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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूल परिसर में दुकान खोलने की अनुमति देने का निर्णय किया

स्कूलों को सलाह दी गयी है कि शैक्षिक सत्र 2018-19 के लिये स्कूल एनसीईआरटी पुस्तक संबंधी लिंक पर पंजीकरण करायें.

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूल परिसर में दुकान खोलने की अनुमति देने का निर्णय किया

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

खास बातें

  1. निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले बहुत ज्यादा महंगी होती है.
  2. पुस्तकों के बारे में अपनी मांग ऑनलाइन रखने को कहा गया है
  3. स्टेशनरी एवं अन्य सामग्री बेचने की अनुमति भी दी जायेगी .
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपने एक परिपत्र में संशोधन किया है. पत्र में बोर्ड ने परिसर में दुकान खोलने की इजाजत दी है. देश भर के सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग सुनिश्चित करने के मकसद से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अप्रैल 2017 के अपने एक परिपत्र में संशोधन करते हुए स्कूल परिसर में दुकान (शॉप) खोलने की अनुमति देने का निर्णय किया है. सीबीएसई के उप सचिव के श्रीनिवासन की ओर से जारी परिपत्र में कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में एनसीईआरटी पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये उनसे अपनी जरूरत के अनुसार मांग पत्र पेश करने को कहा है.

स्कूलों को सलाह दी गयी है कि शैक्षिक सत्र 2018-19 के लिये स्कूल एनसीईआरटी पुस्तक संबंधी लिंक पर पंजीकरण करायें. सभी सीबीएसई स्कूलों को 9 अगस्त 2017 को जारी परिपत्र के माध्यम से एनसीईआरटी के लिंक पर पंजीकृत कराने और पुस्तकों के बारे में अपनी मांग ऑनलाइन रखने को कहा गया है.

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परिपत्र के मुताबिक, छात्रों में पुस्तकों का वितरण करने के उद्देश्य से स्कूल परिसरों में एक दुकान (शॉप) खोली जा सकती है. इन दुकानों के माध्यम से छात्रों की जरूरत के अनुरूप स्टेशनरी एवं अन्य सामग्री बेचने की अनुमति भी दी जायेगी .

इसमें कहा गया है कि इस संबंध में 19 अप्रैल 2017 का परिपत्र संशोधित किया जाता है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के सभी सीबीएसई स्कूलों को एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करना सुनिश्चित कराने पर जोर दिया है. कुछ ही समय पहले मंत्रालय की एक समीक्षा बैठक में यह बात प्रमुखता से उठी और मंत्रालय ने स्कूलों में एनसीईआरटी पुस्तक सुनिश्चित कराने को कहा था . इस कदम से लाखों की संख्या में अभिभावकों को राहत मिलेगी क्योंकि सीबीएसई स्कूल लोगों को निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं . निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले बहुत ज्यादा महंगी होती है.

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने ‘भाषा’ को बताया कि एनसीईआरटी को देश भर में पर्याप्त संख्या में पुस्तकें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है ताकि बच्चों को पुस्तकें मिल सके और अभिभावकों का बोझ कम किया जा सके. स्कूलों और अभिभावकों की शिकायत थी कि एनसीईआरटी की किताबें समय पर उपलब्ध नहीं होती हैं. कई अभिभावकों ने यह भी शिकायत की थी कि स्कूल निजी प्रकाशकों की काफी महंगी किताबें बेच रहे हैं.

समीक्षा बैठक में ऐसी शिकायतें सामने आई कि स्कूल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें बेचने के अलावा पेंसिल, इरेजर्स और स्टेशनरी भी मनमाने दामों पर बेचते हैं. ये चीजें अगर अभिभावक बाहर बाजार से खरीदें तो उनको बहुत कम खर्च पड़ेगा. ऐसी भी शिकायतें आई है कि निजी प्रकाशक स्कूल के प्रमुखों के कई तरह के खर्च उठा रहे हैं.

इससे पहले, 19 अप्रैल 2017 के परिपत्र के माध्यम से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों से अपने परिसर में व्यावसायिक तरीके से पाठ्यपुस्तकें, नोटबुक और पोशाकों की बिक्री नहीं करने का निर्देश दिया था, साथ ही एनसीईआरटी : सीबीएसई की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करने को कहा है . (इनपुट भाषा से)


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