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इन पांच सर्वश्रेष्ठ पारियों ने राहुल द्रविड़ को दिलाया "द वॉल" का तमगा

अगर यह कहा जाए कि पिछले कुछ दशकों में सचिन तेंदुलकर के बाद राहुल द्रविड़ (Happy Birth day Rahul Dravid) सबसे लोकप्रिय क्रिकेटरों में से एक रहे हैं, तो शायद एक बार को गलत नहीं ही होगा.

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इन पांच सर्वश्रेष्ठ पारियों ने राहुल द्रविड़ को दिलाया
नई दिल्ली:

भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान और महानतम खिलाड़ियों में से एक राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) शनिवार  को 47 साल के हो गए. अगर यह कहा जाए कि पिछले कुछ दशकों में सचिन तेंदुलकर के बाद राहुल द्रविड़ (Happy Birth day Rahul Dravid) सबसे लोकप्रिय क्रिकेटरों में से एक रहे हैं, तो शायद एक बार को गलत नहीं ही होगा. राहुल द्रविड़ को एक ऐसे बल्लेबाज के रूप में पहचान बनाई, जो न संकट के समय विरोधी टीमों के खिलाफ खूंटा गाड़कर मुसीबत को टालता था, बल्कि कई यादगर मैच जिताने में भी द्रविड़ (Rahul Dravid)ने अहम भूमिका निभाई. एक ऐसा बल्लेबाज, जिसे वनडे में दस हजार से ज्यादा रन बनाने के बावजूद वनडे का बल्लेबाज नहीं का गया !! लेकिन इस सबसे बेपरवार द्रविड़ (HappyBirthdayRahulDravid) ने एक के बाद एक टेस्ट में यादगार पारियां खेलते हुए 'द वॉल' का तमगा हासिल कर लिया. चलिए आपको द्रविड़ की ऐसी ही पांच पारियों के बारे में बताते हैं. 

1. कोलकाता, 2001


द्रविड़ ने अपने करियर में यूं तो 36 शतक जड़े, लेकिन इस पारी को क्रिकेटप्रेमी सबसे ज्यादा याद करते हैं और करते रहेंगे. और आखिर करें भी क्यूं न! यह वही टेस्ट था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के भारत दौरे के दूसरे टेस्ट में ईडेन गॉर्डन में टीम इंडिया फॉलोऑन खेल रही थी. लेकिन दूसरी पारी में चमत्कार हुआ. द्रविड़ ने 181 रन बनाए, तो वीवीएस ने 281. इन दोनों ने 14 मार्च को 376 रन की साझेदारी निभाई. यह इनका असर ही था कि हारता दिखाई पड़ रहा भारत मैच जीत गया. 

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2. लीड्स, साल 2002

इंग्लैंड के खिलाफ यह चार मैचों की सीरीज का तीसरा टेस्ट था. भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्ला था. और राहुल द्रविड़ ने बेहतरीन 148 रन बनाए. द्रविड़ ने 307 गेंद खेलीं और 23 चौके जड़े. वहीं, उन्होंने सचिन के साथ मिलकर 140 रन की साझेदारी भी निभाई. 

3. एडिलेड, 2003

यूं तो राहुल द्रविड़ इस दोहरे शतक से पहले भी दोहरे शतक बना चुके थे, लेकिन दिसंबर के महीने में जो उनके बल्ले से कंगारुओं के खिलाफ दूसरे टेस्ट में जो दोहरा शतक निकला, वह उनके चाहने वालों के ज़हन में समा गया. अगर टीम इंडिया यह टेस्ट जीतकर सीरीज 1-1 से ड्रॉ कराने में कामयाब रही, तो उसके पीछे राहुल द्रविड़ के 233 रनों का बड़ा योगदान रहा, जो उन्होंने 446 गेंद खेलकर व 594 मिनट टिककर बनाए. और इसने उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज भी बना दिया. 

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4. रावलपिंडी, 2004
अप्रैल के महीने में खेला गया यह पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज का आखिरी टेस्ट था. और सीरीज खत्म होते-होते राहुल द्रविड़ शोएब अख्तर एंड कंपनी की आंखों में दहशत रूपी सपना बनकर बस गए!! द्रविड़ ने ऐसी बल्लेबाजी की, जिसे यादकर पाकिस्तानी आज भी रुआंसे हो जाते हैं! द्रविड़ ने 495 गेंदें खेलकर और 740 मिनट पिच पर टिककर 270 रन बनाए.  भारत ने यह टेस्ट 131 रन से जीतने के साथ ही सीरीज भी जीत ली. 

5. ओवल, 2011

यह द्रविड़ का एक जुदा शतक था! कारण यह था कि राहुल द्रविड़ ने यह साबित किया कि वह नंबर तीन पर ही नहीं, बल्कि बतौर ओपनर भी द वॉल हैं. जी हां, द्रविड़ ने इस टेस्ट में वीरेंद्र सहवाग के साथ पारी की शुरुआत की. खास बात यह रही की टीम इंडिया 300 रन पर सिमट गयी, लेकिन द्रविड़ 146 रन बनाकर आखिर तक नाबाद रहे. 

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वास्तव में ये पांच पारियां द्रविड़ के मिजाज और उनकी बल्लेबाजी को बयां करने के लिए काफी हैं कि भारत ने दुनिया को एक ऐसा बल्लेबाज दिया, जिसकी चर्चा किए बिना क्रिकेट इतिहास पूरा नहीं होगा. द्रविड़ आपको 47वें जन्मदिन पर बहुत बहुत बधाई
 



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