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दिल्ली विधानसभा में आई CAG की रिपोर्ट, फैसलों पर उठाए गए कई सवाल

विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2016-17 के दिल्ली सरकार के कामकाज पर कैग ने रिपोर्ट पेश की

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दिल्ली विधानसभा में आई CAG की रिपोर्ट, फैसलों पर उठाए गए कई सवाल

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. कैग ने सरकार के कई फैसलों पर सवाल उठाए
  2. गलत फैसलों से हुए भारी नुकसान को किया रेखांकित
  3. विकास कार्यों में विलंब, धन का उपयोग नहीं किया गया
नई दिल्ली:
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दिल्ली विधानसभा में महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है. इस रिपोर्ट में सरकार के कई फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं.  

वित्तीय वर्ष 2016-17 के दिल्ली सरकार के कामकाज पर कैग ने रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट में रेखांकित किए गए प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं-
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद मयूर विहार में दिल्ली हाट बनाने में 39.66 लाख रुपये का खर्च बेकार हुआ.
  • 2682 डीटीसी बसों का बीमा नहीं होने से टाटा मोटर्स को करोड़ों का फायदा हुआ.
  • द्वारका-8 डिपो के विकास में निगरानी रखने में डीटीसी विफल रहा जिससे 50.72 लाख रुपये बिजली बिल आया.
  • अपेक्षित वैट से सरकार को 416.94 करोड़ की कम प्राप्ति हुई.
  • तीन मेडिकल कॉलिज टिबिया कॉलिज, बीआर सुर होमियोपैथी कॉलिज, चौधरी ब्रह्म प्रकाश चरक संस्थान में 37 से 52% डॉक्टर, फार्मासिस्ट, और नर्स कैडर में कमी.
  • सड़क नेटवर्क तैयार करने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां शिकायतों का समाधान करने में विफल रही हैं.
  • SDMC द्वारा नाले के निर्माण और सौंदर्यीकरण पर खर्च किए 30.92 करोड़ पर उठे सवाल
  • EDMC ने वजीराबाद सड़क से शिव विहार तिराहा और करावल नगर सड़क की अपूर्ण रिमोल्डिंग में 8.34 करोड़ बर्बाद किए.
  • नौरोजी नगर और पुष्प विहार में पर्यावरण के मानदंडों का अनुपालन किए बिना नालों को ढंकने के कारण 40.58 करोड़ के व्यय से नुकसान.
  • नार्थ DMC पर 66.98 करोड़ की भूमि की लागत और भूमि किराया की वसूली नहीं हुई.
  • राष्ट्रीय खेलकूद 2001 नीति को अंतिम रूप नहीं दिया गया. 13 जिलों में से तीन जिलों में एक भी खेलकूद सुविधा नहीं है. छह जिलों में 7.69 लाख छात्रों के बावजूद स्वीमिंग पूल के अलावा कोई खेलकूद सुविधा नहीं.
  • 2003 में दिल्ली स्पोर्ट्स स्कूल के लिए भूमि अधिग्रहण के बावजूद जून 2017 तक यह स्थापित नहीं हुआ.
  • खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अधीन लाभार्थियों के पंजीकरण में कमी.
  • वर्ष 2014 से 2017 के दौरान वृक्षारोपण में 23% की कमी आई है, 36.57 लाख की जगह 28.12 लाख ही वृक्ष लगाए गए.
  • दिल्ली में चल रहे 68 रक्त कोषों में से 32 केंद्र बिना लाइसेंस के चल रहे हैं. 2016-17 में दिल्ली में स्वैच्छिक रक्त संग्रहण घटा है. रक्त कोषों की कार्यप्रणाली पर निरीक्षण और निगरानी नाकाफी है.
  • 26 अस्पतालों की ओर से 14.79 करोड़ के परिवहन भत्ते का अनियमित भुगतान.
  • दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में स्टाफ की कमी के कारण उपक्रम निष्क्रिय पड़े हैं.
  • दो अक्टूबर 2014 से शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन से ढाई साल तक एक भी शौचालय नहीं बना. इसके लिए आवंटित 40.31 करोड़ की रकम का इस्तेमाल नहीं हुआ.
  • जल बोर्ड की ओर से खरीदे गए 3.18 करोड़ के उपकरण निष्क्रिय पड़े रहे.
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