इयान चैपल का मत : ग्रेग चैपल से अच्छे कोच साबित होंगे अनिल कुंबले

इयान चैपल का मत : ग्रेग चैपल से अच्छे कोच साबित होंगे अनिल कुंबले

अनिल कुंबले (फाइल फोटो)

खास बातें

  • इयान ने वेबसाइट पर लिखा लेख
  • ग्रेग ने अपने विचार थोपे थे, असर हुआ उलट
  • साथी खिलाड़ी ही सबसे अच्छा सलाहकार
नई दिल्ली:

भारत के पूर्व क्रिकेटर अनिल कुंबले का टीम इंडिया कोच के रूप में चयन होने के बाद अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अधिकांश प्रतिक्रियाएं उनके पक्ष में आ रही हैं। ऑस्ट्रेलिया के महान पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर इयान चैपल ने अनिल कुंबले पर एक लेख लिखकर अपना मत जाहिर किया है। चैपल का मानना है कि अनिल कुंबले टीम इंडिया के लिए सही कोच साबित होंगे।

इयान ने लिखा लेख
“क्रिकइंफो” में लिखे गए लेख में इयान चैपल ने बताया है कि उनके भाई ग्रेग चैपल से ज्यादा अच्छे कोच साबित होंगे कुंबले। इयान चैपल ने यह तर्क दिया है कि अनिल कुंबले भारतीय मानसिकता को समझते हैं और कुंबले को उन स्टार खिलाड़ियों के साथ समझौता नहीं करना पड़ेगा जो अपने  कैरियर के अंतिम दौर में पहुंच रहे हैं।

ग्रेग के मार्फत ऑस्ट्रेलियाई मानसिकता थोपने की कोशिश हुई थी
ऐसा नहीं हा कि इस लेख में इयान चैपल ने अपने भाई ग्रेग चैपल की आलोचना की है, वह अपने भाई ग्रेग के इंडियन टीम के कोच के रूप में समर्थन करते हुए भी नज़र आ रहे हैं। इयान का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के चयनकर्ताओं को अगर यह अहसास होता है कि कोई स्टार खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है तो वह उसे टीम से निकाल देते हैं, चाहे वह कप्तान ही क्यों न हो। लेकिन टीम इंडिया के चयनकर्ता ऐसा नहीं करते हैं। वह तब तक किसी स्टार खिलाड़ी को टीम से बहार नहीं निकालते हैं जब तक वह अपनी तरफ से संन्यास की घोषणा नहीं करता। चैपल का कहना है कि जिन लोगों ने ग्रेग चैपल का टीम इंडिया के कोच के रूप में चयन किया था वे ऑस्ट्रेलियाई मानसिकता की भारतीय क्रिकेट में शुरुआत करना चाहते थे। ग्रेग चैपल ने जब इस मानसिकता को सौरभ गांगुली और सचिन तेंदुलकर के ऊपर लागू करने की कोशिश की तो उसका उल्टा असर हुआ।

भारतीय टीम को ऊंचाई पर नहीं पहुंचा सके ग्रेग
आपको याद दिला दें कि जब ग्रेग चैपल ने टीम इंडिया के कोच के रूप में 2005 में कार्यभार संभाला था तब यह उम्मीद की जा रही थी कि वह भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाई तक पहुंचाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ग्रेग चैपल ऑस्ट्रेलियाई मानसिकता को भारतीय टीम के पर थोपना चाहते थे, जिसे लेकर काफी हंगामा हुआ था। चैपल और कप्तान सौरभ गांगुली के बीच काफी मतभेद थे। चैपल की वजह से सौरभ गांगुली को कप्तानी छोड़ना पड़ी थी और कुछ दिनों के बाद वह एक दिवसीय टीम से बाहर हो गए थे। थोड़े समय के बाद टेस्ट टीम से भी बाहर हो गए। ग्रेग चैपल युवा खिलाड़ियों को मौका देना चाहते थे।  चैपल वीबीएस लक्ष्मण को भी टीम से बाहर बैठाना चाहते थे।  सिर्फ इतना ही नहीं सचिन तेंदुलकर ने अपनी किताब में लिखा है कि गांगुली के बाद कप्तान बने राहुल द्रविड़ को भी चैपल कप्तान पद से हटाना चाहते थे और सचिन को द्रविड़ की जगह कप्तान बनाना चाहते थे। सन 2007 के वर्ल्ड कप में बुरे प्रदर्शन के बाद ग्रेग चैपल ने कोच पद से इस्तीफा दे दिया था।

आक्रामक कप्तानी को देना होगा प्रोत्साहन
इयान चैपल ने लिखा है कि अगर कुंबले को कोच के रूप में सफल होना है तो उसे रवि शास्त्री की तरह विराट कोहली की आक्रामक कप्तानी को प्रोत्साहन देना पड़ेगा। यह बात खुद कुंबले भी मानते हैं। दो दिन पहले कुंबले ने खुद बयान दिया था कि कोच के रूप में वह अपने सोच को खिलाड़ियों पर नहीं थोपेंगे, बल्कि खिलाड़ियों को मनाने की कोशिश करेंगे।  

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोच की नहीं प्रभावी भूमिका
जाते-जाते इयान चैपल ने यह भी लिखा है कि उन्हें यह नहीं लगता कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोच की कोई ज्यादा भूमिका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा सलाहकार उसका साथी खिलाड़ी है जिसको वह अपना प्रतिद्वंद्वी समझता है। इयान चैपल यह मानते हैं कि जूनियर स्तर पर एक कोच ज्यादा अच्छा काम कर सकता है जहां खिलाड़ी विकसित स्टेज पर नहीं होते हैं।

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स्पष्टवादी इयान चैपल
इयान चैपल अपने स्पष्टवादी विचार के लिए जाने जाते हैं। आपको याद दिला दें 2013 में इंडिया-ऑस्ट्रेलिया एक दिवसीय सीरीज के दौरान इयान चैपल ने बीसीसीआई के कमेंट्री ऑफर को इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि वह उस कठोर दिशानिर्देश को नहीं मानना चाहते थे जो बीसीसीआई की तरफ से पेश किया गया था। उनका कहना था कि अगर कमेंटेटर के रूप में खुलकर बात नहीं कर सकते हैं तो कमेंट्री करने का कोई मतलब नहीं है।