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मुख्य कोच अनिल कुंबले से नाराज़ भारतीय खिलाड़ियों ने की बोर्ड समिति से शिकायत

कुंबले का करार चैंपियंस ट्रॉफी के समाप्त होते ही ख़त्म हो जायेगा जिसके चलते भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने कोच पद के लिए 31 मई तक सभी आवेदन जमा करने की डेडलाइन रखी है. पद के लिए इच्छुक उम्मीदवारों के आवेदन के बाद सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की क्रिकेट सलाहकार समिति उनका इंटरव्यू लेगी.

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कुंबले का करार चैंपियंस ट्रॉफी के समाप्त होते ही ख़त्म हो जायेगा

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बीसीसीआई ने हाल ही में टीम इंडिया के नए कोच के लिए आवेदन मंगवाने की प्रक्रिया शुरू करके सबको हैरानी में डाल दिया. भारत के सबसे सफल गेंदबाज 46 वर्षीय अनिल कुंबले को पिछले वर्ष 23 जून 2016 को एक साल के लिए कोच नियुक्त किया गया था और उनके नेतृत्व में भारतीय टीम का रिकॉर्ड 100 प्रतिशत रहा है. हालाँकि आवेदनों में कुंबले को वर्तमान कोच होने की वजह से सीधी एंट्री मिली है लेकिन ऐसी कौन सी वजह है जिसके चलते इतने बेहतरीन रिकॉर्ड के बावजूद कुंबले का बतौर कोच कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने के बारे में विचार नहीं किया गया.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय खिलाड़ी अपने कोच के 'रौबदार' रवैये से खुश नहीं हैं. खिलाड़ियों ने कोच के बर्ताव की शिकायत बीसीसीआई के प्रशासकों की समिति (सीओए) से की है. सूत्रों के मुताबिक़ प्लेयर्स को ड्रेसिंग रूम में कोई स्वतंत्रता नहीं है जिसके चलते कोच और खिलाड़ियों के बीच संबंध बिलकुल भी मधुर नहीं रह गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार कुंबले को अपने खिलाड़ियों पर भरोसा नहीं है. ये हैरान कर देने वाली खबर ऐसे समय आ रही है, जब चैंपियंस ट्रॉफी प्रतियोगता शुरू होने की कगार पर है. भारत को अपने पहले मुकाबले में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से 4 जून को भिड़ना है.
 

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Photo Credit: PTI
 

कुंबले का करार चैंपियंस ट्रॉफी के समाप्त होते ही ख़त्म हो जायेगा जिसके चलते भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने कोच पद के लिए 31 मई तक सभी आवेदन जमा करने की डेडलाइन रखी है. पद के लिए इच्छुक उम्मीदवारों के आवेदन के बाद सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की क्रिकेट सलाहकार समिति उनका इंटरव्यू लेगी. कुंबले का करार ना बढ़ाने का एक कारण ये भी माना जा रहा था की उन्होंने ज़ोर शोर से खिलाड़ियों और कोच के वेतन में बढ़ोत्तरी की मांग की थी जिससे बोर्ड ख़ासा नाखुश था. कुंबले के बेहतरीन रिकॉर्ड को देखते हुए एक समय ऐसा प्रतीत हो रहा था की उन्हें मुख्य कोच के पद पर बरक़रार रखा जायेगा. लेकिन एक बात तो स्पष्ट हो गयी है कि अगर उनके पास खिलाड़ियों का समर्थन नहीं है तो उनका अपने पद पर बने रहना लगभग असंभव सा है.



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