कार्तिक ने किया निदाहस ट्रॉफी फाइनल के 'अंदर की बात' का खुलासा, जब उन्होंने छक्के से टूर्नामेंट जिताया

IPL 2020, KKR: कार्तिक ने कहा कि उस समय मैं खासा निराश और नाराज था, लेकिन वास्तव में आप इसे लेकर कप्तान से सवाल नहीं कर सकते. निश्चित ही, रोहित के दिमाग में इसके पीछे कुछ जरूर रहा होगा. आखिर में मैं नंबर-7 पर बैटिंग के लिए गया. कार्तिक ने एक कार्यक्रम में अपनी उस मनोदशा के बारे में चर्चा की, जब भारत को जीत के लिए 12 गेंद पर 34 रन की दरकार थी. 

कार्तिक ने किया निदाहस ट्रॉफी फाइनल के 'अंदर की बात' का खुलासा, जब उन्होंने छक्के से टूर्नामेंट जिताया

केकेआर के कप्तान दिनेश कार्तिक

नई दिल्ली:

हालिया सालों में आईपीएल में  कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के कप्तान दिनेश कार्तिक (Dinesh Karthik) की छवि अगर बदली, तो उसका आधार साल 2018 में श्रीलंका में निदाहस ट्रॉफी में बांग्लादेश के खिलाफ खेला गया मुकाबला था.  याद दिला दें कि यह रुबेल हुसैन का फेंका गया वही ओवर था, जिसमें दिनेश कार्तिक ने 22 रन बटोरे. और जब पारी की आखिरी गेंद पर भारत को जीत के लिए 5 रन बनाने थे, तो कार्तिक ने छक्का जड़कर ऐसी जीत दिलायी, यह टी-20 में भारतीय टीम के सबसे यादगार लम्हों में से एक बन गया. इसके बाद कार्तिक को इसका अपने तरीके से रिवार्ड मिला, तो आलोचकों, क्रिकेट पंडितों, प्रशंसकों और साथी खिलाड़ियों का उन्हें देखने का नजरिया ही बदल गया. 

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अब उसी मैच का खुलासा करते हुए कार्तिक ने कहा कि मैं उस मैच में नंबर पांच पर बल्लेबाजी के लिए तैयार था. तब कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि मैं नंबर छह पर जाऊंगा. मैं इस विचार के साथ सहज था. मैं बहुत ही आश्वस्त था कि मैं नंबर छह पर बैटिंग के लिए जाऊंगा और मैं जरूरी रनों के बीच के अंतर को देख सकता था. जब चौथा विकेट गिरा, तो मैं बैटिंग के लिए जाने को तैयार था, लेकिन तब रोहित ने विजय शंकर को बल्लेबाजी के लिए भेज दिया. 

कार्तिक ने कहा कि उस समय मैं खासा निराश और नाराज था, लेकिन वास्तव में आप इसे लेकर कप्तान से सवाल नहीं कर सकते. निश्चित ही, रोहित के दिमाग में इसके पीछे कुछ जरूर रहा होगा. आखिर में मैं नंबर-7 पर बैटिंग के लिए गया. कार्तिक ने एक कार्यक्रम में अपनी उस मनोदशा के बारे में चर्चा की, जब भारत को जीत के लिए 12 गेंद पर 34 रन की दरकार थी. 

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इस विकेटकीपर ने कहा कई बार आपको जब एकदम किनारे पर धकेला जाता है, तो आप किसी खास चीज के साथ बाहर आते हो. यह तब मेरे लिए ऐसा मौका था, जब मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं था. मेरे पास एक ऐसा मौका था, जहां मेरे पास खुद को पूरी तरह खुलकर प्रदर्शित करना था.  मैंने हमेशा ही हालात विशेष को लेकर अभ्यास किया था. जैसे एक ओवर में 12 रन, 2 ओवर में 20 रन वगैरह-वगैरह. जब मैं बैटिंग के लिए भीतर गया, मैं जानता था कि मैं क्या शॉट खेल सकता हूं और उस दिन मैं ये शॉट बेहतरीन अंदाज में खेलने में सफल रहा. 

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