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सीआईएसएफ अब हवाईअड्डों पर दिव्यांग यात्रियों से कृत्रिम अंग हटाने, व्हीलचेयर से उठने को नहीं कहेगी

सीआईएसएफ के महानिदेशक ओ पी सिंह ने बताया कि दिव्यांग लोगों के लिए हवाई यात्रा को सुगम बनाने पर केंद्रित एक बड़े फैसले के तहत उनका बल अब विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर और विजुअल प्रोफाइलिंग का इस्तेमाल करेगा.

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सीआईएसएफ अब हवाईअड्डों पर दिव्यांग यात्रियों से कृत्रिम अंग हटाने, व्हीलचेयर से उठने को नहीं कहेगी

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

खास बातें

  1. अब ऐसा सिर्फ चुनिंदा मामलों या संदेह की स्थिति में ही’ किया जाएगा.
  2. अब ट्रेस डिटेक्टर और विजुअल प्रोफाइलिंग का इस्तेमाल होगा.
  3. कहा हमने इस संबंध में अनेक शिकायतें देखी हैं.
नई दिल्ली: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षाबल (सीआईएसएफ) ने  हवाईअड्डों पर दिव्यांग यात्रियों की सुविधा और सम्मान को देखते हुए हवाई सुरक्षा ड्रिल को लेकर एक नया फैसला लिया है. सीआईएसएफ ने हवाईअड्डों पर जांच पड़ताल के लिए दिव्यांग यात्रियों से कृत्रिम अंग हटाने और व्हीलचेयर से उठने की बात कहने जैसी ‘अपमानजनक’ हवाई सुरक्षा ड्रिल को बंद करने का फैसला किया है. सीआईएसएफ के महानिदेशक ओ पी सिंह ने बताया कि दिव्यांग लोगों के लिए हवाई यात्रा को सुगम बनाने पर केंद्रित एक बड़े फैसले के तहत उनका बल अब विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर और विजुअल प्रोफाइलिंग का इस्तेमाल करेगा. दिव्यांग कार्यकर्ताओं और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो तथा अन्य पक्षों के साथ बैठक के बाद बल ने अपनी सुरक्षा के दायरे में आने वाले सभी भारतीय हवाईअड्डों पर नयी प्रणाली के हिसाब से अपने कर्मियों को व्यापक प्रशिक्षण देने के लिए यह फैसला किया.

सीआईएसएफ देश में इस बारे में सर्वेक्षण भी कराएगी कि हर रोज इस तरह के कितने यात्री हवाई सफर करते हैं. सिंह ने जानकारी देते हुए कहा, ‘उद्देश्य यह सुनिश्चित करने का है कि इस तरह के यात्रियों को भारतीय हवाईअड्डों के जरिए यात्रा करते समय किसी भी तरह के अपमान या असुविधा का सामना न करना पड़े. हमने इस संबंध में अनेक शिकायतें देखी हैं.’

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उन्होंने कहा, ‘अब हमने ऐसे यात्रियों से सबकुछ बाहर निकालने की बात कहने की जगह उनका, उनके कृत्रिम अंगों या व्हीलचेयर की जांच विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर और विजुअल प्रोफाइलिंग विधि से करने का फैसला किया है.’ विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर (ईटीडी) एक स्मार्ट मशीन है जो किसी चीज में मौजूद विस्फोटक सामग्री का पता लगा लेता है और सुरक्षाकर्मियों को सतर्क कर देता है. सिंह के अनुसार विमान में सवार होने से पहले ऐसे यात्रियों से कृत्रिम अंग उतारने या व्हलीचेयर से उठने (जिससे कि इन चीजों को स्कैनर में डाला जा सके) के लिए कहने की वर्तमान प्रक्रिया का इस्तेमाल ‘चुनिंदा मामलों या संदेह की स्थिति में ही’ किया जाएगा.

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उन्होंने कहा, ‘हम जल्द ही मानक संचालन प्रक्रियाओं की नयी सूची जारी करने जा रहे हैं जिससे कि नयी प्रणाली समान ढंग से लागू की जा सके.’ सिंह ने कहा, ‘हम अपनी सुरक्षा के दायरे में आने वाले सभी 59 हवाईअड्डों पर सर्वेक्षण भी कराएंगे कि हम औसतन कितने दिव्यांग यात्री प्राप्त करते हैं. इससे हमें इस बारे में जानकारी मिलेगा कि नयी मानक प्रक्रियाओं को किस तरह क्रियान्वित किया जाए.’

(इुुनपुट भाषा से)

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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