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विराट कोहली ने छोड़ा था ब्रेंडन मैक्क्लम का कैच, फिर 'बाज़' ने जड़ दिया तिहरा शतक, अब भी सता रहा गम!

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विराट कोहली ने छोड़ा था ब्रेंडन मैक्क्लम का कैच, फिर 'बाज़' ने जड़ दिया तिहरा शतक, अब भी सता रहा गम!

मोहाली में विराट कोहली ने 154 की मैच विजयी पारी खेली (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. कोहली के कैच छोड़ने से 2014 में कीवी टीम से टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया
  2. टीम इंडिया के हाथ से मैच जीतने का सुनहरा अवसर चला गया
  3. यह टेस्ट जीतने पर टीम इंडिया कीवी धरती पर सीरीज में कर लेती बराबरी
नई दिल्ली:

न्यूजीलैंड के खिलाफ मोहाली वनडे में विराट कोहली लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया को जिताकर ही लौटे, लेकिन वह ऐसा किस्मत का साथ मिलने के कारण ही कर पाए. वैसे भी क्रिकेट में किस्मत का अहम रोल होता है, क्योंकि कई बार कोई भी बल्लेबाज आमतौर पर जिस तरह की गेंद पर आसानी से छक्का या चौका लगा देता है, उसी पर किस्मत साथ नहीं होने पर विकेट भी खो बैठता है. कुछ ऐसा ही विराट कोहली के साथ हुआ, जब उनकी किस्मत ने साथ दिया और न्यूजीलैंड के एक बड़े खिलाड़ी ने उनका आसान-सा कैच टपका दिया. इसके बाद मैच के परिणाम से तो आप वाकिफ ही हैं. जहां तक कैच छोड़ने की बात है, तो दिन खराब होने पर अच्छे से अच्छा फील्डर भी गलती कर जाता है और ऐसा खुद विराट कोहली के साथ भी हो चुका है, तभी तो उन्होंने मोहाली वनडे में उनका कैच छोड़ने वाले रॉस टेलर के प्रति सहानुभूति जताई.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि विराट कोहली ने कैच छोड़ने की गलती न्यूजीलैंड के खिलाफ ही टेस्ट मैच में की थी और जहां खुद का कैच छोड़ने पर उन्होंने शतक लगाया, वहीं उनकी गलती के कारण कीवी टीम के एक खतरनाक बल्लेबाज ने तिहरा शतक लगा दिया था. कोहली को दो साल बाद भी वह घटना याद है. हम आपको बताने जा रहे हैं कि विराट कोहली की गलती टीम इंडिया पर कितनी भारी पड़ी थी और न्यूजीलैंड के किस बल्लेबाज ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था...
 
पहले टीम इंडिया की जीत की उम्मीद बंधी, फिर...
बात फरवरी, 2014 के टीम इंडिया के न्यूजीलैंड दौरे की है. टीम इंडिया दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 से पीछे चल रही थी और वह सीरीज में वापसी की उम्मीदों के साथ वेलिंगटन पहुंची थी. तेज विकेट पर कप्तान एमएस धोनी ने टॉस जीता और न्यूजीलैंड को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया. भारतीय तेज गेंदबाजों ने उनके फैसले के सही साबित करते हुए कीवी टीम को पहली पारी में 192 रन पर ही समेट दिया, जिसमें तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा ने 6, तो मोहम्मद शमी ने 4 विकेट चटकाए और मैच में टीम इंडिया की पकड़ मजबूत कर दी.


पहली पारी में टीम इंडिया ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए शिखर धवन के 98, अजिंक्य रहाणे के शतक और एमएस धोनी 68 रन की मदद से 438 रन बनाकर पहली पारी में 246 रन की बढ़त हासिल कर ली.

विराट की गलती, जीत की उम्मीदों पर फिर गया पानी
पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल कर चुकी टीम इंडिया को देखकर ऐसा लगने लगा था कि वह इस मैच को जीत कर सीरीज में बराबरी कर लेगी और हार से बच जाएगी. गेंदबाजों ने दूसरी पारी में भी कीवी टीम की शुरुआत बिगाड़ दी और 52 रन पर ही उनके 3 विकेट झटक लिए. फिर आए कप्तान ब्रेंडन मैक्क्लम (Brendon McCullum) और उनके साथ थे टॉम लाथम. मैक्क्लम ने 32 गेंदों में 9 रन बनाए थे और कुछ संघर्ष करते दिख रहे थे. ब्रेंडन मैक्क्लम ने 28वें ओवर में मोहम्मद शमी की पहली ही गेंद पर तेज ड्राइव लगाने की कोशिश की, लेकिन फुल लेंथ की गेंद को टाइम नहीं कर पाए और सिली-मिड-ऑन पर खड़े विराट कोहली तक गेंद पहुंच गई. कोहली ने अपने बाएं हाथ से गेंद को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन गेंद छिटक गई. ब्रेंडन मैक्क्लम जैसे बल्लेबाज के लिए यह जीवनदान खतरनाक साबित हुआ...

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मैक्क्लम, जो अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे, भला कहां चूकने वाले थे. उन्होंने विराट कोहली की इस गलती का भरपूर फायदा उठाया और टीम को हार की स्थिति से निकालकर ले गए. उन्होंने 559 गेंदों का सामना किया और 32 चौके व 4 छक्कों की मदद से 302 रन बनाए. इस प्रकार कीवी टीम ने पहली पारी की टीम इंडिया की 246 रन की बढ़त को पूरा करते हुए उसे 435 रन का लक्ष्य दे दिया, लेकिन दूसरी पारी में उसे 52 ओवर ही खेलने को मिले और मैच ड्रॉ हो गया. हालांकि विराट ने शतक भी बनाया, लेकिन वह बेकार गया, क्योकि टीम इंडिया सीरीज में बराबरी नहीं कर पाई.

मोहाली वनडे के बाद विराट ने अपनी गलती को याद किया
कैच छूटने के बाद मोहाली वनडे में टीम इंडिया की ओर से शतक लगाकर जीत दिलाने वाले विराट कोहली ने मैच के बाद रॉस टेलर के प्रति सहानुभूति जताई. उन्होंने कहा, 'मैं भी इस स्थिति से गुजर चुका हूं. मैंने ब्रेंडन मैक्‍कलम का कैच छोड़ा था और उन्‍होंने वेलिंगटन में तिहरा शतक जमा दिया था'. जाहिर है कैच छूटने के बाद यदि कोई बल्लेबाज शतक बना दे या मैच में जीत ही दिला दे, तो वह स्थिति कैच छोड़ने वाले खिलाड़ी के लिए बेहद असहज होती है और ऐसा ही कुछ टेलर भी महसूस कर रहे होंगे.



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