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क्या आप यकीन करेंगे? एक ओवर में बन सकते हैं 77 रन, मगर यह सच है...

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क्या आप यकीन करेंगे? एक ओवर में बन सकते हैं 77 रन, मगर यह सच है...

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली: जब भी एक ओवर में सबसे ज्यादा रन लगाए जाने की बात होती है तो सबसे पहले लगभग सभी क्रिकेट प्रेमी के दिमाग में 36 रन का आंकड़ा आता है। वह भी रवि शास्त्री और गैरी सोबर्स द्वारा क्रमश: तिलक राज और मल्कॉम नैश को एक ओवर में मारा गया था। 2007 टी-20 में युवराज सिंह ने भी एक ओवर में 36 रन बनाए थे। युवराज सिंह ने स्टुवर्ड ब्रॉड एक ओवर में छह छक्कों की मदद से यह कारनामा किया था। लेकिन, फर्स्ट क्लास क्रिकेट के आंकड़े बताते हैं एक ओवर सर्वाधिक रन बनाए देने यह आंकड़ा इन तीन गेंदबाजों के नाम नहीं है।

हम बात कर रहे हैं गेंदबाज बर्ट वांस की। बात फरवरी 1990 की है, शेल ट्रॉफी का फाइनल डे का मैच था। क्राइस्टचर्च के लैनचैस्टर पार्क में कैंटरबरी के खिलाफ वेलिंग्टन का मैच था। वेलिंग्टन का उस सीजन का आखिरी मैच था और वे जीत के साथ मैच का अंत करना चाहते थे। टेस्ट मैच के अंतिन दिन की सुबह वेलिंग्टन ने अपनी पारी की समाप्ति की घोषणा कर दी थी। कैंटरबरी को जीत के लिए 291 रनों की जरूरत थी और उसके पास 59 ओवर थे।

इनिंग की शुरुआत में ही कैंटरबरी को झटके लगे। पारी जैसे लड़खड़ा गई थी। हालत कुछ ऐसी हो गई थी कि 196 रनों पर आठ विकेट गिर चुके थे। लेकिन ली जर्मन और रोजर फोर्ड ने पारी को संभाला और वेलिंग्टन को लगने लगा कि मैच अब ड्रा की ओर जा रहा है।

कहा जाता है कि जर्मन, जो टीम के विकेटकीपर थे, ज्यादा अच्छे बल्लेबाज नहीं थे, स्ट्राइकिंग एंड पर थे। ऐसे में वेलिंग्टन के मॉरिसन और विकेटकीपर कैप्टन एर्व मैकस्वीने, ने मिलकर एक योजना बनाई और बर्ट वैंस का नाम सामने आया। बर्ट ने इससे पहले कभी गेंदबाजी नहीं की थी। कोई गेंदबाजी का अनुभव भी नहीं था। वे अपनी टीम के बैट्समैन थे और उनका करियर समाप्ति की ओर था। कहा जाता है कि योजना यह थी कि विपक्षी टीम को रन बनाने के लिए उकसाया जाए और ऐसे में विकेट लेकर जमी जोड़ी को तोड़ा जाए और जीत का लक्ष्य हासिल किया जाए।

आश्चर्य यह था कि बर्ट ने कप्तान की योजना का साथ दिया और गेंदबाजी करने को तैयार हो गए। कहा यह भी गया कि योजना के अनुसार विपक्षी टीम को रन बनाने का मौका दिया जाए ताकि वे जीत के लक्ष्य के करीब पहुंच सकें और जीतने की चाहत में अंतिम दो विकेट गंवा दें और मैच वेलिंग्टन के पक्ष में चला जाए।

बर्ट को सेकेंड लास्ट ओवर दिया गया था। तब कैंटरबरी को जीत के लिए 96 रनों की जरूरत थी और गेंदें थी मात्र 12... जर्मन इस समय 75 नाबाद रन पर खेल रहे थे। टीम ने 196 रन बना लिए थे और आठ विकेट जा चुके थे।

बर्ट ने गेंदबाजी शुरू की। पहली 17 गेंदें जो उन्होंने फेंकी उसमें से केवल दूसरी ही सही गेंद थी और बाकी सब नोबॉल रहीं। कई फुलटॉस बॉल भी डालीं। मॉरिसन कहते हैं कि बर्ट ने कुछ ज्यादा ही कर दिया था। मामला यही नहीं था, फील्डर भी सुस्त मोड में आ गए थे और कई बॉउंड्री गईं।

छठी गेंद पर जर्मन ने अपना शतक पूरा किया और इस ओवर कुल 77 रन बने। इसमें तीन सिंगल्स के अलावा आठ छक्के और छह चौके शामिल हैं। जर्मन ने इस ओवर में 70 रन बनाए और फोर्ड ने दो गेंदों का सामना कर पांच रन बनाए थे। इस ओवर में दो गेंदें नो बॉल रही जिनमें रन नहीं बने।

इस पूरी योजना का खास पहलू यह रहा है कि स्कोरकार्ड अपडेट करने वाले और स्कोरकार्ड लिखने वाले खूब परेशान हुए। कुछ एक बार तो यह हुआ कि उन्हें दर्शकों से पूछकर स्कोरकार्ड अपडेट करना पड़ा। यहां तक कि एंपायर को गेंदों को पढ़ने में काफी दिक्कत हुई और ओवर खत्म होने के बाद जब यह देखा गया कि कितनी गेंदें फेंकी गई तब यह सच सामने आया और अंपायरों ने केवल पांच गेंदों को ही सही करार दिया।

कहा जाता है कि असमंजस की स्थिति कुछ सामान्य हुई जब अंतिम ओवर फेंकने के लिए इवान ग्रे आए और तब तक कैंटरबरी को जीत के लिए 18 रनों की जरूरत थी और जर्मन ने पहली पांच गेंदों पर 17 रन बनाकर मैच बराबरी पर ला दिया। ये मैच रन ड्रा हुआ।

लेकिन स्कोरबोर्ड में कुछ पता नहीं चल रहा था, स्कोरर अभी भी परेशान चल रहे थे। इतना असमंजस का माहौल बन गया था कि अंपायर फोर्ड ने मैच की आखिरी गेंद से पहले मैच को रोक दिया। और सभी खिलाड़ी चेंजिंग रूम में पहुंच गए।

इसलिए कहा जाता है कि कप्तान की योजनाएं कामयाब भी होती हैं और कभी उल्टी भी पड़ जाती हैं... यहां ऐसा लगा कि योजना अपनी ओर ही नुकसान लेकर आई। मॉरिसन कहते हैं कि मैच के काफी समय बाद तक बहस होती रही। लेकिन आखिर में हमने ट्राफी जीती।

इस मैच में कुछ गेंदें और उनपर गए रन इस प्रकार रहे... बोल्ड गेंदें ही सही गेंदें मानी गईं...

देखें बॉल दल बॉल इस ओवर की प्रगति

 


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