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हार्दिक पंड्या और केएल राहुल ने बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन...

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि हां, हार्दिक और राहुल ने फिर से जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया है. उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी है

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हार्दिक पंड्या और केएल राहुल ने बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन...

शो के दौरान हार्दिक पंड्या और केएल राहुल होस्ट करण जौहर के साथ

खास बातें

  1. केएल राहुल व हार्दिक का पक्ष भी सुना जाए- राय
  2. कब शुरू होगी जांच, अभी साफ नहीं
  3. बोर्ड अधिकारी ने ही उठाए बीसीसीआई पर सवाल
नई दिल्ली:

टेलीविजन कार्यक्रम में महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के मामले में निलंबित क्रिकेटर हार्दिक पंड्या  (Hardik Pandya) और लोकेश राहुल (KL Rahul) ने सोमवार को बिना शर्त माफी मांगी. इस बीच प्रशासकों की समिति (सीएओ, COA) के अध्यक्ष विनोद राय ने कहा कि बीसीसीआई (BCCI) को दोनों खिलाड़ियों के करियर को खतरे में डालने की जगह उनमें सुधार करने पर ध्यान देना चाहिए. दोनों खिलाड़ियों के बिना शर्त माफी मांगने के बावजूद भी बीसीसीआई की 10 इकाइयों ने इस मामले की जांच के लिए लोकपाल नियुक्त करने के लिए विशेष आम बैठक बुलाने की मांग की हैं. वहीं, इस मामले में जांच कराने को लेकर सीओए अध्यक्ष विनोद राय और डायना एडुल्जी के बीच टकराव हो चला है.

सीओए में राय की सहयोगी डायना इडुल्जी चाहती है कि यह जांच सीओए और बीसीसीआई के अधिकारी करें. बीसीसीआई के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि हां, हार्दिक और राहुल ने फिर से जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया है. उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी है. सीओए प्रमुख ने बीसीसीआई के नये संविधान की धारा 41 (सी) के तहत मुख्य कार्यकारी अधिकारी (राहुल जौहरी) को मामले की जांच का निर्देश दिया है, लेकिन एडुल्जी को लगता है कि ऐसा होने पर मामले में लीपापोत की जाएगी.  राय ने एडुल्जी को भेजे मेल में कहा कि बीसीसीआई को युवा खिलाडि़यों का करियर खत्म नहीं करना चाहिए. कृपया इस बात को लेकर आश्वस्त रहे कि मामले की जांच में लीपापोती नहीं होगी. भारतीय क्रिकेट के हित को ध्यान में रखना होगा. मैदान से बाहर दोनों खिलाड़ियों का यह आचरण निंदनीय है. मैंने मामले का पता चलने के तुरंत बाद कहा था यह मूर्खतापूर्ण है. विनोद राय और एडुल्जी की राय इस मामले में भी एक-दूसरे के उलट हो चली है. 


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विनोद राय ने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें फटकारें, सुधारात्मक कार्रवाई करें, उन्हें गलत कामों के बारे में सचेत करें और इसकी सजा (परिणाम भुगतने) के बाद उन्हें फिर से मैदान पर उतारें. इस पूर्व सीएजी ने अपने ईमेल में कहा कि खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय दौरे (ऑस्ट्रेलिया से) के बीच में से वापस बुलाये जाने के बाद शर्मिंदा हैं और नैसर्गिक न्याय के मुताबिक उनके पक्ष को सुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमने मौजूदा दौरे से उन्हें वापस बुलाकर शर्मिंदा किया है. हमने उन्हें निलंबित किया है. हमें उन में सुधार करने की जरूरत है. फैसले में देरी कर के हम उनका करियर खतरे में नहीं डाल सकते. इसमें सुधारात्मक रवैये के साथ त्वरित कार्रवाई की जरूरत है.

राय ने बीसीसीआई सीईओ राहुल जौहरी को मामले की शुरुआती जांच का निर्देश दिया है.  सीईओ प्रमुख् ने कहा कि धारा 41(सी) के तहत सीईओ को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया लेकर मामले की जांच करनी चाहिए. उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए की नैसर्गिक न्याय के मानदंड पूरे हो. लेकिन तमाम बातों और ई-मेल के बावजूद अभी तय नहीं हो सका है कि मामले की जांच कौन करेगा. 

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उन्होंने ईमेल में कहा कि विधि टीम की सलाह पर इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय से लोकपाल की नियुक्ति की मांग की गई है. राय ने कहा कि सत्रह जनवरी को होने वाली सुनवाई के लिए हमने सर्वोच्च न्यायालय से लोकपाल की नियुक्ति की मांग की है. अगर न्यायालय लोकपाल की नियुक्ति नहीं करता है तो भी कानूनी सलाह के तहत हमें तदर्थ लोकपाल के साथ जांच को आगे बढ़ाना चाहिए.


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