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नकली डॉक्टर; नकली दवा और नकली इलाज भी, तीन गिरफ्तार

नकली दवाइयों को देशी और आयुर्वेदिक बताकर इलाज़ करने और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाला गिरोह पकड़ा गया

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नकली डॉक्टर; नकली दवा और नकली इलाज भी, तीन गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आरोपी.

खास बातें

  1. दिल्ली के अलावा सूरत, वडोदरा, पुणे और इंदौर में भी ठगा
  2. दिल्ली के आसफ अली रोड पर खोला था सांईनाथ आयुर्वेदिक भंडार
  3. कैंसर, एड्स, दिल की बीमारियों के पीड़ितों को फंसाया जाता था जाल में
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गैंग को पकड़ा है जिसके सदस्य नकली दवाइयों को देशी और आयुर्वेदिक दवा बताकर लोगों का इलाज़ करते थे और मरीजों की जान से खिलवाड़ करते थे. लोगों को ठगने वाले इन लोगों के पास से पुलिस ने बड़ी मात्रा में मिलावटी और नकली दवाएं बरामद की हैं. इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

मध्य दिल्ली के डीसीपी एमएस रंधावा के मुताबिक सरोजिनी नगर के रहने वाले ललित मंडल ने शिकायत दी थी. मंडल के अनुसार उनका डेढ़ साल का बेटा शिवम जन्म से ही ज्वाइंडिश से पीड़ित है. उसका एम्स में इलाज चल रहा है और वह इलाज पर करीब दो लाख रुपये खर्च कर चुके हैं. इसके बावजूद तबियत में कोई सुधार नहीं हुआ. 27 अगस्त को उन्हें एम्स के बाहर अर्जुन नाम का शख्स मिला. उसने बताया कि उसका बेटा आयुर्वेदिक दवा से बिल्कुल ठीक हो जाएगा.

अर्जुन ललित मंडल को आसफ अली रोड के वर्धमान प्लाजा के सांईनाथ आयुर्वेदिक भंडार में ले गया. वहां तीन लोग बैठे थे जिनमें से एक ने खुद को डॉक्टर बताया. उसने जल्दी से शिवम को देखकर एक स्टील के डिब्बे में भस्म दे दिया और बताया कि चार महीने तक यह दवा खानी है. उसके बाद शिवम बिल्कुल ठीक हो जाएगा. दवा के कुल 65 हजार रुपये वसूले गए. लेकिन दवा की कीमत और इलाज़ का तरीका देखकर शिवम के पिता को शक हुआ और उन्होंने चांदनीमहल थाने में शिकायत दर्ज करा दी.

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दिल्ली पुलिस ने 30 अगस्त को इस अस्पताल में छापेमारी की और मुजामिल, रवि यल्लाप्पा और  मनोज गोविंद शिर्के नाम के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया. पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि वे असाध्य बीमारियों का इलाज पिछले छह महीने से बड़े पैमाने पर कर रहे हैं. दिल्ली के अलावा सूरत, वडोदरा, पुणे और इंदौर में ये लोग ऐसे ही लोगों को ठग रहे थे.

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सबसे पहले वे बड़े अस्पतालों जैसे एम्स, गंगाराम, मैक्स और इसके अलावा धार्मिक स्थलों में अपने एजेंट तैनात करते थे. एजेंट कैंसर, एड्स, दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों से संपर्क करते थे और फिर उन्हें क्लीनिक तक लाते थे. आरोपी हर मरीज़ को चार महीने की दवा देते थे और उनसे लाखों रुपये वसूलते थे. वे यह भी कहते थे कि मरीज ठीक नहीं हुआ तो पैसे वापस कर दिए जाएंगे.

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आरोपी मुजामिल खुद को डॉक्टर, जबकि मनोज खुद को आयुर्वेदिक भंडार का मालिक बताता था. आरोपी रवि मरीजों का ब्रेनवाश करने में माहिर था.

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VIDEO : नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश

ये लोग एक शहर में 3-4 महीने ही क्लीनिक चलाते थे और उसके बाद नए शहर में काम शुरू कर देते थे. वे हर रोज 30 से 40 मरीजों के साथ ठगी करते थे. पुलिस ने क्लीनिक से बड़ी मात्रा में नकली देशी दवाएं बरामद की हैं.


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