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फ़र्ज़ी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने जब्त किए 461 कार्ड

पुलिस को मौके से 461 आधार कार्ड के अलावा,कई फ़ोटो,फिंगर प्रिंट स्कैनर ,मजिस्ट्रेट की नकली मुहर और एक बोर्ड जिसमें लिखा हुआ था कि भारत सरकार से संचालित सेंटर बरामद किया गया है.

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फ़र्ज़ी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने जब्त किए 461 कार्ड

फर्जी आधार कार्ड रैकेट चलाने वाले आरोपी गिरफ्तार

खास बातें

  1. पुलिस के अनुसार 5000 से ज्यादा फर्जी कार्ड बना चुके हैं आरोपी
  2. दुकान से किया गया आरोपियों को गिरफ्तार
  3. आरोपियों से कई और चीजें भी बरामद
नई दिल्ली: उत्तरी दिल्ली पुलिस ने शास्‍त्री नगर इलाके से फर्ज़ी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मास्टरमाइंड समेत दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है. उत्तरी दिल्ली के एडिशनल डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि उनकी टीम को एक सूचना मिली थी कि शास्‍त्री नगर इलाके में एक दुकान में बड़े पैमाने पर फर्ज़ी आधार कार्ड बनाने का काम चल रहा है. इस सूचना के आधार पर एक पुलिसकर्मी को कस्टमर बनाकर भेजा गया, जिसने दुकान में जाकर कहा कि उसे अपने आधार कार्ड में पता बदलवाना है, दुकानदार तुरंत इसके लिए तैयार हो गया. इसके बाद ही पुलिस ने दुकान से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

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पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास कुमार और सुशील कुमार के रूप में की है. गौरतलब है कि पुलिस को मौके से 461 आधार कार्ड के अलावा कई फ़ोटो, फिंगर प्रिंट स्कैनर, आई स्कैनर, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की नकली मुहर और एक बोर्ड जिसमें लिखा हुआ था कि भारत सरकार से संचालित सेंटर, बरामद किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वो 2017 के पहले आधार कार्ड बनाने थे लेकिन 2017 में भारत सरकार ने फर्ज़ी आधार कार्ड की शिकायतों के चलते प्राइवेट जगहों पर आधार कार्ड बनाने पर रोक लगा दी. जिससे उनकी आय कम हो गयी.

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इसके बाद 2018 में दोनों आरोपियों ने आधार कार्ड की डेटा एंट्री करने वाली एक फर्म से बात की और फर्म ने दोनों को डेटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर नौकरी में रख लिया, ये फर्म दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के परिसर में आधार कार्ड की डेटा एंट्री करती है. लेकिन किसी तकनीकी कारण से दोनों का यूजर आईडी एक ही दिन बंद हो गया. उसके बाद ये वापस अपनी दुकान में आ गए और किसी तरीके से उसी यूजर आईडी को दुबारा एक्टिवेट कर लिया और अवैध तरीके से फर्ज़ी पते पर आधार कार्ड तैयार करने लगे. पुलिस के मुताबिक ये लोग इस साल मार्च से फर्ज़ी आधार कार्ड तैयार कर रहे हैं और पुलिस सूत्रों के मुताबिक 5000 से ज्यादा कार्ड तैयार कर चुके हैं.

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क्या है नियम 
यूनिक आईडेन्टिफिकेशन ऑफ इंडिया ने जब आधार कार्ड बनाने की शुरुआत की जो आधार कार्ड की डेटा एंट्री का काम कुछ निजी कंपनियों और फर्मों को दिया गया, इन फर्मों ने ऐसे लोगों को हायर किया जिन्हें कंप्यूटर और डेटा एंट्री की जानकारी होती है, और फिर डेटा एंट्री का काम निजी जगहों पर होने लगा. लेकिन 2017 में फर्ज़ी आधार कार्ड की शिकायतों के चलते सरकार ने निजी जगहों पर आधार के डेटा एंट्री पर रोक लगा दी, यानी जो भी आधार कार्ड तैयार होगा वो सरकारी परिसर में होगा.

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फिर इन निजी फर्मों को इस काम के लिए सरकारी परिसर दिए हैं, ये फर्में डेटा ऑपरेटर्स हायर करती हैं, उन्हें यूजर आईडी देती हैं, लेकिन इन डेटा ऑपरेटर्स को काम सरकारी परिसर में ही करना होगा और ये अपने कंप्यूटर या दूसरे उपकरण भी सरकारी परिसर से बाहर नहीं निकाल सकते हैं.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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