World Cup 2019: भारतीय गेंदबाजों से निपटने के लिए ऑस्‍ट्रेलिया के डेविड वार्नर ने अपनाया यह खास तरीका..

World Cup 2019: भारतीय गेंदबाजों से निपटने के लिए ऑस्‍ट्रेलिया के डेविड वार्नर ने अपनाया यह खास तरीका..

World Cup 2019: ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज डेविड वार्नर

खास बातें

  • अपने बल्ले पर सेंसर का उपयोग कर रहे वार्नर
  • इससे पहले अपने दोनों मैच जीत चुकी है ऑस्ट्रेलिया टीम
  • सेंसर जरिये बुमराह की बल्लेबाजी का सामना करने में मिलेगी मदद
लंदन:

World Cup 2019: वर्ल्ड कप 2019 (World Cup 2019) में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया का अगला मुकाबला भारत (AUS vs IND) से हो रहा है. ऑस्ट्रेलिया टीम (Australia Cricket team) इससे पहले अपने दोनों मुकाबले जीत चुकी है. एक बार फिर चैंपियन बनने के इरादे से उतरी ऑस्ट्रेलिया टीम अपनी तैयारी में जी-जान से जुटी हुई है. ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर (David Warner) भी वर्ल्ड कप के आगे के कड़े मुकाबलों की तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. इसके लिये वह अपने बल्ले पर नये उपकरण का उपयोग कर रहे हैं, जो कि एक सेंसर है. इसमें बैकलिफ्ट के कोण से लेकर बल्ले की अधिकतम गति जैसे आंकड़े दर्ज रहते हैं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2017 में बल्ले पर सेंसर लगाने के लिये मंजूरी प्रदान की थी, लेकिन आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज को छोड़कर पिछले दो वर्षों में किसी ने इसका उपयोग नहीं किया.

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बेंगलुरू स्थित कंपनी 'स्मार्ट क्रिकेट' ने बल्ले के सेंसर के लिये एक खास चिप तैयार की है, जिसका उपयोग वार्नर (David Warner) कर रहे हैं. ताकि उन्हें जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) जैसे गेंदबाजों का सामना करने में मदद मिले. सेंसर चिप बल्ले के हैंडल के ऊपर लगायी जाती है. बल्लेबाज जब तक बल्लेबाजी कर रहा होता है तब तक के चिप जो भी आंकड़े हासिल करती है वे 'क्लाउड स्टोरेज' के जरिये मोबाइल ऐप में संग्रहीत हो जाते हैं. वार्नर को बल्ले के सेंसर से मिले आंकड़ों से बुमराह जैसे गेंदबाजों का सामना करने के लिये कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं. जैसे कि बुमराह की यार्कर का सामना करने के लिये बल्ले की अधिकतम गति कितनी होनी चाहिए.

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उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बल्ले की गति 70 से 75 किमी होनी चाहिए, लेकिन वार्नर अपने बल्ले को 85 से 90 किमी की गति से उठाने का प्रयास कर रहे हैं. बुमराह जैसे स्लिंगर के लिये बैकलिफ्ट का कोण लगभग 120-125 के आसपास होना चाहिए और बल्ला पहली स्लिप की तरफ से नीचे आना चाहिए, लेकिन भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar) के सामने बैकलिफ्ट विकेटकीपर की लाइन में होनी चाहिए. स्पिनरों के लिये बैकलिफ्ट का कोण न्यूनतम 160 डिग्री तथा अधिकतम 175 डिग्री होना चाहिए. भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज दीप दासगुप्ता (Deep Dasgupta) ने कहा, 'पहले कोच बैकलिफ्ट के कोण या बल्ले की गति या बल्ले और शरीर के बीच दूरी के लिये अपने नैसर्गिक कौशल का उपयोग करते थे. मेरा मानना है कि अगर सटीक आंकड़े कोच की मदद कर सकते हैं तो इनका उपयोग किया जाना चाहिए.' वर्तमान में भारत का कोई भी खिलाड़ी बल्ले पर सेंसर का उपयोग नहीं कर रहा है जो निकट भविष्य में बल्लेबाजों के लिये उपयोगी साबित हो सकता है. (इनपुट: भाषा)

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