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Under19 WorldCup 2018: फाइनल मैच कल, पृथ्‍वी शॉ की भारतीय टीम इन 5 कारणों से मानी जा रही खिताब की दावेदार

ICC Under19 WorldCup अपने अंतिम पड़ाव पर है. प्रतियोगिता के फाइनल में पृथ्‍वी शॉ के नेतृत्‍व वाली भारतीय टीम का मुकाबला शनिवार को ऑस्‍ट्रेलियाई टीम से होगा.

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Under19 WorldCup 2018: फाइनल मैच कल, पृथ्‍वी शॉ की भारतीय टीम इन 5 कारणों से मानी जा रही खिताब की दावेदार

भारतीय टीम ने अंडर19 वर्ल्‍डकप के अपने सभी मैच बेहद आसानी से जीते हैं

नई दिल्‍ली: ICC Under19 WorldCup अपने अंतिम पड़ाव पर है. प्रतियोगिता के फाइनल में पृथ्‍वी शॉ के नेतृत्‍व वाली भारतीय टीम का मुकाबला शनिवार को ऑस्‍ट्रेलियाई टीम से होगा. टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने अब तक जैसा धमाकेदार प्रदर्शन किया है, उसे देखते हुए टीम को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. वैसे भी भारत अब तक तीन बार अंडर19 वर्ल्‍डकप में चैंपियन रह चुका है जबकि दो बार उपविजेता रहकर संतोष करना पड़ा था. वर्ष 2016 में इस प्रतियोगिता के फाइनल में भारतीय टीम को फाइनल में वेस्‍टइंडीज के हाथों हारकर खिताब से वंचित होना पड़ा था. जाहिर है, टीम इस बार यह मौका हाथ से नहीं गंवानी चाहेगी. भारतीय टीम को इन 5 कारणों से खिताब का दावेदार माना जा रहा है...

पहले ही मैच में ऑस्‍ट्रेलिया को बड़े अंतर से हरा चुका है भारत
टूर्नामेंट में भारत ने अपना पहला मुकाबला 14 जनवरी को ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ ही खेला था. भारतीय टीम ने इस मैच में ऑस्‍ट्रेलिया को खेल के हर क्षेत्र में पछाड़ते हुए 100 रन से जीत हासिल की थी.  पहले बल्‍लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 50 ओवर में 7 विकेट पर 328 रन का बड़ा स्‍कोर बनाया था. बाद में भारतीय गेंदबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते ऑस्‍ट्रेलिया को 228 रन पर समेट दिया था. जाहिर है, टूर्नामेंट के पहले मैच में ऑस्‍ट्रेलिया को हराने के कारण पृथ्‍वी शॉ की टीम का मनोबल ऊंचा होगा. फाइनल मैच उसी माउंट मॉनगनई मैदान पर आयोजित होगा जहां भारतीय टीम ने 14 जनवरी के मैच में ऑस्‍ट्रेलिया को हराया था.

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टीम इंडिया ने सभी मैचों में हासिल की है एकतरफा जीत
इस बार प्रतियोगिता में उतरी भारतीय टीम को बेहद संतुलित बताया जा रहा है. टीम ने फाइनल तक के सफर में पांच मैच खेले हैं और सभी में एकतरफा अंतर से जीत हासिल की है. भारतीय टीम ने ऑस्‍ट्रेलिया को पहले मैच में 100 रन से हराने के बाद अगले मैचों में पापुआ न्‍यू गिनी और जिम्‍बाब्‍वे को 10-10 विकेट से हराया था. टूर्नामेंट के क्‍वार्टर फाइनल में भारत ने बांग्‍लादेश को 131 रन से हराया था. भारतीय टीम का सेमीफाइनल में मुकाबला प्रबल प्रतिद्वंद्वी पाकिस्‍तान से हुआ था. खेलप्रेमियों को यह मैच रोमांचक होने की उम्‍मीद थी लेकिन हुआ इसके उलट. भारतीय युवाओं के आगे पाकिस्‍तान की टीम टिक नहीं पाई और 203 रन के बड़े अंतर से मैच हार गई थी. प्रतियोगिता के अपने मैचों में यह शानदार प्रदर्शन भारत की चैंपियन बनने की दावेदारी को मजबूत बनाता है. 2012 में ऑस्‍ट्रेलिया को हराकर ही चैंपियन बना था भारत
भारतीय टीम पिछली बार वर्ष 2012 में आईसीसी अंडर19 वर्ल्‍डकप चैंपियन बनी थी. खास बात यह है कि तब टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने ऑस्‍ट्रेलिया को ही कराया था. उन्‍मुक्‍त चंद की अगुवाई में भारतीय टीम ने उस समय फाइनल मैच 6 विकेट से जीता था. इस मैच में भारतीय टीम ने ऑस्‍ट्रेलिया को 50 ओवर में 225 के स्‍कोर पर सीमित कर दिया था और बाद में कप्‍तान उन्‍मुक्‍त चंद के नाबाद शतक (111 रन) के सहारे लक्ष्‍य महज 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया था. आईसीसी जूनियर वर्ल्‍डकप की पिछली खिताबी जीत भारतीय टीम को प्रेरित करेगी.

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भारतीय गेंदबाजों और बल्‍लेबाजों का शानदार प्रदर्शन
प्रतियोगिता में भारतीय टीम हर क्षेत्र में विपक्षी टीमों पर भारी पड़ी है. बल्‍लेबाजी में शुभमन गिल, कप्‍तान पृथ्‍वी शॉ, और मनजोत कालरा ने बल्‍ले से खूब रन बटोरे हैं. शुभमन ने टूर्नामेंट के पांच मैचों की चार पारियों में दो बार नाबाद रहते हुए 341 और पृथ्‍वी शॉ ने इतने ही मैचों की चार पारियों में एक बार नाबाद रहते हुए 232 रन बनाए हैं. गेंदबाजी में अनुकूल राय ने सर्वाधिक 12 विकेट लिए हैं जबकि शिवम मावी और कमलेश नागरकोटी ने छह-छह विकेट हासिल किए हैं.

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नागरकोटी और शिवम मावी की लगातार 140+ गेंदबाजी
टूर्नामेंट में अपनी तेज रफ्तार से भारत के कमलेश नागरकोटी और शिवम मावी ने हर किसी की प्रशंसा हासिल की है. ये दोनों तेज गेंदबाज लगातार 140 किमी प्रति घंटा से अधिक की गति से गेंद फेंकने में सक्षम हैं. इनकी गेंदों के आगे विपक्षी बल्‍लेबाज अब तक संघर्ष करते नजर आए हैं. किसी भी भारतीय टीम के दो गेंदबाजों का इतनी रफ्तार से गेंद फेंकना हर किसी को हैरान कर रहा है. ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ पिछले मुकाबले में तो नागरकोटी ने 149 किमी प्रति घंटे की रफ्तार की गेंद फेंकी थी. फाइनल में कल ये दोनों गेंदबाज, ऑस्‍ट्रेलियाई बल्‍लेबाजों की कठिन परीक्षा ले सकते हैं.


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