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अरविंद केजरीवाल के भविष्य का सवाल बना बवाना विधानसभा उपचुनाव, क्या 5 लगातार हार के बाद नसीब होगी जीत

ये चुनाव अगर किसी एक शख्स के लिए सबसे ज़्यादा अहम है या यूं कहें कि भविष्य का सवाल है तो वो हैं दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के सर्वोच्च नेता अरविंद केजरीवाल. 

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अरविंद केजरीवाल के भविष्य का सवाल बना बवाना विधानसभा उपचुनाव, क्या 5 लगातार हार के बाद नसीब होगी जीत

अरविंद केजरीवाल ( फाइल फोटो )

खास बातें

  1. 23 अगस्त को डाले जाएंगे वोट
  2. केजरीवाल के लिए यह चुनाव जीतना जरूरी
  3. पूरी ताकत झोंक रखी है सभी पार्टियों ने
नई दिल्ली: दिल्ली में 23 अगस्त को बवाना विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा जिसके लिए वैसे तो बीजेपी, कांग्रेस और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी  तीनों ही पार्टियों ने अपने प्रचार में स्टार प्रचारक से लेकर घर घर जाकर वोट मांगने और नुक्कड़ सभा करके ज़ोर लगाया हुआ है. लेकिन असल मे ये चुनाव अगर किसी एक शख्स के लिए सबसे ज़्यादा अहम है या यूं कहें कि भविष्य का सवाल है तो वो हैं दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के सर्वोच्च नेता अरविंद केजरीवाल. 

क्यों है बवाना केजरीवाल के भविष्य का सवाल 
फरवरी 2015 में दिल्ली विधानसभा की 70 में 67 सीट जीतने की ऐतिहासिक घटना के बाद से आम आदमी पार्टी या तो चुनाव हार रही है या उम्मीद और दावे के मुताबिक प्रदर्शन नही कर पा रही है. सिलसिलेवार तरीके से देखें तो 

1. सितंबर 2015 में दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई दूसरे, तीसरे और चौथे नंबर पर रही. 
2. अप्रैल 2016 में हुए नगर निगम उपचुनाव में वोट शेयर में दूसरे नंबर पर रही. 
3. मार्च 2017 में पंजाब और गोवा विधानसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नही कर पाई. पंजाब में दूसरे नंबर पर रही और गोवा में खाता भी नहीं खुला.
4. अप्रैल 2017 में राजौरी गार्डन उपचुनाव में ज़मानत ज़ब्त हो गई. 
5. अप्रैल 2017 में ही दिल्ली नगर निगम में बीजेपी के हाथों बुरी तरह हारी. 

इस हार का नतीजा ये हुआ कि पार्टी में व्याप्त असंतोष और आपसी मतभेद खुलकर सामने आने लगे और सवाल उठने लगे कि क्या अब अरविंद केजरीवाल का तिलिस्म टूट रहा है और पार्टी बिखर रही है?  इन सब को ध्यान में रखते हुए समझा जा सकता है कि अरविंद केजरीवाल को अपना आभामंडल और साख बनाये रखने के लिए बवाना विधानसभा उपचुनाव जीतना ही होगा. क्योंकि अब एक और हार दिल्ली में मौजूदा आप सरकार को अलोकप्रिय घोषित कर देगी क्योंकि आम तौर पर उपचुनाव सत्ताधारी जीतती हैं.


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बवाना में 'आप' का प्रचार 
बवाना में आम आदमी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है. इलाके में घूमने से पता चलेगा कि यहां सबसे ज़्यादा पोस्टर आम आदमी पार्टी ने ही दीवारों पर पाटे हुए हैं. दिल्ली सरकार के मंत्री और आप के प्रदेश प्रमुख गोपाल राय बीते दो महीने से बवाना में खूंटा गाड़कर बैठे हैं. खुद केजरीवाल काफ़ी समय से हर रविवार बवाना में प्रचार करते हैं और कार्यकर्ताओं से मिलते हैं. बीते रविवार को बवाना में 'महापंचायत' के नाम से जनसभा करके केजरीवाल ने शक्ति प्रदर्शन भी किया जिसमें दिल्ली सरकार के सभा मंत्री और 2 दर्जन विधायक मंच पर मौजूद थे. केजरीवाल जानते हैं कि केवल प्रचार करके बवाना निकालना इस समय उनके लिए आसान नही इसलिए उन्होंने बवाना में बीजेपी के दो अहम नेता अपनी पार्टी में शामिल किए हैं. पूर्व विधायक गुग्गन सिंह और पूर्व पार्षद नारायण सिंह.

