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सीएसडी कैंटीन के स्टिकर लगाकर बेची जा रही थी तस्करी की शराब, गिरोह धरा गया

हरियाणा से तस्करी कर दिल्ली लाई जा रही शराब पर से असली स्टिकर निकालकर सीएसडी कैंटीन के स्टिकर लगाए जाते थे

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सीएसडी कैंटीन के स्टिकर लगाकर बेची जा रही थी तस्करी की शराब, गिरोह धरा गया

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी.

खास बातें

  1. आर्मी कैंटीन की शराब की मांग होने से किया गोरखधंधा
  2. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बिंदापुर इलाके में पकड़ा
  3. शराब का धंधा 3-4 साल से कर रहे तीन आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली:

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गैंग को पकड़ा है जो सीएसडी कैंटीन के स्टिकर लगी शराब बेचता था. हालांकि यह शराब आर्मी कैंटीन की बजाय हरियाणा से तस्करी कर लाई जा रही थी. दिल्ली के एक गोदाम में उनके असली स्टिकर निकालकर सीएसडी के स्टिकर लगाए जाते थे.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जब दिल्ली के बिंदापुर इलाके से एक कार में शराब की ये खेप पकड़ी तो वो बोतल के ऊपर लगे सीएसडी स्टिकर देखकर हैरान रह गई. पुलिस को लगा कि आर्मी कैन्टीन में सप्लाई होने वाली शराब अवैध तरीके से बाहर बेची जा रही है. इसके बाद बिंदापुर के एक गोदाम पर छापा मारा तो शराब की बड़ी खेप बरामद हुई. हालांकि ये पूरी शराब आर्मी कैंटीन की नहीं थी.

डीसीपी क्राइम राजेश देव ने बताया कि यह शराब हरियाणा से लेकर आते थे, सीएसडी कैंटीन से नहीं. सीएसडी कैंटीन वाला स्टिकर उस पर लगाते थे. पुलिस ने शराब के साथ रवींद्र, पम्मी और धर्मपाल को गिरफ्तार किया है. अवैध शराब के धंधे में पम्मी और धर्मपाल पार्टनर हैं जबकि रवींद्र कार से ग्राहकों तक शराब पहुंचाने का काम करता था.


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हरियाणा से लाई जाने वाली इस शराब में सीएसडी कैंटीन स्टिकर के अलावा असली शराब की तरह बार कोड भी लगाए जाते थे. राजेश देव ने बताया कि आरोपी शराब की बोतल को पानी में डालते थे. उसका असली स्टिकर निकल जाता था. फिर सीएसडी लिखा स्टिकर हेयर ड्रायर की सहायता से चिपका देते थे.

पुलिस के मुताबिक ये गैंग इस तरह के सीएसडी स्टिकर लगी शराब का धंधा पिछले 3-4 साल से कर रहे हैं. आर्मी कैंटीन की शराब की काफी डिमांड होती है इसलिए इन्होंने ये काम शुरू किया था.



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