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हथियारों का कारखाना, तार दाभोलकर और पानसरे के हत्यारों से तो नहीं जुड़े?

महाराष्ट्र के नालासोपारा और पुणे से गिरफ्तार आरोपियों के पास से हथियारों का जखीरा बरामद

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हथियारों का कारखाना, तार दाभोलकर और पानसरे के हत्यारों से तो नहीं जुड़े?

गिरफ्तार आरोपी.

खास बातें

  1. गौरक्षक के पास बंदूक और बम का क्या काम?
  2. आरोपी एक-दूसरे से संपर्क में थे, आतंकी साजिश करने की फिराक में थे
  3. दाभोलकर और पानसरे की हत्या के आरोपी ने भी किया था कारखाने का जिक्र
मुंबई: नालासोपारा और पुणे से शुक्रवार को गिरफ्तार आरोपियों के तार कहीं नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे के हत्यारों से तो नहीं जुड़े? ये सवाल इसलिए पैदा हुआ है क्योंकि दोनों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार आरोपी डॉ वीरेंद्र तावड़े के एक मेल में हथियारों का कारखाना बनाने का जिक्र था और गिरफ्तार तीनों आरोपियों के पास से जिस तरह हथियारों का जखीरा और उसे बनाने के लिए जरूरी सामान मिला है, कहीं ये वही कारखाना तो नहीं? वर्ना गौरक्षक के पास बंदूक और बम का क्या काम? वह भी इक्का-दुक्का नहीं बल्कि हथियारों का पूरा जखीरा.  

पहले वैभव राऊत के नालासोपारा वाले घर और दुकान से 20 देशी बम के साथ विस्फोटक, जिलेटिन स्टिक, डेटोनेटर, बैटरी और सर्किट जैसा सामान मिला. फिर उसके बाकी के दो साथियों शरद केलुस्कर और सुधन्वा गोंधलेकर की गिरफ्तारी के बाद अन्य एक जगह से हथियार बनाने के एक कारखाने का पता चला. वहां से मैगजीन भरी 10 देसी पिस्तौल, एक देशी कट्टा, एक एयर गन, 6 पिस्टल बैरल, 6 पिस्टल मैगजीन, गाड़ियों की 6 नम्बर प्लेटें, आधी बनी 6 पिस्तौल समेत अन्य सामान बरामद हुआ है. इतना ही नहीं गिरफ़्तारी के तीसरे दिन भी नालासोपारा से 5 देसी पिस्तौल, 3 अधबनी देसी पिस्तौल, 9 एमएम के 11 और 7.65 के 30 राउंड कारतूस सहित कई अवैध उपकरण मिले हैं.  

महाराष्ट्र एटीएस के डीसीपी धनंजय कुलकर्णी के मुताबिक सभी आरोपी एक-दूसरे से संपर्क में थे और आतंकी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे. अदालत ने तीनों को 18 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है और आगे की जांच जारी है.

यह भी पढ़ें : सनातन संस्था से जुड़े वैभव राउत सहित तीन गिरफ्तार, छापे में 20 देसी बम बरामद

मिले हथियारों और उपकरणों से संकेत साफ है कि आरोपियों ने बाकायदा हथियारों का कारखाना बना रखा था. कुछ ऐसे ही कारखाने का जिक्र डॉ वीरेंद्र तावड़े के एक मेल में भी था. डॉ वीरेंद्र तावड़े, डॉ नरेंद्र दाभोलकर और गोविन्द पानसरे की हत्या का आरोपी है. यही वजह है कि डॉ नरेंद्र दाभोलकर के बेटे हमीद दाभोलकर ने उस एंगल से भी जांच की मांग की है.
 
हमीद दाभोलकर ने एनडीटीवी को बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के सम्बंध उन संगठनों से हैं जिनके लोग नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्या के आरोप में गिरफ्तार हैं. अब इतने बड़े पैमाने पर हथियार पकड़े गए हैं तो अब ये पता लगाना जरूरी है कि यह किसलिए जमा किए जा रहे हैं.

नालासोपारा का रहने वाला वैभव राऊत सनातन संस्था से जुड़ा बताया जा रहा है लेकिन सनातन के वकील संजीव पुनालेकर का कहना है कि वह गौरक्षक है और गोवा में होने वाले सनातन के हिन्दू सम्मेलन में शामिल होता रहा है. हालांकि उन्होंने एटीएस पर फर्जी केस बनाने का आरोप भी लगाया. पुनालेकर के मुताबिक वैभव पालघर जिले के सक्रिय गौ रक्षक हैं. चूंकि वह गौवध का विरोध करता रहा है इसलिए बक़रीदी के दिनों में पुलिस उसे अक्सर इलाका छोड़ने के लिए नोटिस देती रही है. पुनालेकर का तो यहां तक दावा है कि यह पूरी कार्रवाई बीफ माफिया के इशारे पर हो रही है.

दूसरे आरोपी शरद केलुस्कर को भी नालासोपारा से ही गिरफ्तार किया गया है, लेकिन वह मूल रूप से औरंगाबाद के केसापुर गांव का रहने वाला है. एटीएस का दावा है कि शरद ने बम बनाने की ट्रेनिंग ले रखी है जबकि शरद के परिवार का कहना है कि खेती में नुकसान होने की वजह से उनका बेटा कोल्हापुर के एक वर्कशॉप में मोल्डिंग का काम करता था और हाल ही में उसने मोल्डिंग का अपना कारखाना खोलने की इच्छा जताई थी.

पुणे से गिरफ्तार तीसरा आरोपी सुधन्वा गोंधलेकर सतारा का रहने वाला है. विवादित सनातन संस्था की वेबसाइट  सनातन प्रभात में छपी खबर के मुताबिक सुधन्वा शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान संगठन से जुड़ा है.शिव प्रतिष्ठान उस संभाजी भिड़े गुरुजी की संस्था है जिनके ऊपर पुणे की भीमा कोरेगांव में हिंसा कराने का आरोप है.

अब इस पूरे मामले के खुलासे से राजनीति भी गरमा रही है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा है कि बहुत सारी खुफिया सूचनाओं के बाद एटीएस ने ये ऑपरेशन शुरू किया है और आरोपियों के पास से जो सामग्री बरामद की गई है वह बेहद खतरनाक है.

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने सनातन संस्था को बैन करने की मांग की है. लेकिन अभी कई अहम सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं जिसके लिए गहराई से जांच किए जाने की जरूरत होगी. ये भी सवाल है कि क्या गिरफ्तार हुए लोग समान सोच वाले सोशल मीडिया समूहों का हिस्सा थे. इसके लिए उनके मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक रिपोर्ट की छानबीन करनी होगी.

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VIDEO : वैभव राऊत के घर से हथियार बरामद

जांच एजेंसी एटीएस के मुताबिक तीनों का राज 7 अगस्त को मिली खुफिया सूचना के बाद खुला. तीनों ही आपस में फोन से जुड़े हैं और मुंबई, नालासोपारा, पुणे, सतारा और सोलापुर में आतंकी साजिश को अंजाम देने वाले थे. लेकिन किस तरह की साजिश औ रकौन था उनके निशाने पर, जांच एजेंसी ने अभी तक ये साफ नहीं किया है. लेकिन जिस तरह से बड़े पैमाने पर हथियारों का जखीरा मिला है, हथियार बनाने के कारखाने का खुलासा हो रहा है और तार नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या के आरोपियों से जुड़़ते दिख रहे हैं उससे एक बड़ी साजिश का संकेत साफ नजर आ रहा है.


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