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अगर मिचेल स्टार्क अपील करते तो शिखर धवन यह वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम नहीं कर पाते

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अगर मिचेल स्टार्क अपील करते तो शिखर धवन यह वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम नहीं कर पाते

खास बातें

  1. शिखर धवन का जन्म 5 दिसंबर, 1985 को दिल्ली में हुआ था
  2. शिखर धवन ने विकेट कीपर के रूप में क्रिकेट खेलना शुरू किया
  3. 2003 में दिल्ली अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान बने
नई दिल्ली:

'गब्बर' के नाम जाने जाने वाले शिखर धवन का आज जन्मदिन है. शिखर धवन का जन्म 5 दिसंबर, 1985 को दिल्ली में हुआ था. शिखर धवन ने विकेट कीपर के रूप में क्रिकेट खेलना शुरू किया लेकिन धीरे-धीरे बल्लेबाजी के प्रति उनके ध्यान बढ़त गया. 1999-2000 में विजय हज़ारे ट्रॉफी के लिए धवन का दिल्ली अंडर-16 क्रिकेट टीम में चयन हुआ. इस टूर्नामेंट में धवन सिर्फ एक मैच खेल पाए थे और कुल मिलाकर 11 बनाए थे. फिर अगले साल यानी 2000-2001 में उन्होंने विजय हज़ारे ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने का गौरव हासिल किया. इस टूर्नामेंट में धवन ने करीब 84 का औसत से 755 रन बनाए थे.   

अंडर-19 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन : अलग-अलग टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के वजह से 2003 में वह दिल्ली अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान बने. 2004 में अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए उनका चयन हुआ. स्कॉटलैंड के खिलाफ भारत के पहले मैच में धवन ने शानदार 155 रन ठोंके थे और उन्हें 'मैन ऑफ़ द मैच' का अवार्ड भी मिला था. बांग्लादेश के खिलाफ भारत का दूसरे मैच में भी धवन ने 120 रन की शानदार पारी खेला और इस मैच में भी उन्हें मैन 'ऑफ़ द मैच अवार्ड' से नवाजा गया था. श्रीलंका के खिलाफ भी धवन ने शतक जड़ा था. इस वर्ल्ड कप में उन्होंने सबसे ज्यादा रन बनाए थे. सात पारी खेलते हुए धवन ने करीब 84 के औसत से 505 रन बनाए थे जिसमे तीन शतक और एक अर्धशतक शामिल था. इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 'मैन ऑफ़ द सीरीज' का भी ख़िताब मिला था.

अपना पहला एकदिवसीय मैच में शून्य पर आउट हुए : घरेलू मैचों में अच्छा प्रदर्शन के चलते 2010 में ऑस्ट्रेलिया टीम के खिलाफ वनडे टीम में धवन का चयन हुआ. इस टीम में कई सीनियर खिलाडियों को आराम दिया गया था. सलामी बल्लेबाज के रूप में धवन इस मैच में कोई भी रन बना पाए थे. मैच के दूसरे बॉल पे धवन बिना रन बनाए पवेलियन लौट गए थे. अपने वनडे करियर के दूसरे मैच में धवन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अर्धशतक मारा था लेकिन इसके बाद कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए जिसके वजह से उन्हें टीम से बहार बैठना पड़ा. पहले पांच एकदिवसीय मैच में धवन का औसत सिर्फ 14 के करीब था.


टीम में वापसी फिर लगाए लगातार दो शानदार शतक: 2013 में इंग्लैंड में खेले जाने वाली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए धवन का टीम में चयन हुआ. यह सीरीज धवन के लिए 'करो या मारो'' जैसी थी. अगर धवन इस सीरीज में फेल होते तो हो सकता उनकी क्रिकेट करियर ख़त्म हो जाता. लेकिन 'गब्बर' की किस्मत में कुछ और लिखा हुआ था. इस टूर्नामेंट के पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ धवन ने 114 रन का शानदार पारी खेली और भारत इस मैच को 26 रन से जीतने में सफल रहा.

धवन ने अपने वनडे करियर का पहला ''मैन ऑफ़ द मैच' भी जीता. 11 जून 2013 को वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत के दूसरे मैच में भी धवन 102 रन पर नॉट-आउट रहे और भारत ने इस मैच को 8 विकेट से जीता था. फिर धवन का करियर उड़ान भरने लगा. इस टूर्नामेंट में धवन 90.75 के औसत में 363 रन बनाए और उन्हें मैन 'ऑफ़ द सीरीज' का अवार्ड भी मिला था. धवन के शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ भारत आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का चैंपियन भी बना था.  

टेस्ट टीम में चयन के बारे में अंपायर से पता चला : वनडे मैचों में धवन अच्छा प्रदर्शन करते जा रहे थे. उम्मीद थी कि टेस्ट टीम में भी उनको मौक़ा मिलेगा. 2013 में ऑस्ट्रेलिया टीम ने भारत का दौरा किया. इस सीरीज के लिए गौतम गंभीर के जगह शिखर धवन का चयन हुआ. जब टीम का चयन हुआ तब धवन मुंबई के वानखड़े मैदान पर ईरानी ट्रॉफी मैच खेल रहे थे. धवन को यह खुश खबरी मैदान पर मौजूद फील्ड अंपायर ने दी. फिर धवन के एक दोस्त ने उन्हें फ़ोन पर यह खबर दी. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट में प्लेइंग एलेवेन में धवन को मौक़ा नहीं मिला. सलामी बल्लेबाज के रूप में वीरेंद्र सहवाग और मुरली विजय का चयन हुआ. दूसरे टेस्ट मैच में भी विजय और सहवाग का सलामी बल्लेबाज के रूप में चयन हुआ लेकिन इन दोनों टेस्ट में सहवाग कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए.  

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पहला टेस्ट में कायम किया वर्ल्ड रिकॉर्ड : फिर मोहाली में खेला गया तीसरे टेस्ट मैच के लिए शिखर धवन को सहवाग के जगह पर सलामी बल्लेबाज के रूप में मौक़ा मिला. ऑस्ट्रेलिया टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए अपना पहली पारी में 408 रन बनाए थे. भारत की तरफ से धवन और मुरली विजय बल्लेबाजी करने मैदान पर उतरे. करियर का पहला टेस्ट मैच के वजह से धवन पर काफी दवाब था. फिर जो हुआ वह विश्वास करना मुश्किल था. यह भारतीय पारी का पहली गेंद थी और मुरली विजय स्ट्राइक पर थे.

ऑस्ट्रेलिया के तरफ से मिचेल स्टार्क पहली ओवर की पहली बॉल फेंकने के लिए दौड़. जब वह फॉलो थ्रू के पास पहुंचे तो उनके हाथ से गेंद फिसलकर नॉन स्ट्राइक एंड के स्टंप पे लगी. दूसरे छोर पर खड़े शिखर धवन ग्राउंड से बहार थे. अगर स्टार्क या ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्के अपील करते तो धवन आउट हो जाते लेकिन खेल भावना के चलते ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों ने ऐसा नहीं किया. इसके चलते धवन को जीवन-दान मिला और बिना गेंद का सामना करते हुए आउट होने से बच गए. फिर धवन ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ  85 गेंदों पर शतक ठोका और यह टेस्ट डेब्यू में मैच में सबसे तेज शतक बनाने के मामले में वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम कर लिया. इस मैच में धवन ने पहली पारी में 185 रन बनाए थे. इस शानदार पारी के वजह से उन्हें 'मैन ऑफ़ द मैच' का अवार्ड भी मिला. 



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