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इसलिए बीसीसीआई भारत का नाम इस्तेमाल नहीं कर सकता, याचिककर्ता ने कहा, अदालत ने जारी किया नोटिस

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इसलिए बीसीसीआई भारत का नाम इस्तेमाल नहीं कर सकता, याचिककर्ता ने कहा, अदालत ने जारी किया नोटिस

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खास बातें

  1. बीसीसीआई को नोटिस जारी
  2. सात फरवरी तक मांगा जवाब
  3. इसके बाद तय होगी सुनवाई की तारीख
चेन्नई:

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पहले से ही हजारों मुसीबतों का मारा है! बावजूद इसके, उसके सामने कोई न कोई मुसीबत आती ही रहती है. अब आप ही देखिए किसी ने उसके खिलाफ खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याजिका दायर कर दी है. इस याचिकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि बोर्ड ने खुद के लगातार सार्वजनिक संस्थान होने से इनकार किया है. साथ ही, बोर्ड ने राष्ट्रीय स्पोर्ट्स फेडरेशन के तहत मान्यता भी हासिल नहीं की है. 

जस्टिस एम सत्यनारायण और पी राजमनिकम की पीठ ने दायर इस याचिका पर बीसीसीआई को नोटिस जारी किया है. नोटिस के तहत बोर्ड से सात फरवरी तक जवाब मांगा है. बोर्ड का जवाब मिलने के बाद ही सुनवाई की नई तारीख तय की जाएगी. याचिकाकर्ता गीता रानी ने याचिका में कहा है कि बीसीसीआई तमिलनाडु में सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत एक सोसायटी के रूप में दर्ज है, लेकिन इसने संविधान के अनुच्छेद-12 के तहत बीसीसीआई ने अपने राज्य के दर्जे से इनकार किया है. 


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याचिकाकर्ता ने कहा कि यह महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पंजीकरण के समय भी बीसीसीआई द्वारा सरकार से मान्यता की कोई मांग नहीं की गई और वह खुद को क्रिकेट के संचालन की पूर्ण संस्था समझता रहा. और बिना किसी मंजूरी के ही बीसीसीआई ने भारत में क्रिकेट की पैतृक संस्था और देश के प्रतिनिधि के रूप में काम करना शुरू कर दिया. याचिकाकर्ता को मुख्य आपत्ति इस बात पर है कि बीसीसीआई को कानूनी रूप से 'भारत' शब्द के इस्तेमाल का हक नहीं है. और न ही बीसीसीआई को भारतीय टीम के प्रतिनिधि होने का हक है. याचिका में कहा गया है कि खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया कभी भी पारदर्शी नहीं रही. और इसमें हमेशा ही भेदभाव रहा. 

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गीता रानी ने कहा कि बात यह है कि बीसीसीआई को बिना सरकारी अनुमति के देश के नाम की इजाजत नहीं है. यह गैरकानूनी है. और ऐसा करने के लिए बीसीसीआई के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. याचिकाकर्ता ने कहा कि भारत में क्रिकेट का संचालन पूरी तरह से केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा किया जाना चाहिए. 



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