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भारत का दौरा हमेशा से रहा है मुश्किल, कई कप्तानों की कप्तानी गई

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भारत का दौरा हमेशा से रहा है मुश्किल, कई कप्तानों की कप्तानी गई

हाशिम अमला (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट कप्तान हाशिम अमला ने टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ी है तो इसकी वजह भारत में मिली हार बताई जा रही है। अमला ने जब अफ्रीकी टीम की कमान संभाली तो अफ्रीकी टीम टेस्ट में नंबर एक थी। अमला के सामने पहाड़ जैसा लक्ष्य था क्योंकि उन्हें उपमहाद्वीप में टेस्ट सीरीज़ में कप्तानी करनी थी जो 90 टेस्ट खेल चुके अमला के लिए महंगी साबित हुई।

ऐसा नहीं कि भारत में सीरीज़ खेलने के बाद कप्तानी गंवाने वाले अमला पहले क्रिकेटर हैं। अमला से पहले कई कप्तानों की साख पर दाग भारत में सीरीज़ खेलने के बाद लगा।

हेन्सी क्रोनिये (दक्षिण अफ़्रीका)
दक्षिण अफ्रीका के सबसे सफल कप्तानों में क्रोनिये की गिनती होती रही है, लेकिन इनके लिए भी भारत दौरा अन-लकी साबित हुआ। क्रोनिये ने भारत में टेस्ट सीरीज़ 2-0 से जीती लेकिन वनडे सीरीज़ 3-2 से हार गए। साल 2000 में खेली गई इस सीरीज़ के बाद क्रोनिये पर मैच फिक्स करने का आरोप लगा और उन पर लाइफ-बैन लग गया। दो साल बाद प्लेन क्रैश में उनका निधन हुआ।

ग्राहम गूच (इंग्लैंड)
ग्राहम गूच एक शानदार कप्तान और खिलाड़ी रहे हैं। इस बात से कोई इनकार नहीं किया जा सकता। अपने टेस्ट करियर में 118 टेस्ट खेल चुके गूच को भी 1993 में भारत दौरे के बाद कप्तानी से हाथ धोना पड़ा। इस दौरे पर भारत ने इंग्लैंड को 3-0 से हराकर सीरीज़ में व्हाइट-वॉश किया। कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में खेले गए टेस्ट में भारत ने शानदार जीत दर्ज की। सीरीज़ में भारत की तरफ से अनिल कुंबले ने 21 विकेट, वेंकटपति राजू ने 16 और राजेश चौहान ने 9 विकेट लिए। वहीं सीरीज़ में भारतीय बल्लेबाजों ने भी धावा बोला। विनोद कांबली, सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन और नवजोत सिंह सिद्धू ने रनों की बारिश की। कप्तान गूच इस सीरीज़ के 2 टेस्ट में 47 रन ही बना सके। ऐशेज़ सीरीज़ में वे ऑउट-ऑफ फ़ॉर्म रहे और अंत में उन्हें कप्तानी छोड़नी पड़ी।

केविन पीटरसन  (इंग्लैंड)
इंग्लिश क्रिकेट में केविन पीटरसन एक बड़ा नाम है, लेकिन वे भारत में कभी सफल नहीं रहे। इंग्लैंड के बेहतरीन बल्लेबाजों में केपी की गिनती होती रही है लेकिन 2008-09 के भारत दौरे के बाद से उनके करियर की तस्वीर बदल गई। पीटरसन की कप्तानी में इंग्लिश टीम दौरे पर दो टेस्ट की सीरीज़ 1-0 से हारी। दौरे पर पीटरसन के बल्ले से 2 टेस्ट में 149 रन निकले जिसमें एक शतक रहा। कोच पीटर मूर्स और पीटरसन के बीच ड्रेसिंग रूम में हुई अनबन ने हार से बड़ा काम किया। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मूर्स को कोच पद से निकाल दिया। इंग्लैंड के लिए सिर्फ तीन टेस्ट में कप्तानी कर पीटरसन ने इस्तीफा दिया। इसके बाद भी वे कई बार विवादों में पड़े और फिलहाल इंग्लिश टीम से बाहर ही हैं।  

रिकी पॉन्टिंग (ऑस्ट्रेलिया)
रिकी पॉन्टिंग ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 77 टेस्ट मैचों में कप्तानी की लेकिन भारत में सीरीज़ हार फिर ऐशेज़ हार ने उनकी कप्तानी पारी पर ब्रेक लगा दी। पंटर नाम से मशहूर खिलाड़ी को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने सम्मान के साथ विदा किया और माइकल क्लार्क को ज़िम्मदारी सौंपी। 2010-2011 के भारत दौरे पर पॉन्टिंग का अच्छे फ़ॉर्म में रहे। उनके बल्ले से 2 टेस्ट की 4 पारियों में 56.00 की औसत से 224 रन निकले। इस दौरान पंटर ने तीन अर्द्धशतकीय पारी भी खेली लेकिन सीरीज़ नहीं बचा सके। पंटर की कप्तानी पर ऐसा ग्रहण लगा जो ऐशेज़ सीरीज़ में भी हार के बाद उनकी कप्तानी ले गया।

माइकल क्लार्क (ऑस्ट्रेलिया)
वैसे क्लार्क ने ऐशेज़ हार के बाद कप्तानी और क्रिकेट दोनों छोड़ी लेकिन इसकी नींव भारत में 2013 में पड़ी। 2013 में भारत में चार टेस्ट की सीरीज़ में क्लार्क की सेना का 4-0 से सफाया हुआ। दौरे पर क्लार्क ने तीन टेस्ट में कप्तानी की और तीनों में बुरी हार देखी। क्लार्क का सपना रहा कि वे भारत को भारत में हरा सके लेकिन उनका सपना अधूरा रह गया।


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