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अंधविश्वास ने ली बच्चे की जान: 10 दिन से था बुखार, इलाज के लिए हकीम ने लोहे की छड़ से दागा

लोहे की छड़ से दागे जाने के चार दिन बाद एक वर्ष के बच्चे की अहमदाबाद के एक अस्पताल में रविवार को मौत हो गई. यह जानकारी चिकित्सकों ने दी. विपुल नाम के बच्चे को बनासकांठा जिले के वाव तहसील के वासेदा गांव में एक नीम हकीम ने बुधवार को दागा था.

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अंधविश्वास ने ली बच्चे की जान: 10 दिन से था बुखार, इलाज के लिए हकीम ने लोहे की छड़ से दागा

प्रतीकात्मक तस्वीर

खास बातें

  1. अंधविश्वास ने ली बच्चे की जान
  2. बच्चे को था 10 दिन से बुखार
  3. हकीम ने लोहे की छड़ से दागा था
गुजरात:

लोहे की छड़ से दागे जाने के चार दिन बाद एक वर्ष के बच्चे की अहमदाबाद के एक अस्पताल में रविवार को मौत हो गई. यह जानकारी चिकित्सकों ने दी. विपुल नाम के बच्चे को बनासकांठा जिले के वाव तहसील के वासेदा गांव में एक नीम हकीम ने बुधवार को दागा था. दीसा के एक अस्पताल में चिकित्सक ने बताया कि गांवों में नीम हकीमों द्वारा दागे जाने का इस्तेमाल बुखार और कुछ अन्य चिकित्सकीय स्थितियों में पारंपरिक इलाज के तौर पर किया जाता है. 

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बच्चे को अहमदाबाद स्थित अस्पताल स्थानांतरित करने से पहले उसका इलाज कुछ समय के लिए दीसा के इसी अस्पताल में किया गया था. उन्होंने कहा कि विपुल को पिछले दस दिन से बुखार था. गांव के हकीम ने उसके बाएं हाथ पर लोहे की छड़ से दागा. चिकित्सक ने कहा, ‘‘बच्चे को न्यूमोनिया था. लोहे की छड़ से दागे जाने के बाद उसकी स्थिति बिगड़ गई. हमने उसे अहमदाबाद के राजस्थान अस्पताल रेफर कर दिया.''

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राजस्थान अस्पताल के चिकित्सक गौतम जैन ने इसकी पुष्टि की कि जलने के घाव में संक्रमण के चलते बच्चे की मौत हुई. डॉ. जैन ने कहा, ‘‘(दागने की) अंधविश्वासी प्रथा राज्य के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी प्रचलन में है.''

(इनपुट भाषा से)



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