को इंग्लैंड के खिलाफ मैच में उन्हें मौक़ा मिला और वह कुछ खास नहीं कर पाए. बल्लेबाजी करने के लिए उन्हें मौक़ा नहीं मिला था और गेंदबाज़ी में काफी महंगा साबित होते हुए चार ओवर में 57 रन दिए थे. फिर साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच में जोगिंदर शर्मा चार ओवर में 24 रन दिए थे और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में जोगिंदर शर्मा ने तीन ओवर गेंदबाज़ी करते हुए 37 रन देकर दो विकेट हासिल किये थे.

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फाइनल मैच में हीरो साबित हुए : फाइनल मैच के लिए महेंद्र सिंह धोनी ने जोगिंदर शर्मा को टीम में मौक़ा दिया. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 157 रन बनाए. गौतम गंभीर ने ओपनर के रूप में शानदार 75 रन बनाए. जवाब में पाकिस्तान ने 57 रन पर तीन विकेट खो दिए, लेकिन मियांदाद की 1986 वाली भूमिका मिस्बाह ने निभाई और पाकिस्तान को जीत के करीब पहुंचा दिया. अब आखिरी ओवर में पाक को जीतने के लिए 13 रन की जरूरत थी. कप्तान धोनी ने सबको चौंकाते हुए, गेंद जोगिंदर शर्मा को थमा दी. ऐसे लग रहा था कि इतिहास दोहराया जा रहा है. उस मैच में भी पाकिस्तान के 9 विकेट गिर चुके थे, इस मैच में भी 9 विकेट गिर चुके थे. उस मैच में आखिरी ओवर में 11 रन चाहिए थे, जबकि इस मैच में 13 रन.

अंतिम ओवर का रोमांच: जोगिंदर शर्मा ने पहली गेंद वाइड डाली, फिर दूसरा गेंद में कोई रन नहीं बना, तीसरे गेंद में मिस्बाह ने छक्का मारा। अब चार गेंदों में 6 रन चाहिए थे। ऐसा लग रहा था कि मैच भारत के हाथ से निकल रहा है। जोगिंदर की तीसरी गेंद पर छक्का मारने के चक्कर में मिस्बाह आउट और भारत की जीत।चारों तरफ जोगिंदर शर्मा चर्चा हो रही थी।इस शानदार गेंदबाज़ी के लिए हरियाणा सरकार ने जोगिंदर को 21 लाख के इनाम के साथ-साथ पुलिस में डिप्टी कमिश्नर की नौकरी भी दी। आज जोगिंदर इस पद पर कार्यरत हैं। इस वर्ल्ड कप के बाद जोगिंदर को टीम में कभी मौक़ा नहीं मिला.



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