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महिला अधिकारों से जुड़े कानून बनाने में भारत से भी पीछे है अमेरिका : डॉ. सुतापा बासु

डॉ. बासु महिला अधिकारों को लेकर आवाज उठाने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं और उन्हें दर्जनों सम्मान मिल चुके हैं.

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महिला अधिकारों से जुड़े कानून बनाने में भारत से भी पीछे है अमेरिका : डॉ. सुतापा बासु

जामिया मिल्लिया इस्‍लामिया में डॉ. सुतापा बासु

नई दिल्‍ली: 'अमेरिका दूसरे देशों की तरफ तो उंगली उठाता है, लेकिन महिला अधिकारों से जुड़े कानूनों के मामले में वो कई देशों से पीछे है. मेरे हिसाब से भारत में महिला अधिकारों को लेकर कई ऐसे प्रगतिशील कानून हैं जो अमेरिका में भी नहीं हैं लेकिन यहां पर चुनौती उन कानूनों के पालन की है.' अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के महिला केंद्र की निदेशक डॉ. सुतापा बासु ने दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में अध्यापकों और छात्रों से मुखातिब होते हुए ये बातें कहीं. डॉ. बासु महिला अधिकारों को लेकर आवाज उठाने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं और उन्हें दर्जनों सम्मान मिल चुके हैं. डॉ. सुतापा बासु ने कहा कि महिलाओं को हर तरह की हिंसा का शिकार होना पड़ता है.

अमेरिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हर 9 सेकेंड में अमेरिका में एक महिला हिंसा का शिकार होती है. दुनिया की हर 4 में से 1 महिला के साथ यौन शोषण होता है और अमेरिका उन देशों में शामिल है जहां महिलाओं के साथ सबसे ज़्यादा हिंसा होती है.

महिलाओं के अधिकार, मानवाधिकार हैं और इसे समझने की ज़रूरत है. डॉ. बासु जामिया में लीगल सेल, रजिस्ट्रार ऑफिस की तरफ से आयोजित "वुमेन्स राइट्स आर ह्यूमन राइट्स- अ पर्सपेक्टिव इन द करंट ग्लोबल इकॉनमी" शीर्षक पर बोल रहीं थीं.

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जामिया के कुलपति प्रोफेसर तलत अहमद ने डॉ. बासु का स्वागत किया और उनके बारे में लोगों को बताते हुए कहा, "पिछले 25 साल से वो वूमन सेन्टर की निदेशक हैं और अनगिनत अवार्ड डॉ. बासू को मिल चुके हैं जो ये बताता है कि वो कितनी महत्वपूर्ण शख्सियत हैं." डॉ. बासु के मुताबिक "दुनिया में 50 फीसदी आबादी महिलाओं की है लेकिन अधिकार उसके अनुपात में बहुत कम हैं. उनके साथ द्वितीय श्रेणी के नागरिक की तरह सलूक होता है."

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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