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कप्तानी के खुलासे पर 'इतना बड़ा सच' छिपा गए महेंद्र सिंह धोनी !

टीम इंडिया को दो विश्व कप जिताने वाले कप्तान धोनी ने दो दिन पहले ही खुद को मिली कप्तानी पर बड़ा खुलासा किया, लेकिन कैप्टन कूल उस सच को नहीं स्वीकार सके, जो सच कभी तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार ने जोर-शोर से कहा था

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कप्तानी के खुलासे पर 'इतना बड़ा सच' छिपा गए महेंद्र सिंह धोनी !

खास बातें

  1. क्यों वरिष्ठों ने नाम नहीं लेना चाहते धोनी?
  2. शरद पवार ने बताया था किसने दिलाई कप्तानी
  3. सचिन की सिफारिश पर कप्तान बने थे धोनी!
दो दिन पहले ही महेंद्र सिंह धोनी ने एक पोर्टल से बातचीत में यह खुलासा किया था कि उन्हें साल 2007 में कप्तानी दिलाने में कुछ सीनियरों खिलाड़ियों ने बहुत ही अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन इस स्वीकारोक्ति में धोनी ने खुलकर उन नामों का जिक्र नहीं किया, जिन्होंने उन्हें कप्तानी दिलाने में मदद की. लेकिन सच यह है कि धोनी को अगर कप्तानी मिली, तो उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही नाम था, जिसकी पुष्टि सार्वजनिक तौर पर तत्कालीन बीसीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार ने धोनी के कप्तान बनने के काफी समय बाद की थी. अब सवाल यह है कि जब धोनी यह स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें कुछ सीनियरों की वजह से कप्तानी मिली, तो वह उनके नाम क्यों नहीं ले रहे? आखिर क्या वजह है कि धोनी उन वरिष्ठ खिलाड़ियों को सार्वजनिक तौर पर श्रेय नहीं देना चाहते?

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चलिए हम आपको बताते हैं कि टीम इंडिया का वह खिलाड़ी कौन था, जिसने खुद को साल 2007 में मिले कप्तानी के प्रस्ताव को ठुकराकर धोनी को कप्तान बनाने की सलाह बीसीसीआई को दी. यह  साल 2007 का समय था, जब इंग्लैंड दौरे में तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में हुई हार के बाद द्रविड़ ने टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी. इसके बाद तत्कालीन चीफ सेलेक्टर दिलीप वेंगसरकर के साथ विचार-विमर्श के बाद बीसीसीआई ने एक बार फिर से सचिन तेंदुलकर को टीम की कमान संभालने का निर्णय लिया. लेकिन सचिन ने इस मिले प्रस्ताव विनम्रता के साथ ठुकराते हुए 26 साल के महेंद्र सिंह धोनी को ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम इंडिया का कप्तान नियुक्त करने का सुझाव दिया. साल 2007 में  नई दिल्ली में आईपीएल टूर्नामेंट के अनावरण कार्यक्रम के दौरान शरद पवार ने ऑस्ट्रेलिया दौरे में सात वनडे मैचों की सीरीज के लिए धोनी को कप्तान बनाए जाने से पहले सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ से इस मुद्दे पर लंबी मंत्रणा की. ठीक इसी दिन राहुल द्रविड़ ने टेस्ट से अपनी कप्तानी छोड़ने के बारे में बीसीसीआई को अवगत करा दिया.

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सूत्रों के अनुसार आईपीएल लॉन्चिंग डिनर के दौरान शरद पवार ने जब नए कप्तान के नाम पर राहुल द्रविड़ की राय मांगी, तो उन्होंने तुरंत ही धोनी के नाम की सिफारिश कर दी. ठीक ऐसी ही राय सचिन तेंदुलकर ने भी दी. इन दोनों दिग्गजों के साथ शरद पवार ने अलग-अलग बातचीत की थी. लेकिन इसके बावजूद शरद पवार सचिन तेंदुलकर को ही कप्तान बनाने के इच्छुक थे और उन्होंने इस बाबत सचिन से अनुरोध भी किया. लेकिन पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष के साथ लंबी बातचीत के बाद सचिन ने कप्तान बनने से इनकार कर दिया और सचिन तेंदुलकर पहली बार वनडे टीम के कप्तान बन गए. इसके बाद जल्द ही उन्हें टेस्ट का उप-कप्तान भी बना दिया गया। साल 2008 में दिल्ली में फिरोजशाह कोटला मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए टेस्ट के दौरान धोनी को पहली बार पूर्णकालिक टेस्ट का भी कप्तान बना दिया गया. दिल्ली में हुए इसी टेस्ट के दौरान अनिल कुंबले ने टेस्ट को अलविदा कहा था. कुल मिलाकर वास्तविकता यह है कि अगर धोनी को कप्तान बनाने में किसी का सबसे बड़ा योगदान रहा, तो वह सचिन तेंदुलकर का रहा, जिन्होंने खुद को मिले कप्तानी के प्रस्ताव को ठुकराकर धोनी का नाम आगे किया. लेकिन इसके बाद एक समय ऐसा भी आया, जब सौरव गांगुली व वीपीएस लक्ष्मण जैसे खिलाड़ी एक-एक करके धोनी की प्लानिंग से बाहर होने लगे.

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लेकिन तब शरद पवार ने ही मीडिया के जरिए धोनी को नसीहत देते हुए कहा था कि 'यह मत भूलो कि आपको किसकी बदौलत कप्तानी मिली'. इसके बाद धोनी ने कभी भी सचिन को लेकर बयान नहीं दिया, लेकिन अब जब महज दो दिन दिन पहले ही उन्होंने यह खुलासा किया कि कुछ सीनियरों ने उन्हें कप्तानी दिलाने में मदद की, तो न तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर का ही नाम लिया और न ही राहुल द्रविड़ का. 
 


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