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IND vs NZ 1st Semifinal: इसलिए आंकड़ेविद ने सेमीफाइनल में महेंद्र सिंह धोनी के रवैये पर खड़ा किया सवाल

IND vs NZ 1st Semifinal: इसलिए आंकड़ेविद ने सेमीफाइनल में महेंद्र सिंह धोनी के रवैये पर खड़ा किया सवाल

भारत बनाम न्यूजीलैंड: धोनी के रवैये पर आलोचक सवाल कर रहे हैं

खास बातें

  • लगातार आलोचना के घेरे में रहे एमएस धोनी
  • पहले सचिन तेंदुलकर ने उठाया था सवाल
  • अब फाइनल में भी उठी रवैये पर उंगली
मैनचेस्टर:

इंग्लैंड में जारी वर्ल्ड कप (World Cup 2019) में न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले जहां टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर आलोचना के बीच घिर गया, तो वहीं पिछले काफी मैचों में धीमेपन के लिए आलोचना झेल रहे पूर्व कप्तान एमएमस धोनी का रवैया एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गया है. और एक आंकड़ेविद ने धोनी की अटैक की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़ा किया है. 

यह सही है कि यह महेंद्र सिंह धोनी और रवींद्र जडेजा के बीच सातवें विकेट के लिए 116 रन की साझेदारी हुई. यह सही है कि यही वह साझेदारी थी, जिसने एक बार फिर से भारत को जीत की राह पर ला दिया. लेकिन क्रिकेटप्रेमी धोनी के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं. सवाल यह है कि धोनी ने अटैक तब  करना शुरू किया, जब आखिरी के दो ओवरों में 12 ओवरों में जीत के लिए 31 रन की दरकार थी. 

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एक आंकड़ेविद ने धोनी के इसी रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि धोनी का एक छोर को इतने लंबे समय तक थामे रहने की रणनीति पूरी तरह से समझ से परे रही. उन्होंने लिखा धोनी एक चैंपियन चेजर हो सकते हैं, लेकिन धोनी के धोनी के जरूरत से ज्यादा विकेट पर जमने ने टीम को नुकसान पहुंचाया. निश्चित ही, धोनी तब आक्रामक रवैया अख्तियार कर सकते थे, जब भारत को 8 ओवर में 72 रन की दराकर थी. 

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आलोचकों का यह भी कह रहे हैं कि 48वें ओवर में कहीं देर से अटैक करने से पहले धोनी के 69 गेंदों पर 43 रन थे. और थोड़ा सा चौंकाने वाली बात यह रही कि इन 43 रनों में धोनी सिर्फ एक ही चौका लगा सके. अगर कुछ और जमीनी शॉटों से रन बटोरते, तो इससे अंतर पड़ा. वास्तव में धोनी का स्ट्राइकेट रवीद्र जडेजा से करीब-करीब आधा ही रहा. 

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एक तरफ सोशल मीडिया पर धोनी के  समर्थक उनका बचाव कर रहे हैं, तो सेमीफाइनल में उनके अटैक की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. और यह चर्चा वास्तव में यहीं ही खत्म होने नहीं जा रही. आने वाले लंबे समय तक वर्ल्ड कप में धोनी के रवैये पर सवाल उठते रहेंगे. और यह भी सवाल रहेंगे कि आखिर धोनी को मैनेजमेंट ने यह कैसा रोल दिया