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इस वजह से Ravi Shastri एक बार फिर से पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है

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इस वजह से Ravi Shastri एक बार फिर से पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है

Ravi Shastri को बोर्ड के रवैये के चलते परेशानी उठानी पड़ सकती है

खास बातें

  1. शांता रंगास्वामी के विवाद के चलते पैदा हुई स्थिति
  2. ...तो क्या डब्ल्यूवी रमन की भी फिर से नियुक्ति होगी?
  3. बीसीसीआई का तमाशा बन रहा है!
नई दिल्ली:

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में जब से क्रिकेट प्रशासकीय कमेटी (COA) की इंट्री हुई, तब से ऐसी-ऐसी बातें देखने को मिली हैं, जो पहले कभी देखने को नहीं ही मिलीं. एक असंजस की स्थिति सी है. और कभी भी कुछ भी हो सकता है. कुछ ऐसा ही अब रवि शास्त्री (Ravi Shastri) के मामले में हो सकता हैं, जी हां. रवि शास्त्री की बतौर कोच फिर से नियुक्ति हो सकती है. और इसके पीछे है ताजा सीएसी की सदस्य शांता रंगास्वामी से जुड़ा विवाद, जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

बात यह है कि (बीसीसीआई, BCCI) के एथिक्स ऑफिसर डी.के जैन अगर कपिल देव (Kapil Dev), अंशुमान गायकवाड़ और शांता रंगास्वामी की क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) को हितों के टकराव मुद्दे में दोषी पाते हैं तो क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) को पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है. एथिक्स ऑफिसर ने शनिवार को सीएसी के तीनों सदस्यों को नोटिस भेजा और उनसे 10 अक्टूबर तक जवाब मांगा जिसके बाद रंगास्वामी ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है. मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ (एमपीसीए) के आजीवन सदस्य संजीव गुप्ता ने लोढ़ा पैनल के एक आदमी, एक पद के प्रस्ताव के तहत सीएसी पर हितों के टकराव का आरोप लगाया था.


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बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा, "अगर शास्त्री को नियुक्त करने वाली समिति के सदस्यों में हितों का टकराव पाया जाता है तो शास्त्री की मुख्य कोच की नियुक्ति की प्रक्रिया से एक बार फिर गुजरना होगा. फिर एक नई समिति का गठन किया जाएगा और नए पंजीकृत बीसीसीआई संविधान को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया को दोहराया जाएगा क्योंकि संविधान अब स्पष्ट रूप से कहता है कि केवल एक सीएसी ही भारतीय टीम के मुख्य कोच को नियुक्त कर सकता है"

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अधिकारी ने आगे कहा कि महिला क्रिकेट टीम के कोच डब्ल्यू.वी रमन के साथ भी यहीं प्रक्रिया दोहराई जा सकती है क्योंकि उन्हें जिस ऐड-हॉक सीएसी ने चुना था उसमें देव, गायकवाड़ और रंगास्वामी ही शामिल थे. अधिकारी ने कहा, "यह देखने की जरूरत है कि रमन के मामले में जैन का फैसला क्या होता है क्योंकि कोच के रूप में उन्हें चुनने वाली ऐड-हॉक सीएसी में यही तीन व्यक्ति शामिल थे. यहां तक कि कोच के मामले में दो सदस्यीय प्रशासकों की समिति (सीओए) भी विभाजित थी. उस समय विनोद राय, रमन की नियुक्ती के पक्ष में थे जबकि डायना एडुल्जी का कहना था कि लोढ़ा पैनल के प्रस्तावों के तहत बदले गए बीसीसीआई के संविधान में ऐड-हॉक सीएसी की कोई जगह नहीं है"

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रवि थोगड़े के सीएसी में शामिल होने के बाद रमन को 2:1 के मत से महिला टीम का कोच नियुक्त किया गया था.



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