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भोपाल गैंगरेप में नया मोड़: पहली मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप के बजाए 'आपसी सहमति' बताने पर मचा बवाल

भोपाल में यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा से गैंगरेप मामले में एक और चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है.

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भोपाल गैंगरेप में नया मोड़: पहली मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप के बजाए 'आपसी सहमति' बताने पर मचा बवाल

भोपाल गैंगरेप आरोपी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. भोपाल गैंगरेप मामले में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही.
  2. पहली मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप के बजाए 'आपसी सहमति' बताने पर बवाल.
  3. दूसरी बार मेडिकल परीक्षण में गैंगरेप की पुष्टि हुई है.
भोपाल: भोपाल में यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा से गैंगरेप मामले में एक और चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है. पीड़िता की पहली मेडिकल रिपोर्ट में इसे गैंगरेप के बजाए 'आपसी सहमति' बताया गया है. गैंगरेप पीड़िता का पहला मेडिकल परीक्षण सुल्तानिया अस्पताल में किया गया था. यहां जिस महिला डॉक्टर ने पीड़िता का चेकअप किया था, उसने अपनी रिपोर्ट में गैंगरेप के बजाए आपसी सहमति से बनाए गए रिश्ते का जिक्र किया था. इस मामले में बवाल मचने के बाद पीड़िता का दूसरी बार मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें गैंगरेप की पुष्टि हुई है.

रिपोर्ट में इतनी लापरवाही बरती गई कि रिपोर्ट को पीड़ित की जगह आरोपी के हवाले से लिख दिया गया. मामला सुर्खियों में आया तो पीड़ित का दूसरी बार मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें गैंगरेप की पुष्टि हुई है. अस्पताल गलती करने वाली डॉक्टर को ट्रेनिंग देने की बात कह रहा है, लेकिन ये नहीं बता पाया कि डॉक्टर नतीजे पर कहीं टू फिंगर टेस्ट से तो नहीं पहुंचे, जिसे अवैज्ञानिक और अमानवीय करार दिया जा चुका है.

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सुल्तानिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ करण पीपरे ने कहा कि डॉ. खुशबू जो आरएमओ हैं, उन्होंने रिपोर्ट तैयार की है. आरोपी मानवीय भूल से लिखा गया, जिसे हमने फौरन ठीक करवा दिया है. अब नये डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी जाएगी. सर्कुलर जारी हो गये हैं.
  
चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरद जैन ने कहा है कि किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा लेकिन कांग्रेस को लगता है कि डॉक्टर के खिलाफ तो मामला दर्ज होना ही चाहिये. गृहमंत्री को भी उनके पद से हटाया जाना चाहिये. मध्यप्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के के मिश्रा ने कहा कि नैतिकता के नाते सारी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की है. वो संवेदनशील हैं तो उन्हें गृहमंत्री से इस्तीफा लेना चाहिये. डॉक्टर की भी डिग्री रद्द कर देनी चाहिये.

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बता दें कि 31 अक्टूबर की देर शाम भोपाल में यूपीएससी की कोचिंग कर रही 19 साल की छात्रा के साथ चार आरोपियों ने गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया था. घटना हबीबगंज आरपीएफ चौकी के पास हुई. पीड़िता ने परिजनों के साथ खुद एक आरोपी को पकड़ा और पुलिस के हवाले किया. इसके बावजूद मामले में एफआईआर दर्ज करने में पुलिस ने 11 घंटे से ज्यादा का वक्त लिया. बाद में इस मामले में कार्रवाई की गाज 10 पुलिस अधिकारियों पर गिरी. 

VIDEO - भोपाल गैंगरेप के मेडिकल रिपोर्ट पर उठे सवाल
 


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