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हरियाणा और पंजाब से सामने आने लगीं पराली जलाने की घटनाएं, दिल्ली-एनसीआर की चिंता बढ़ी

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ का वेब फायर मैपर पंजाब सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बिखरे कुछ लाल बिंदू दिखा रहा है.

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हरियाणा और पंजाब से सामने आने लगीं पराली जलाने की घटनाएं, दिल्ली-एनसीआर की चिंता बढ़ी

प्रतीकात्मक तस्वीर

खास बातें

  1. अधिकारी ने कहा, दोनों पुष्ट मामले पानीपत में सामने आए .
  2. फतेहाबाद से भी एक मामला सामने आया.
  3. हरियाणा ने 22 सितंबर को क्षेत्र की उपग्रह से निगरानी शुरू की थी.
नई दिल्ली: दिनों-दिन बढ़ते प्रदुष्ण की रोकथाम के लिए देश और राज्य की सरकारे कई तरह के अभियान आम जन के बीच लाती रहतीं हैं, चाहें फिर वो दिल्ली सरकार की ऑड-ईवन योजना हो या कोई अन्य, लेकिन बात वहीं आकर थम जाती है जब देश का आम जन इसमें अपनी भागीदारी नहीं समझता और गैरजिम्मेदारी में लिप्त होकर जाने-अनजाने प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों को हवा में जलाने से बाज नहीं आता है.

हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में खेतों में पराली यानी फसल के अवशेष जलाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे दिल्ली-एनसीआर और इसके आसपास के राज्यों में चिंताएं बढ़ रही हैं. हरियाणा के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पराली जलाने की दो रिपोर्टों की पुष्टि की है जबकि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ का वेब फायर मैपर पंजाब सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बिखरे कुछ लाल बिंदू दिखा रहा है. हरियाणा ने 22 सितंबर को क्षेत्र की उपग्रह से निगरानी शुरू की और इसके बाद से अधिकारियों ने दो वाकये देखे जहां किसान पराली जला रहे थे . इसकी जानकारी पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) को दी गई है .

हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, ‘दोनों पुष्ट मामले पानीपत में सामने आए. फतेहाबाद से भी एक मामला सामने आया, लेकिन अधिकारियों ने अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि क्या यह पराली जलाने का मामला था.’ बहरहाल, उच्चतम न्यायालय के आदेश पर गठित ईपीसीए को उम्मीद है कि राज्य के अधिकारियों की ओर से की चलाए जा रहे निगरानी और जागरूकता अभियान का नतीजा सकारात्मक निकलेगा और पिछले कुछ सालों का वैसा अनुभव इस बार देखने को नहीं मिलेगा जिसमें पराली जलाने के कारण दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती थी.

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इस बार दिल्ली सरकार पराली जलाने को लेकर खास तौर पर चिंतित है, क्योंकि शहर में अक्तूबर में अंडर-17 फीफा विश्व कप के कुछ मैचों का आयोजन होने जा रहा है और बड़े पैमाने पर ‘स्मॉग’ फैलने से देश की छवि खराब हो सकती है.पिछले साल इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया था. दिल्ली ने पराली जलाने से किसानों को रोकने में नाकाम रहने के लिए हरियाणा और पंजाब को जिम्मेदार ठहराया था. दिल्ली ने कहा था कि पराली जलाने के कारण शहर में वायु प्रदूषण गंभीर रूप ले चुका था. ईपीसीए के अध्यक्ष भूरे लाल के मुताबिक, जाड़े के मौसम की शुरूआत से पहले पंजाब और हरियाणा में करीब 3.5 करोड़ टन पराली जलाई जाती है, ताकि रबी फसलों की बुवाई के लिए खेतों को साफ किया जा सके .

हरियाणा प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि वे हालात को लेकर स्थानीय प्रशासन और ईपीसीए को लगातार जानकारी दे रहे हैं . पंजाब एक अक्तूबर से निगरानी शुरू करेगा.पंजाब के एक अधिकारी ने बताया कि ‘नासा’ की ओर से दिखाए जा रहे लाल बिंदु हो सकता है कि सही तस्वीर नहीं पेश कर रहे हों, क्योंकि यह हर तरह की चीजें जलाने को दर्शाता है . पराली जलाने का काम 20 अक्तूबर के आसपास चरम पर होता है.

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पराली जलाने से हवा तो प्रदूषित होती ही है, साथ में खेतों की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है.कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, एक टन पराली जलाने से 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फॉस्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाशियम और 1.2 किलोग्राम सल्फर का नुकसान होता है .

VIDEO :  गंगा के प्रदूषण के खिलाफ सख्ती​
वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए ईपीसीए की ओर से तैयार ‘समग्र कार्य योजना’ का मसौदा उच्चतम न्यायालय को सौंप दिया गया है . कार्य योजना में पंजाब एवं हरियाणा में पराली जलाने पर पाबंदी को सख्ती से लागू करने की वकालत की गई है . इसमें किसानों को ऐसे उपकरणों की खरीद के लिए रियायत देने को भी कहा गया है जिससे पराली जलाने की जरूरत ही नहीं आती हो.(इनपुट भाषा से)


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