POCSO कानून के दायरे में थे दिल्ली में 2018-19 के दौरान हुए रेप के 63 फीसदी मामले

रेप जैसी घटनाओं के खिलाफ देश के लोगों में गुस्सा है लेकिन बावजूद इसके इनमें कोई कमी आती नहीं दिख रही है.

POCSO कानून के दायरे में थे दिल्ली में 2018-19 के दौरान हुए रेप के 63 फीसदी मामले

2018-19 तक बलात्कार के दर्ज मामलों की संख्या में छह प्रतिशत कमी देखी गई.

खास बातें

  • 2012 में बना था POCSO एक्ट
  • अपराध जघन्य होने पर हो सकती है मौत की सजा
  • 2018 में कानून में बदलाव कर बनाया गया और कड़ा
नई दिल्ली:

POCSO कानून में 2018 में बदलाव होने के बाद भी बच्चों के साथ बलात्कार के मामलों में कमी आती नहीं दिख रही है. राजधानी दिल्ली में रेप के आंकड़ों को जुटाकर एक गैर सरकारी संगठन ने चौंका देने वाला खुलासा किया है. संगठन का दावा है कि दिल्ली में 2018-19 के दौरान दर्ज किये गए बलात्कार के 1,965 मामलों में से 63 प्रतिशत मामलों में बच्चों के साथ दुष्कर्म हुआ.  प्रजा फाउंडेशन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार दुष्कर्म के 1,965 मामलों में से 1,237 मामले पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत दर्ज हुए थे.

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बयान में कहा गया, “पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत बच्चों के खिलाफ अपराध के आंकड़ों में हमने पाया कि दिल्ली में दुष्कर्म के कुल मामलों में से 63 प्रतिशत मामलों में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध किया गया था.”

दिल्ली में 2014-15 से 2018-19 तक बलात्कार के दर्ज मामलों की संख्या में छह प्रतिशत कमी देखी गई जबकि यौन शोषण के मामलों में तीस प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.

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क्या है POCSO एक्ट?
POCSO एक्ट का पूरा नाम "The Protection Of Children From Sexual Offences Act" है. साल 2012 में बच्चों के प्रति यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने इस कानून को बनाया था.  पोक्सो एक्ट में 2018 में बदलाव करते हुए 12 साल तक के बच्चों से रेप करने पर मौत की सजा तक का प्रावधान किया गया है. 

 
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