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बढ़ सकती है अरविंद केजरीवाल के रिश्तेदार सुनील बंसल की मुश्किलें, ACB ने एक्सपर्ट्स को जांचने के लिए लिखा

एसीबी ने  पीडब्ल्यूडी घोटाले में  तीन एफआईआर दर्ज की है और इनमें दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल के रिश्तेदार सुनील बंसल पर घोटाले का आरोप है.

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बढ़ सकती है अरविंद केजरीवाल के रिश्तेदार सुनील बंसल की मुश्किलें, ACB ने एक्सपर्ट्स को जांचने के लिए लिखा

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केजरीवाल.

नई दिल्ली: दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई एसीबी ने सीपीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर पीडब्ल्यूडी द्वारा साइट पर हुए कामों की जांच एक्सपर्ट्स से कराने और ओपिनियन देने को कहा है ताकि पता लग सके जो काम हुए है वो मापदंडों के मुताबिक ठीक तरीके से हुए है या नहीं. एसीबी ने  पीडब्ल्यूडी घोटाले में  तीन एफआईआर दर्ज की है और इनमें दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल के रिश्तेदार सुनील बंसल पर घोटाले का आरोप है.

इससे माना जा रहा है कि रिश्वतखोरी के आरोपों का सामना कर रहे अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें और बढ़ने जा रही हैं. बता दें कि एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने कथित पीडब्ल्यूडी घोटाले में तीन एफआईआर दर्ज की हैं. इनमें से एक एफआईआर में केजरीवाल के साढ़ू सुरेंद्र बंसल की कंपनी रेणु कंस्ट्रक्शन्स का भी नाम है. बंसल का सोमवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था.

एफआईआर में क्या है? 
हालांकि एफआईआर में सुरेंद्र बंसल का नाम नहीं है. लेकिन उनकी कंपनी के अलावा पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और 2 अन्य आरोपियों के नाम इनमें दर्ज हैं. एसीबी ने सभी आरोपों पर भ्रष्टाचार-रोधी अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और जालसाजी से जुड़ी धाराएं (13(1) d 420, 468, 471, 120b, 34) लगाई हैं. एसीबी चीफ एमके मीणा के मुताबिक मुकदमे समाजसेवी राहुल शर्मा की शिकायत पर दर्ज हुए हैं. 

उनके मुताबिक दिल्ली सरकार के बर्खास्त मंत्री कपिल मिश्रा ने भी इस मामले में कुछ तथ्य उजागर करने की बात कही है. उन्हें इसके वलिए 11 तारीख को मिलने का वक्त दिया गया है. 

क्या है पीडब्ल्यूडी घोटाला? 
दरअसल, पीडब्ल्यूडी ने 2014 से 2016 के बीच नार्थ-वेस्ट दिल्ली में 2 जगह सीवर और नाली बनाने के काम का ठेका दिया था. आरोप है कि ये ठेका अरविंद केजरीवाल के साढ़ू सुरेंद्र बंसल की कंपनी रेणु कंस्ट्रक्शन को दिया गया और फिर ये काम आगे कुछ फर्जी कंपनियों को दे दिया गया. आरोपों के मुताबिक नियमों को ताक पर रख कर इस काम के करीब 10 करोड़ रुपये के बिल पास कर दिए गए. ये बिल बोगस कंपनियों के नाम ही पास किए गए थे जो सोनीपत और रोहिणी के फर्जी पतों पर दर्ज थीं. रोड एंटी करप्शन ऑर्गेनाइजेशन (RACO) नाम की एनजीओ के कार्यकर्ता राहुल शर्मा ने मामले को उठाया था.


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