'इसलिए' द्रविड़ की तारीफ भी नहीं बदल सकी भुवनेश्वर कुमार के 'विकल्प' का 'यह बड़ा फैसला'!

टीम इंडिया में शामिल किए गए तमिलनाडु के ऑलराउंडर विजय शंकर ने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर का आगाज नागपुर से किया था. अब पांच साल बाद फिर से नागपुर उनके लिए खुशियां लेकर आया है.लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्हें मौका मिलेगा?

'इसलिए' द्रविड़ की तारीफ भी नहीं बदल सकी भुवनेश्वर कुमार के 'विकल्प' का 'यह बड़ा फैसला'!

विजय शंकर (भारतीय टीम के नए सदस्य, फाइल फोटो)

खास बातें

  • खुद विजय शंकर को भी नहीं था 'बदलाव' पर भरोसा
  • साल 20014-15 के प्रदर्शन से खींचा ध्यान
  • क्या नागपुर में मिलेगी शंकर को 'विजय'?
नई दिल्ली:

कुछ फैसले खुशी से लिए जाते हैं, तो कुछ मजबूरी से, लेकिन इसमें से कोई सा भी फैसला अगर मंजिल तक पहुंचा देता है, तो सारा अफसोस और दर्द खत्म हो जाता है.नागपुर टेस्ट के लिए तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार के विकल्प व टीम इंडिया के नए सदस्य 27 साल के विजय शंकर पर यह बात अच्छी तरह से लागू होती है.भुवनेश्वर की जगह जब विजय शंकर के नाम का ऐलान हुआ, तो एक बार को क्रिकेटप्रेमी चौंक गए. विश्वास खुद विजय को भी अपने चयन पर नहीं हुआ, लेकिन पिछले कुछ सालों के प्रदर्शन पर नजर डाली जाए, तो कहा जा सकता है कि विजय का चयन टीम में बनता है.
 

लेकिन अगर वह अपने करियर के शुरुआती दिनों में बड़ा फैसला नहीं लेते, तो हो सकता है कि टीम इंडिया के लिए खेलने का उनका सपना सिर्फ सपना ही बनकर रह जाता. छह साल पहले पूर्व जब विजय ने तमिलनाडु फर्स्ट-डिवीजन क्लब टूर्नामेंट में जब विजय शंकर ने राहुल द्रविड़ के खिलाफ गेंदबाजी की, तो पूर्व भारतीय कप्तान ने उनकी गेंदबाजी की प्रशंसा की थी. द्रविड़ को विजय का एक्शन बहुत पसंद आया था. लेकिन द्रविड़ की तारीफ के बावजूद विजय शंकर ने अपनी 'राह' बदल दी. तब विजय ऑफ स्पिनर थे, लेकिन द्रविड़ की इस तारीफ के करीब एक साल बाद ही विजय शंकर ऑफ स्पिनर का चोला उतारकर तेज गेंदबाज बन गए.

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लेकिन विजय ने यह फैसला खुशी से नहीं बल्कि मजबूरी में लिया था. वजह यह थी तब करीब छह साल पहले तमिलनाडु रणजी ट्रॉफी टीम में ऑफ स्पिनरों की भरमार थी. मालोलन रंगराजन, बाबा अपराजित, औशिक श्रीनिवास और राहिल शाह के रूप में तमिलनाडु टीम में चार ऑफ स्पिनर थे. इसी कारण टीम में जगह बनाने के लिए विजय ने द्रविड़ की तारीफ की अनदेखी कर विजय शंकर ने तेज गेंदबाज बनने का फैसला किया. एक वजह यह भी थी कि राज्य टीम में अच्छे तेज गेंदबाज-ऑलराउंडर की कमी थी. इस तरह से विजय शंकर का ट्रैक पूरी तरह से बदल गया.

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इसके बावजूद उन्हें भरोसा नहीं था कि तेज गेंदबाजी भी उन्हें आगे बढ़ा पाने में मदद करेगी, लेकिन अपने पिता, छोटे भाई और कोच की मदद से उन्होंने खुद को पूरी तरह से तेज गेंदबाजी में रचा-बसा लिया. साल 2014-15 का घरेलू सीजन के जरिए विजय शंकर ने अपनी आवाज राष्ट्रीय चयनकर्ताओं तक पहुंचायी.

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चोट से उबरने के बाद इस सत्र में विजय ने 57.70 के औसत से 577 रन बनाए. आलोचक कहते हैं कि वह 32 प्रथण श्रेणी मैचों में सिर्फ 27 ही विकेट चटका सके हैं. निश्चित तौर पर यह प्रदर्शन बल्लेबाज-तेज गेंदबाज ऑलराउंडर का है, तेज गेंदबाज-बल्लेबाज-ऑलराउंडर का नहीं.

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