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आध्यात्मिक यूनिवर्सिटी की पोल, NDTV से बातचीत में पीड़ित ने खोले कई राज़

NDTV से बातचीत में पीड़ित ने बताया कि उसकी छोटी बहन अभी भी आश्रम में है जिसको छुड़ाने की वो लगातार कोशिश कर रही है.

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आध्यात्मिक यूनिवर्सिटी की पोल, NDTV से बातचीत में पीड़ित ने खोले कई राज़
नई दिल्‍ली: जिस लड़की की शिकायत पर दिल्ली के रोहिणी इलाक़े के आध्यात्मिक विश्वविद्यालय पर शिकंजा कसा, उसने आश्रम के मुखिया वीरेन्द्र देव दीक्षित को लेकर कई और सनसनीखेज खुलासे किए हैं. NDTV से बातचीत में पीड़ित ने बताया कि उसकी छोटी बहन अभी भी आश्रम में है जिसको छुड़ाने की वो लगातार कोशिश कर रही है. गौरतलब है कि इसी लड़की ने बाबा पर रेप का केस दर्ज कराया है जिसके बाद दिल्ली हाइकोर्ट में पीआईएल दाखिल हुई थी और फिर बड़ी कार्रवाई शुरू हुई. पढ़ें पीड़ित लड़की ने क्‍या क्‍या खुलासे किए...

मेरे पिता पहले ब्रम्हकुमारी में जाते थे, फिर यहां के लोग उन्हें तोड़ कर ले गए ये बोल कर कि यहां एडवांस कोर्स चल रहा है, ब्रम्हा बाबा तो गुजर चुके हैं. यह सुन कर पापा ने पूरी फैमिली को ले जाना शुरू कर दिया था. वहां लड़कियां अलग होती थीं, वहां पुरुषों को जाने की इजाजत नहीं थी, सिर्फ बाबा ही मूव करते थे. वहां ये भट्टी एक बाहर के रूम में होती थी, जहां क्लासेस होते थे हफ्ते भर, जिसमें ब्रम्हाकुमारी के 4-5 पोस्टर समझाए जाते थे. जिसमें ये साबित करते थे कि हां यहां भगवान का पाठ चल रहा है. मैं 15 साल की उम्र से संडे के संडे क्लासेस में जाती थी तो बोलते थे कि हमें भट्टी करनी पड़ेगी तब जाकर बाबा का प्रत्यक्ष ज्ञान मिलेगा.

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जब लड़की से पूछा गया कि क्‍या इस कोर्स को करने के बाद मां बाप चले गए? तो लड़की ने कहा, 'हां, इस कोर्स के बारे में बोला जाता है कि जिस लड़की ने ये कोर्स कर लिया उसका पुरुषार्थ 100 लड़कों के बराबर है. हम तीन बहनों को छोड़कर मां बाप चले गए. फिर बाबा लड़कियों को शिकार बनाता था, माताएं लड़कियों को बाबा के रूम के पास तक लेकर जाती थीं और फिर बाबा रेप करता था. बाबा के रूम के आसपास इतनी हाइली एजुकेटेड लड़कियां होती थीं कि जब लड़की बाबा के रूम से निकले तो उसे लगे कि बाबा में कुछ बात तो होगी जो मुझसे ज्यादा पढ़ी लिखी लड़कियां यहां हैं, कुछ तो इसमें भगवान का पार्ट होगा.

सभी लड़कियों के साथ ऐसा होता है, और वो तभी जा पाती हैं जब बो पोता मेल लिखती हैं. पोता मेल एक तरह का कंफेशन होता जिसमें वो अपने साथ हुए गलत कामों के बारे में लिखती हैं, एक तरह से वो गंगा नहाने जैसा होता है. मैंने अपने मम्मी पापा से बताने की कोशिश की कि वहां लड़कियों के साथ ऐसे-ऐसे होता है. लेकिन वो सोचते थे कि ये ज्ञान में नहीं चलना चाहती. मैं मां-बाप के बिल्कुल ऑपोज़िट हो गयी, मैंने अपनी बीच वाली बहन को बचा के रखा. लेकिन जो मेरी सबसे छोटी बहन है वो मां के बहुत क्लोज है. वो उसे सरेंडर लेटर लिखकर वहीं छोड़ आए.

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मेरे मां बाप अंधविश्वास में लिप्त थे. वो बच्चों की सुनते ही नहीं थे. पापा दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे, कभी ऐसे रेप केस आते भी थे तो पापा या उनके जैसे लोगों से ही प्रोटेक्शन लेता था. अभी जो केस हुआ है इसमें मैंने पिता तक को नहीं बताया कि मैं केस कर रहीं हूं या अपनी बहन को छुड़ाने की कोशिश कर रहीं हूं. आश्रम में आप बीमार भी हैं तो आश्रम की दवा ही होती है, उन्हीं का खाना भी. अभी एक लड़की ने सुसाइड भी किया लेकिन उसका कुछ पता नहीं चलने दिया. बाबा का इतना दबदबा है.

कुछ लड़कियां विरोध करती हैं तो उन्हें बोला जाता है कि इसके अंदर आत्मा घुस गई है और फिर उसे टॉर्चर करवाया जाता है. उस टॉर्चर के बाद लड़की कुछ बोलने की स्थिति में नहीं होती. इस बाबा का तरीका ये होता है कि जो बच्चे आश्रम में आते हैं उनके मां बाप को बोलता है कि इनकी शादियां करवाओगे, उसमें पैसा खर्च करोगे, इसलिए इनके पैसे का बंटवारा पहले ही कर दो. जो लड़की आती चली जाती है उसका फिर सारा पैसा ले लेता है. ऐसे ही जो भाई ज्ञान में आता है उसकी प्रॉपर्टी लिखवा लेता है और रसीद सिर्फ 1000 रुपये की देता है.


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