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यह युवा भारतीय बॉलर इस मामले में बड़े नामों पर पड़ रहा है भारी

भारतीय सेलेक्टर्स युवाओं के साथ चांस ले रहे हैं. और उन्हें प्रतिक्रिया भी अच्छी मिल रही है. वॉशिंगटन सुंदर इसका अच्छा सबूत हैं.

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यह युवा भारतीय बॉलर इस मामले में बड़े नामों पर पड़ रहा है भारी

वॉशिंगटन सुंदर की वह तस्वीर, जब उन्हें वनडे कैप प्रदान की गई

खास बातें

  1. वॉशिंगटन का बहुत ही सुंदर साहस!
  2. यह प्रदर्शन कुछ संकेत जरूर देता है!
  3. सीरीज में भी आगे, ओवरऑल भी आगे!
नई दिल्ली: निधास ट्रॉफी टी20 ट्राई सीरीज में टीम इंडिया ने श्रीलंका में बहुत ही शानदार शुरुआत की है. बल्लेबाज आग उगल रहे हैं, तो विजय शंकर जैसे युवा गेंदबाज ने बाग्लादेश के खिलाफ दूसरे मैच में यह दिखा दिया कि वह आगे टीम इंडिया के लिए लंबा योगदान देने को राजी हैं. बहरहाल इन युवाओं के बीच एक ऐसा खिलाड़ी भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है, जो अपने काम से सभी का दिल जीत रहा है. हम बात कर रहे हैं सिर्फ 18 साल के ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर की. 
  वॉशिंगटन सुंदर ने सीरीज के 2 मैचों मे फैंके 8 ओवरों में 2 विकेट चटकाए हैं. हालांकि उनसे ज्यादा विकेट जयदेव उनादकट और युजवेंद्र चहल के हैं. जयदेव ने चार और युजवेंद्र ने 3 बल्लेबाजों को आउट किया है. लेकिन इतनी कम उम्र में शुरुआत में ही बड़े अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजों के सामने जो साहस वॉशिंगटन सुंदर ने दिखाया है, उसकी चौतरफा प्रशंसा हो रही है. लेकिन तारीफ की असल वजह कुछ और ही है.

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आपको बता दें कि जब बात इकॉनमी रेट की आती है, तो वॉशिंगटन सुंदर सभी पर भारी पड़ रहे हैं.  वर्तमान टीम इंडिया के लिए टी-20 क्रिकेट खेल रहे गेंदबाजों में अगर इस पहलू से शीर्ष पांच गेंदबाजों की बात करें, तो युजवेंद्र चहल 8.24 के इकॉनमी रेट के साथ पांचवे नंबर पर हैं. उनके बाद विजय शंकर (7.83), सुरेश रैना (7.62) और अक्षर पटेल (6.79) का नंबर आता है. लेकिन वॉशिंगटन सुंदर इन सभी पर भारी पड़ रहे हैं. इस सीरीज में सुंदर का इकॉनमी रेट 6.37 का है. लेकिन सीरीज के बाहर भी सुंदर 'सबसे सुंदर' हैं.

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बता दें कि वर्तमान टी-20 टीम में वॉशिंगटन सुंदर अभी तक खेले 3 मैचों में 6.08 इकॉनमी रेट के साथ सबसे ऊपर हैं. हालांकि आलोचक कह सकते हैं कि ये सिर्फ 3 मैचों के आंकड़े हैं. लेकिन आलोचक यह समझें कि सिर्फ 18 साल की उम्र में कितना साहस और जज्बा इस गेंदबाज ने दिखाया है. और यह संकेत है कि समय गुजरने के साथ ही वह बल्लेबाजों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं.


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