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डेटा चुराकर नई कंपनी बनाने और झूठा केस करने के आरोप में एक अमेरिकी समेत दो लोगों पर मुकदमा दर्ज

हैरानी की बात यह रही कि यह केस फिल ऑल्पे की शिकायत पर दर्ज हुआ, जबकि वह मुकदमा दर्ज करवाने के लिए भारत आया ही नहीं था.

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डेटा चुराकर नई कंपनी बनाने और झूठा केस करने के आरोप में एक अमेरिकी समेत दो लोगों पर मुकदमा दर्ज

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली:

एक कंपनी का गोपनीय डेटा चुराकर अपनी नई कंपनी खड़ी करने और पैसे ऐंठने के लिए झूठी एफआईआर दर्ज करवाने के आरोप में एक अमेरिकी नागरिक समेत दो लोगों के खिलाफ थाना सेक्टर 20 में शनिवार को मुकदमा दर्ज किया गया. इस मामले में आरोप है कि थाना सेक्टर 20 के तत्कालीन एसएचओ मनोज कुमार पंत और एक स्थानीय पत्रकार के साथ मिलकर उन दोनों ने कंपनी को बदनाम करने के लिए यह कदम उठाया.  थाना सेक्टर 20 के प्रभारी निरीक्षक राजवीर सिंह चौहान ने बताया कि सेक्टर 2 में मेंटिस कंसलटिंग और माई माइंड इंफोटेक कंपनी है. यह कंपनी सॉफ्टवेयर बनाकर सप्लाई का काम करती है. कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि हिमांशु खत्री की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी विवेक अखिल को सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में नियुक्त किया गया था. कैलिफोर्निया निवासी फिल आल्पे वर्ष 2006 से 15 तक कंपनी का क्लाइंट रहा और करीब 6 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए. विवेक अखिल ने मार्च 2015 में मेंटिस कंपनी छोड़कर अपनी वेब माइंड इंफोटेक कंपनी बना ली. 

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इसके बाद फिल आल्पे ने मेंटिस कंपनी के साथ अनुबंध खत्म कर विवेक अखिल की कंपनी के साथ नाता जोड़ लिया. उन्होंने बताया कि इसके बाद विवेक अखिल ने जनवरी 2016 में मेंटिस कंपनी के एक कर्मचारी राणा रंजन के जरिए कंपनी का गोपनीय डेटा चुरा लिया. जिसके बाद 26 जनवरी 2016 को मेंटिस कंपनी की ओर से विवेक अखिल, फिल आल्पे और रईस अंसारी के खिलाफ थाना सेक्टर 20 में शिकायत दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके अलावा फिल ऑल्पे पर बकाया 1 लाख 99 हजार 275 डॉलर के लिए कई बार नोटिस भेजे गए लेकिन वे भी नहीं मिले. आरोप है कि फिल आल्पे, विवेक अखिल, एक स्थानीय रिपोर्टर और एसएचओ सेक्टर 20 मनोज पंत ने साजिश रचकर 14 नवंबर 2018 को मेंटिस कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. 

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फिल आल्पे की ओर से दर्ज हुई शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनसे पूरा पैसा लेने के बावजूद घटिया क्वालिटी के सॉफ्वेटयर सप्लाई किए गए. हैरानी की बात यह रही कि यह केस फिल ऑल्पे की शिकायत पर दर्ज हुआ, जबकि वह मुकदमा दर्ज करवाने के लिए भारत आया ही नहीं था. केस दर्ज होने के बाद पुलिस वालों ने अपने संपर्कों के जरिए मामला खत्म करने के लिए पैसों की कथित मांग की और मांग पूरी न होने पर मेंटिस कंपनी के एक कर्मचारी को कथित तौर पर बिना सबूत के गिरफ्तार कर लिया.  थाना प्रभारी ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है. उन्होंने बताया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. 

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इनपुट : भाषा


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