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विमल मोहन की कलम से : सिडनी टेस्ट में न पेसर्स चले, न स्पिनर्स

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विमल मोहन की कलम से : सिडनी टेस्ट में न पेसर्स चले, न स्पिनर्स
नई दि्ल्ली: सिडनी टेस्ट के पहले दिन उमेश यादव ने 97 रन खर्चे, आर अश्विन ने 88 रन, भुवनेश्वर कुमार ने 67 रन, मो शमी ने 58 रन और पार्ट टाइम गेंदबाज़ सुरेश रैना ने 35 रन।

किसी भी टीम के लिए ये आंकड़ा डराने वाला साबित हो सकता है। बात सिर्फ़ ये नहीं कि सिडनी में फ़्लैट पिच पर डेविड वॉर्नर
और क्रिस रॉजर्स ने धुंआधार बल्लेबाज़ी की और वॉर्नर ने सीरीज़ में तीसरा और करियर का 12वां टेस्ट शतक पूरा कर लिया। टीम इंडिया के लिए अफ़सोसनाक यह है कि गेंदबाज़ एक बार फिर फीके दिखे और बेहद खर्चीले भी साबित हुए।

टीम इंडिया ने पहले दिन पांच गेंदबाज़ों का इस्तेमाल किया। टीम इंडिया के सभी गेंदबाज़ों ने तीन रन प्रति ओवर की दर से ज़्यादा रन खर्चे। उमेश यादव ने तो 16 ओवर में 97 रन खर्च कर दिए।

पहले दिन कामयाबी भी सिर्फ़ आर अश्विन और मो. शमी को ही मिली। भारतीय टीम की ये मुश्किल नई नहीं है, तेज गेंदबाज़ों
को पूरे सीरीज़ में जितनी मुश्किलें पेश आई हैं, उस पर काफ़ी चर्चा हो चुकी है।

मुश्किल यह है कि पिछले तीन साल में भारतीय स्पिनर्स भी नाकाम साबित हुए हैं। यानी तेज़ गेंदबाज़ी करना टीम इंडिया की मुश्किल तो बनी ही हुई है। स्पिन गेंदबाज़ी, जो कभी टीम इंडिया की ताक़त होती थी, आंकड़ों के लिहाज़ से दुनिया में सबसे फ़िसड्डी साबित हो रही है। ज़रा इन आंकड़ों पर ग़ौर फ़रमाएं जो सिडनी टेस्ट के दौरान टीवी पर बार-बार दिखाए जा रहे हैं :
 

2011 के बाद स्पिनर्स का प्रदर्शन (एशिया के बाहर)
क्रमांक टीम औसत
1  पाकिस्तान 22.2
2 वेस्टइंडीज 32.0
3 ऑस्ट्रेलिया 34.9
4 इंग्लैंड 39.4
5 ज़िम्बाब्वे 40.7
6 बांग्लादेश 42.6
7 श्रीलंका 43.3
8 दक्षिण अफ्रीका 44.2
9 न्यूजीलैंड 46.0
10 भारत 52.5 (सौजन्य स्टार क्रिकेट)

यानि टेस्ट खेलने वाले देश की लिस्ट में भारत का नंबर बांग्लादेश और ज़िम्बाब्वे जैसी टीमों के भी बाद आख़िरी नंबर पर आता है। टीम मैनेजमेंट के लिए ये फ़िक्र बढ़ानेवाली बात है। ज़ाहिर है बीसीसीआई को भी अपनी योजनाओं को लेकर फिर विचार करना होगा।

एक वक्त था जब टीम इंडिया एक-दो नहीं चार स्पिनर्स के साथ मैदान पर उतरती थी और जीत भी हासिल करती थी। 1981 में हुए मेलबर्न टेस्ट के दौरान टीम इंडिया ने कप्तान बिशन सिंह बेदी की अगुआई में मेज़बान ऑस्ट्रेलिया को 222 रनों से शिकस्त दी थी। उस टेस्ट में भारतीय टीम ने बिशन सिंह बेदी (बांये हाथ के स्पिनर), एरापल्ली प्रसन्ना (दांये हाथ के ऑफ़ स्पिनर) और भागवत चंद्रशेखर (लेग स्पिनर) ने 18 विकेट झटके।

भारतीय क्रिकेट इतिहास में ऐसे और भी कई उदाहरण हैं। मौजूदा दौर में भारतीय टीम पेसर्स या स्पिनर्स को ताक़त बनाकर नहीं खेल रही। शायद कुछ टी-20 का असर है तो कुछ खिलाड़ियों के रवैये का। लेकिन इन सबका नुकसान भारतीय क्रिकेट को लगातार होता ज़रूर दिखाई दे रहा है।


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