'दिल्ली में हमारी सरकार'
केजरीवाल और उनकी पार्टी इस बात को जनता के बीच रखकर अपना प्रचार कर रही है कि दिल्ली में सरकार उनकी है ऐसे में में जनता अगर अपने काम करवाना चाहती है तो विधायक उसकी पार्टी का ही चुनें. केजरीवाल ने रविवार की सभा मे कहा 'दिल्ली में हमारी सरकार है आप कांग्रेस को वोट दोगे तो काम नहीं होंगे. आप बीजेपी को वोट दोगे तो वो लड़ेगा तो बहुत लेकिन काम नही होंगे काम तो हमने ही करवाने है इसलिए जैसे आपने अब तक हमारा साथ दिया है आगे भी बनाये रखियेगा'. हालांकि बवाना में पानी बड़ा मुद्दा है. केजरीवाल की सभा के दौरान बवाना के प्रह्लादपुर गांव की एक महिला ने केजरीवाल से शिकायत की उसके यहां पानी नहीं आता भी है तो गंदा आता है. 

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बीजेपी का प्रचार 
असल मे आप के बागी विधायक वेद प्रकाश ने ही यहां बीजेपी जॉइन करके बीजेपी के टिकट पर फिर से ताल ठोकी है. अप्रैल 2017 में नगर निगम चुनाव के समय आप विधायक रहे वेद प्रकाश अचानक बीजेपी में शामिल हो गए. बवाना की कृष्णा कॉलोनी में एक सभा करते हुए वो लोगों को समझा रहे थे कि आखिर उन्होंने आम आदमी पार्टी क्यों छोड़ी और क्यों बीते ढाई साल जब वो आप विधायक थे वो जनता के बीच पूरी तरह उपलब्ध क्यों नही थे. वेद प्रकाश के मुताबिक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में चुनाव जीतते ही सभी विधायकों को पंजाब की तैयारियों में लगा दिया था. अगर वो विरोध करते थे तो उनको चुप करवा दिया जाता था।. इसलिए जब उनके इलाके की जनता के काम होते नहीं दिखे तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी. 
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केंद्रीय मंत्री भी प्रचार में जुटे
हालांकि सभा मे मौजूद जनता उनके इस तरह से आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी से फिर चुनाव लड़ने से सहमत नहीं दिखी. लोगों के मुताबिक 'अगर केजरीवाल इनको काम नही करने दे रहे थे तो इनको हमको बताना चाहिए था हम केजरीवाल के यहां जाकर प्रदर्शन करते'.  साथ ही लोग ये भी कह रहे हैं कि जब वेद प्रकाश सत्ताधारी पार्टी में होकर काम नही करवा पाए तो अब बीजेपी से जीत भी गए तो विपक्ष में रहकर कैसे काम करवाएंगे?'  बीजेपी की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी से लेकर केंद्रीय मंत्री तक प्रचार में जुटे हैं. बीजेपी के लिए हाल के दिल्ली नगर निगम चुनाव का नतीजा मनोबल बढ़ाने वाला है. बवाना के 6 वार्ड में से 3 बीजेपी जीती थी जबकि आप और कांग्रेस 1-1 वार्ड जीते थे. 

Video : केजरीवाल की प्रतिष्ठा का सवाल​

कांग्रेस का प्रचार 
कांग्रेस ने तीन बार विधायक रह चुके सुरेंद्र कुमार को टिकट दिया गया है. पार्टी ने 40 पूर्व विधायक और 20 मौजूदा पार्षद को यहां प्रचार के काम में लगाया है. हरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा भी यहां प्रचार में जुटे हैं क्योंकि यहां के गांव में जाटों की आबादी अच्छी-खासी है. पार्टी दिल्ली और केंद्र सरकार की नाकामियों को भुनाकर यहां चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है.  बवाना में करीब तीन लाख वोटर हैं और ये दिल्ली के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. झुग्गी, कच्ची कॉलोनी और गांव में बंटा है बवाना. बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवार बवाना गांव से हैं जबकि आप उम्मीदवार शाहबाद डेरी की झुग्गी/कच्ची कॉलोनी से आते हैं. 28 अगस्त को इस चुनाव के नतीजे आएंगे.


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