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बलात्कार मामले में पुजारी बरी, अदालत ने महिला के दावों को खारिज किया

जैन ने कहा कि हालांकि बलात्कार के मामलों में केवल पीड़िता के बयान पर ही दोषी ठहराया जा सकता है, लेकिन इस मामले में महिला के बयान को ‘‘बढ़ा-चढ़ाकर’’ पेश किया गया और उसके साक्ष्यों पर संदेह है. इसलिए उसके ‘‘असंगत बयानों’’ पर विश्वास करना उचित नहीं है.

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बलात्कार मामले में पुजारी बरी, अदालत ने महिला के दावों को खारिज किया

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली: एक महिला के बयान पर विश्वास नहीं करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने मंदिर के एक पुजारी को बरी कर दिया है. महिला ने आरोप लगाए थे कि पुजारी ने उससे बलात्कार किया और उस पर हमला किया. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन ने कहा कि हालांकि बलात्कार के मामलों में केवल पीड़िता के बयान पर ही दोषी ठहराया जा सकता है, लेकिन इस मामले में महिला के बयान को ‘‘बढ़ा-चढ़ाकर’’ पेश किया गया और उसके साक्ष्यों पर संदेह है. इसलिए उसके ‘‘असंगत बयानों’’ पर विश्वास करना उचित नहीं है.

अदालत ने पुजारी के बयान पर विश्वास किया कि महिला ने उस पर यह समझकर हमला किया था कि उसके बेटे की सगाई तोड़ने में उसकी भूमिका थी. पुजारी ने कहा कि लड़की के परिवार ने महिला के बड़े बेटे के साथ यह पता चलने के बाद सगाई तोड़ दी कि उसका पति हत्या के एक मामले में संलिप्त था और उसका छोटा बेटा एक रिश्तेदार के साथ भाग गया था.

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न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि मामले की परिस्थितियों से पता चलता है कि... यह किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचता कि आरोपी ने याचिकाकर्ता के साथ बिना सहमति के उसे बेहोश कर यौन संबंध बनाए और उसे चोट पहुंचाई.’’
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उन्होंने कहा, ‘‘महिला के बयान सही प्रतीत नहीं होते. चीजें जिस तरीके से पेश की गईं वैसी प्रतीत नहीं होतीं.’’ 


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