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'इस खास अंदाज' से गौतम गंभीर ने सेलेक्टरों को भेजा यह मैसेज

भारतीय टीम के पूर्व उप-कप्तान गौतम गंभीर भले ही टीम इंडिया और युवा कप्तान विराट कोहली की पॉलिसी में फिट न बैठ रहे हों, लेकिन वह हार मानने को बिल्कुल भी राजी नहीं हैं

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'इस खास अंदाज' से गौतम गंभीर ने सेलेक्टरों को भेजा यह मैसेज

गौतम गंभीर का फाइल फोटो

खास बातें

  1. गौतम का सेलेक्टरों को गंभीर मैसेज!
  2. यह 'टेस्ट' नहीं वनडे है!
  3. सिर्फ इतनी कम गेंदों में बना डाले 101 रन
नई दिल्ली: भारतीय टीम के पूर्व उप-कप्तान गौतम गंभीर भले ही टीम इंडिया और युवा कप्तान विराट कोहली की पॉलिसी में फिट न बैठ रहे हों, लेकिन वह हार मानने को बिल्कुल भी राजी नहीं हैं. इसका सबूत उन्होंने एक बार फिर से सोमवार को पुणे में बंगाल के खिलाफ खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल के दूसरे दिन दिया. वास्तव में गौतम अपने 'इस खास अंदाज' से राष्ट्रीय सेलेक्टरों को मैसेज भेज दिया है कि वह अभी भी होड़ में बने हुए हैं. एक ओर जहां महेंद्र सिंह धोनी के उत्तराधिकारी कहे जा रहे उभरते हुए विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत एक बार फिर नाकाम साबित हुए, तो गंभीर ने दिखाया कि उनके भीतर टीम इंडिया के लिए खेलने की आग अभी बुझी नहीं है.
 
अब यह तो आप जानते ही हैं कि टीम इंडिया के दोनों ही संस्करणों में दोनों ही सलामी जोड़ियां बहुत ही अच्छा कर रही हैं. और काफी दिन से बाहर चल रहे गौतम गंभीर के लिए टीम में जगह नहीं ही है. वहीं, टीम में तीसरे ओपनर लोकेश राहुल भी हैं,  लेकिन यह बात भी गंभीर की टीम इंडिया में वापसी की भूख को रत्ती भर भी कम नहीं कर सकी है. गौतम गंभीर ने दिखाया न ही उन्हें कोई दबाव विचिलत कर सका है, और न ही टीम से बाहर होने की
निराशा ही उनके भीतर घर कर सकी है. 

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गंभीर ने आउट होने से पहले 127 रन के लिए 216 गेंदें खेलीं, लेकिन इस लेफ्टी बल्लेबाज की पारी का खास अंदाज दरअसल कुछ और ही था. वास्तव में यह खास अंदाज पहले विकेट के लिए युवा ओपनर कुणाल चंदेला के साथ पहल विकेट के लिए निभाई गई 232 रन की साझेदारी भी नहीं थी. न ही यह खास अंदाज यह था कि गौतम गंभीर ने टीम इंडिया के बॉलर मोहम्मद शमी की गेंदों के खिलाफ कई दनदनाते हुए चौके जडे़.

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दरअसल गौतम का यह अंदाज गंभीर नहीं, बल्कि उनका वनडे अंदाज था. गंभीर ने सेलेक्टरों को भेजे मैसेज में अच्छी तरह बता दिया कि टी-20 और वनडे में वह अभी भी युवाओँ को नींद उड़ाने के लिए काफी हैं. दरअसल खास बात यह रही कि गौतम के कुल 127 में से शुरुआती 101 रन उन्होंने सिर्फ 122 गेंदों में बनाए. इसमें उनके 18 चौके भी शामिल रहे. तो उन्होंने अपने आखिरी 26 रन बनाने के लिए 94 गेंदें लीं. मतलब रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में गंभीर के दो रूप दिखाई पड़े. शतक तक उनका वनडे अंदाज और इसके बाद टेस्ट अंदाज. 

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गौतम गंभीर का बंगाल के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले में यह प्रदर्शन युवा ओपनरों पर दबाव बनाने के लिए तो
काफी है ही, साथ ही यह राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के लिए यह अच्छा संदेश भी कि वे गौतम को भूले नहीं. 
 


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